विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार और प्रोफेसर में नोकझोंक

Gorakhpur Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। कुलसचिव द्वारा छात्रावास की समस्याओं की जानकारी मांगने पर आपत्ति जताते हुए गोरखपुर विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर उनसे भिड़ गए। कुलसचिव कार्यालय में दोनों के बीच खूब तू-तू मैं मैं के साथ जमकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल हुआ। नियंता ने बीचबचाव कर किसी तरह मामले को शांत कराया।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्रावास से जुड़े एक मामले में कुलसचिव द्वारा पत्र लिखे जाने पर एनसी हास्टल के वार्डन और भूगोल विभाग के शिक्षक प्रो. केएन सिंह का गुस्सा भड़क उठा। दरअसल विश्वविद्यालय में कुछ दिन पहले ही छात्रावास की समस्या को लेकर छात्रों ने कुलसचिव को दिए गए पत्र में बिंदुवार समस्या गिनाई थी। इसके बाद कुलसचिव ने छात्रावास के वार्डन प्रो. केएन सिंह को पत्र भेजकर समस्याओं के बारे में तीन दिन के भीतर जानकारी मांगी थी। जैसे ही यह पत्र प्रो. सिंह को मिला वह भड़क गए। दोपहर करीब एक बजे कुलसचिव कार्यालय पहुंचकर उन्होंने इस पर अपनी लिखित आपत्ति जताई। प्रोफेसर का कहना था कि बिना कुलपति के आदेश के कुलसचिव किसी वार्डन या प्रोफेसर को इस तरह का पत्र नहीं भेज सकते हैं। जवाब में कुलसचिव ने नियमों, कुलपति के एक आदेश का हवाला दिया। बात बढ़ती गई और सबने एक दूसरे को जिम्मेदारी से काम करने की बात तक कह डाली। स्थिति बिगड़ती देख वहां बैठे नियंता प्रो. ओपी पांडेय ने बीचबचाव कर किसी तरह मामले को शांत कराया। आधे घंटे तक चली नोकझोंक के बाद कुलपति से मिलकर आपत्ति दर्ज कराने की बात कहकर प्रो. सिंह वहां से वापस लौटे।

‘कुलसचिव ने जो कुछ भी किया वह शिक्षक के लिए मर्यादा के अनुरूप नहीं है। बिना कुलपति को संज्ञान में लिए विश्वविद्यालय के शिक्षक को कुलसचिव पत्र नहीं भेज सकते हैं। कुलपति को मामले से अवगत करा चुका हूं, जरूरत पड़ी तो कुलाधिपति को भी पत्र भेजा जाएगा।’
प्रो. केएन सिंह

छात्रावास में रहने वाले छात्रों ने वहां की समस्याओं को समाप्त करने की मांग की थी। उन्होंने वहां व्याप्त समस्याओं के समाधान के लिए वार्डन को पत्र भेजकर जानकारी मांगी थी।’ बीके सिन्हा, कुलसचिव

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