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जेई, एईएस से लड़ाई में सफलता, मरीज घटे-मौत भी कम हुई

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Fri, 07 Dec 2018 12:10 AM IST
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संतोष सिंह
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गोरखपुर। जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के खिलाफ लड़ाई में स्वास्थ्य विभाग को सफलता मिली है। जन जागरूकता के साथ ही साफ-सफाई की वजह से इस गंभीर बीमारी के मरीज आधे से भी कम हो गए हैं। मौत का आंकड़ा भी घटा है। जनवरी से 30 नवंबर के बीच गोरखपुर मंडल के चार जिलों में 122 मरीजों की मौत हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 310 मौतें हुई थीं।
इंसेफेलाइटिस से कम हुई मौतों को स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कामयाबी बताई और बृहस्पतिवार को रिपोर्ट शासन को भेज दी। इसके मुताबिक मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी में 30 नवंबर तक जेई, एईएस के 1,225 मरीज भर्ती कराए गए। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है। पिछले साल करीब 3,000 मरीजों का इलाज हुआ था। चार जिलों के अलग-अलग अस्पतालों में मरीज भर्ती कराए गए थे।

ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा दिक्कत

जनवरी से नवंबर के बीच गोरखपुर में 41 मौत हुई। ज्यादातर मरीज ग्रामीण क्षेत्र से आए थे। चरगांवा, पिपराइच, भटहट और चौरीचौरा विकास खंड के मरीजों की संख्या ज्यादा थी। कुशीनगर में 39, महराजगंज में 23 और देवरिया में 19 मरीजों की मौत जेई या फिर एईएस से हुई है।

पिछले साल हुई थी 375 मरीजों की मौत

जनवरी से 31 दिसंबर 2017 के बीच गोरखपुर मंडल के चार जिलों में जेई, एईएस से 375 मरीजों की मौत हुई थी। बीआरडी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी में करीब 300 मरीज भर्ती कराए गए थे। सबसे ज्यादा मरीज गोरखपुर में मिले थे। कुशीनगर, देवरिया और महराजगंज से भी मरीज आए थे। पिछले जनवरी से नवंबर के बीच 310 मरीजों ने दम तोड़ा था।

पहली बार डेथ ऑडिट

जेई, एईएस से मौत की पहली बार डेथ ऑडिट कराई जा रही है। इसकी रिपोर्ट जल्द ही शासन को भेजी जाएगी। शासन की मंशा है कि गंभीर बीमारी से मरने या फिर विकलांग होने वाले व्यक्ति के घर वालों को आर्थिक सहायता दी जाए। डेथ ऑडिट से ही मौत की असली वजह से सामने आ सकेगी। दरअसल, गंभीर बीमारी से मरने वाले व्यक्ति के परिवार को पिछले साल 50 हजार रुपये की मदद दी गई थी। बीमारी के चलते विकलांगता झेलने वाले व्यक्ति और उसके घर वालों को एक लाख रुपये मिले थे।

जनजागरूकता, सफाई और वृहद टीकाकरण अभियान का असर दिख रहा है। मरीज घट गए और मौतें भी कम हुई हैं। गंभीर बीमारी के खिलाफ शासन, जनता की मुहिम जरूर रंग लाएगी। बीमारी को जड़ से मिटाने की कोशिश जारी रहेगी। यह पूर्वांचल की बड़ी समस्या है।
- डॉ. वीके श्रीवास्तव, मंडलीय समन्वयक इंसेफेलाइटिस

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