पूर्व सैनिकों के लिए ए श्रेणी अस्पताल की कवायद

Gorakhpur Updated Tue, 24 Jul 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। पूर्व सैनिकों के लिए अब ए श्रेणी के अस्पताल की जरूरत महसूस की जाने लगी है, इसके लिए आर्मी हेडक्वार्टर को लिखा गया है। ऐसा होने से लगभग 20 हजार सैनिकों को दवा के लिए ज्यादा बजट और बेहतर सुविधाएं मुहैया होने लगेगी, डाक्टरों की संख्या में इजाफा हो जाएगा। इसके अलावा दो प्राइवेट अस्पताल भी पूर्व सैनिकों के इलाज के लिए अपना आवेदन किये हैं।
सरहद की हिफाजत में जीवन का अमूल्य समय देने वाले पूर्व सैनिकों के बेहतर इलाज की सुविधा यहां पर नहीं थी। उनके लिए जो अस्पताल है वह भी डी श्रेणी का है। उनकी चिकित्सा का प्रबंध अंशदाई स्वास्थ्य योजना के तहत किया जाता है। योजना की शुरुआत वर्ष 2003 में की गई। सैनिकों की संख्या के आधार पर अस्पताल की कटेगरी का निर्धारण किया जाता है। जिस समय यहां पर अस्पताल का निर्धारण हुआ उस समय सैनिकों की संख्या पांच हजार से कम थी। इस नाते डी कटेगरी के अस्पताल का चयन हुआ। इस कटेगरी के अस्पताल में दो डाक्टर उपलब्ध हैं। मरीजों को दवा खरीदने के लिए फंड भी कम मिलता है। अब सैनिकों की संख्या लगभग 20 हजार हो गई है। यहां पर बिहार और नेपाल के भी सैनिक आते हैं। बीमारी गंभीर हुई तो लखनऊ और दिल्ली भी जाना पड़ता है। इन सब हालातों को देख सुविधाएं बढ़ाने पर विचार हो रहा है।
जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर राम मोहन पांडेय के मुताबिक ए श्रेणी के अस्पताल के लिए रक्षा मंत्रालय को लिखा गया है। उनका कहना है कि गंभीर बीमारियों पर पूर्व सैनिकों को इलाज के लिए प्राइवेट अस्पतालों में जाकर अधिक पैसा खर्च करना पड़ता है। अब शहर के दो अस्पताल फातिमा और राज आई हास्पिटल इन पूर्व सैनिकों का इलाज करने को तैयार हैं। इसके लिए भी रक्षा मंत्रालय को लिखा गया है। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद इन अस्पतालों में इलाज शुरू हो जाएगा। इलाज पर जो खर्च आएगा उसका भुगतान रक्षा मंत्रालय की तरफ से होगा।

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