दादी-नानी की कहानियों और चौपाल की फिर से जरूरत : डॉ. नवाज देवबंदी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Sun, 12 Aug 2018 12:51 AM IST
अमर उजाला के कार्यक्रम में नवाज देवबंदी
अमर उजाला के कार्यक्रम में नवाज देवबंदी - फोटो : अमर उजाला
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आशुतोष मिश्र
गोरखपुर। हमारा समाज संस्कारी और आदर्शवादी नहीं रहा। इसका कारण है कि हमारे पाठ्यक्रम से श्रवण कुमार, राजा दशरथ और लकड़हारे की कहानियां गायब हैं। हम ये चाहते हैं कि नई पीढ़ी आदर्श और संस्कार वाली हो तो हमें अपने बच्चों को ऐसा ही पाठ्यक्रम पढ़ाना होगा। ‘मां तुझे प्रणाम’ के तहत आयोजित कवि सम्मेलन में शिरकत करने से पहले मशहूर शायर डॉ. नवाज देवबंदी ने खास बातचीत में ये बातें कहीं।

उन्होंने कहा कि आज हमें दादी, नानी की कहानियों और चौपाल की फिर से जरूरत है। एक ड्राइंग रूम में मां, बाप, बेटा, बेटी एक साथ बैठकर चार मोबाइल पर चार जिंदगियां जी रहे हैं। किसी के पास दूसरे के लिए वक्त नहीं है। स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित अमर उजाला के कार्यक्रम की सराहना करते हुए डॉ. नवाज देवबंदी ने कहा कि आज हम सामाजिक, राजनीतिक और पारिवारिक रूप से बिखर रहे हैं। हमें कोई चीज जोड़ सकती है तो वह साहित्य है। हमारे समाज और देश को साहित्य प्रधान होना चाहिए। यह एक सेतु है सबको जोड़ने का। हमारे देश की मिट्टी की प्रवृति प्रेम और स्नेह है। हम नई पीढ़ी को दोष नहीं दे सकते। हमें अपने आप से ज्यादा शिकायत होनी चाहिए। अगर देश को फिर से सोने की चिड़िया बनाना है तो जरूरी है कि हम मोहब्बत के सेतु पर तिरंगा झंडा लहराएं...हिंदुस्तान जिंदाबाद।

गजल का जुड़ाव अंतरात्मा से और अंतरात्मा अमर

नए दौर के रचनाकारों की बाबत डॉ. नवाज कहते हैं वो पढ़कर नहीं आ रही। उसे पढ़ने की जरूरत है। तभी कोई नई बात कही जा सकेगी। गजल के बारे में एक सवाल पर वह बोले, इसका जुड़ाव अंतरात्मा से है। अंतरात्मा कभी मरती नहीं। गजल की एक लाइन जिंदगी से मायूस शख्स को जीने के लिए मजबूर कर देती है। ये हौसला है, उत्साह है। गजल अंतरात्मा की तृप्ति का साधन है।

बेटियाें की शिक्षा से होगी बड़ी क्रांति

19 देशों में अपनी शायरी से देश का प्रतिनिधित्व कर चुके डॉ. नवाज देवबंदी मानते हैं कि अगर बड़ी क्रांति आएगी तो बेटियों से आएगी। इसलिए वह बेटियों की तालीम के लिए 25 स्कूल भी चलाते हैं। कहते हैं कि बेटियां पढ़ी-लिखी होंगी तो नई पीढ़ी संस्कारी होगी और वह शेर सुना देते हैं... ‘एक आंखों के पास है/ एक आंखों से दूर/ बेटा हीरा होता है/और बेटी कोहीनूर।’

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