हर तरफ दिखी माह-ए-रमजान की खुमारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Fri, 18 May 2018 06:49 PM IST
घंटाघर में इफ्तार करते लोग।
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गोरखपुर। मुस्लिम समुदाय ने माह-ए-रमजान का पहला रोजा इबादत व जिक्र-ए-इलाही में गुजारा । रहमत के अशरे में लोगों ने अपने लिए खास दुआएं कीं। अलसुबह रोजेदारों ने सहरी खायी। पुरुषों ने मस्जिदों में तो महिलाओं ने घरों में नमाज-ए-फज्र अदा कर दुआ मांगी। सभी ने मिलकर रसूल-ए-खुदा पर दरूदों-सलाम का नजराना पेश किया। इसके बाद कुरआन शरीफ की तिलावत की गयी। दोपहर में जोहर की नमाज अदा की गयी। मस्जिदें नमाजियों से खचाखच भरी रहीं।
घरों में महिलाओं ने मुसल्ला बिछा नमाज अदा की और कुरआन शरीफ की तिलावत की। इसके बाद इफ्तारी की तैयारी शुरू हो गयी। लजीज व्यंजन बनने शुरू हुए। तमाम तरह की पकौड़ियां, चिप्स, पापड़, चना, शर्बत, समोसे, फ्रूट चाट से दस्तरख्वान सजने लगे। शाम को असर की नमाज पढ़ी गयी। इसके बाद इफ्तारी मुकम्मल हो जाने पर मस्जिदों व पास-पड़ोस के घरों में भेजवाई गयी। इफ्तार का इंतजार शुरू हुआ। सभी के हाथ दुआ में उठे। किताबों में आया है कि इफ्तार के वक्त की दुआ अल्लाह जरूर कुबूल करता है। मस्जिद का डंका जैसे ही बजा। सब ने अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए रोजा खोला। रोजा खोलने के बाद मस्जिदों का रुख किया। मगरिब की नमाज अदा की। फिर थोड़ा चाय नाश्ता किया। इसके बाद एशा, तरावीह और वित्र की नमाज अदा की गयी। पहला रोजा लोगों ने रजा-ए-इलाही में बिताया। अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगी और अपनी दिली मुरादों को मांगा।

बरेलवी मसलक के लोग आज से रखेंगे पहला रोजा

गोरखपुर। अहले सुन्नत वल जमात (सुन्नी बरेलवी) के उलेमा को बुधवार की देर रात तक देश के किसी भी हिस्से से रमजान के चांद देखे जाने का शरई सबूत हासिल नहीं हुआ। देर रात दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद पर तंजीम उलेमा-ए-अहले सुन्नत से जुड़े उलेमा की मीटिंग हुई और शुक्रवार को पहला रोजा रखने का फैसला किया गया। लिहाजा सुन्नी बरेलवी मसलक के मानने वाले शुक्र्रवार को पहला रोजा रखेंगे। अहले सुन्नत वल जमात की मस्जिदों में तरावीह की नमाज गुरुवार रात से शुरू हुई। जिसमें जमकर भीड़ उमड़ी। दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद नार्मल पर हुई तरावीह की नमाज में नमाजियों की लंबी कतारें नजर आयीं। यहां दस दिन में एक कुरआन मुकम्मल होगी।

तरावीह की नमाज में उमड़े नमाजी

गोरखपुर। तरावीह की नमाज के दौरान दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद मस्जिद नार्मल, गाजी मस्जिद गाजी रौजा, मदीना मस्जिद रेती, गौसिया मस्जिद छोटे काजीपुर, शाही मस्जिद बसंतपुर सराय, रहमतनगर जामा मस्जिद, रसूलपुर जामा मस्जिद, हजरत कंकड़ शाह स्थित बेलाल मस्जिद, मकबरे वाली मस्जिद बनकटीचक, सौदागार मोहल्ले की जामा मस्जिद, खादिम हुसैन मस्जिद तिवारीपुर, मक्का मस्जिद मेवातीपुर, औलिया मस्जिद घोसीपुरवा, चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर, गाजी मकतब गाजी रौजा, सब्जपोश मस्जिद जाफरा बाजार, रजा मस्जिद जाफरा बाजार, नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर, नूरी जामा मस्जिद चक्सा हुसैन, मदरसा हुसैनिया दीवान बाजार, मस्जिद हरमैन रायगंज, बेलाल मस्जिद अलहदादपुर सहित शहर की छोटी-बड़ी तमाम मस्जिदों में गुरुवार को नमाजियों का रेला उमड़ पड़ा। देर रात तक तरावीह की नमाज अदा की गयी।

तहरीक दावत-ए-इस्लामी हिंद का सामूहिक एतिकाफ शुरू

गोरखपुर। तहरीक दावत-ए-इस्लामी हिंद के तत्वावधान में रसूलपुर जामा मस्जिद में एक माह का सामूहिक एतिकाफ गुरुवार शाम से शुरू हो गया। यहां 35-40 से अधिक लोग एतिकाफ में बैठ कर इबादत व इल्म हासिल कर रहे हैं। ईद का चांद निकलने के बाद यह लोग मस्जिद से बाहर निकलेंगे। तहरीक ने इनके खाने-पीने व तरबियत का पूरा इंतजाम निशुल्क किया है। इस एतिकाफ में अन्य जिलों के लोग भी शामिल है।

उलेमा दे रहे हैं सवालों के जवाब

गोरखपुर। तंजीम उलेमा-ए-अहले सुन्नत द्वारा जारी रमजान हेल्प लाइन नंबर पर रोजा, जकात, सदका-फित्रा व तरावीह की नमाज आदि से संबंधित फोन दिन भर आते रहे। उलेमा द्वारा शरीयत की रौशनी में जवाब दिया जा रहा है। मुफ्ती अलाउद्दीन मिस्बाही, मुफ्ती अख्तर हुसैन, मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी, मौलाना जहांगीर अहमद, मुफ्ती नूर मोहम्मद, मुफ्ती खुर्शीद अहमद, मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही आदि के पास तमाम मजहबी समस्याओं को लेकर फोन आ रहे हैं। वहीं तंजीम के जेरे निगरानी में शनिवार से शहर की सात मस्जिदों में रमजान का विशेष दर्स प्रोग्राम शुरू हो जाएगा जो पूरे माह चलेगा।

बाजार में रौनक, मोहल्ले में मेले जैसा नजारा

गोरखपुर। मुस्लिम बाहुल्य इलाकों रहमतनगर, खूनीपूर, इलाहीबाग, रसूलपुर, जाफराबाजार, गाजीरौजा, तिवारीपुर, अहमदनगर चक्सा हुसैन पिपरापुर, उर्दू बाजार खोखरटोला, शाहमारूफ, अस्करगंज, रसूलपुर, पुराना गोरखपुर, जाहिदाबाद, घोसीपुरवा सहित तमाम मुहल्लों में मेले जैसे माहौल नजर आ रहा है। नखास, घंटाघर, रेती, शाहमारूफ वगैरह की फिजा देखते ही बन रही है। सेवंई व खजूर, सहरी-इफ्तारी की दुकानें सज चुकी हैं। तरावीह की नमाज के बाद उन पर भीड़ उमड़ रही है। रात भर चहल पहल रही।

रमजान की रातों में इबादत से गुनाह होंगे माफ : मौलाना गुलाम

अल्लाह ने कुरआन शरीफ में फरमाया ‘ऐ ईमान वालों तुम पर रोजे फर्ज किए गये जैसे कि पिछलों पर फर्ज हुए कि तुम्हें परहेजगारी मिले’। मुसलमान सिर्फ अल्लाह की रजा के लिए साल में एक महीना अपने खाने-पीने, सोने-जागने के वक्त मे तब्दीली करता है। पाक रमजान का महीना मुसलमानों के सब्र के इम्तिहान का खास महीना है। ईमान की वजह से और सवाब के लिए जो रमजान की रातों का कयाम (जाग कर इबादत) करेगा उसके अगले-पिछले गुनाह बख्श दिए जाते हैं। रमजान की सुबह-शाम जिक्र-ए-खुदा व जिक्र-ए-रसूल में गुजारें। दूसरों की मदद करें। नेक बनें और दूसरों को नेक बनने के लिए प्रेरित करें।
इमाम मौलाना गुलाम दस्तगीर निजामी, मकबरे वाली मस्जिद बनकटीचक

रोजा रखने से बंदा अल्लाह का करीबी बन जाता है - मौलाना नूरुज्जमा

रोजेदार के लिए इस माह का हर लम्हा नेकियोें का है। माह रमजान शरीफ को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहला हिस्सा रहमत, दूसरा मगफिरत और आखिरी हिस्सा जहन्नम से आजादी का। अंतिम हिस्से की बड़ी महत्ता है। इसके आखिरी हिस्से में शब-ए-कद्र जैसी अजीम नेमत है। आखिरी दस दिनों में एतिकाफ भी किया जाता है। जो सुन्नत है। जकात, सदका व फित्रा जल्द से जल्द निकाल कर जरूरतमंदों तक पहुंचा दें ताकि वह भी रमजान व ईद की खुशियों में शामिल हो सकें।
मौलाना मो. नूरुज्जमा मिस्बाही, प्रधानाचार्य, मदरसा जियाउल उलूम पुराना गोरखनाथ

रोजे से गफलत दूर होती है - कारी शाबान

इस्लाम मजहब के पाक माह रमजान की शुरुआत चांद के दीदार के साथ होती है। रमजान शरीफ का महीना मजहब-ए-इस्लाम में खास अहमियत रखता है। इस माह में मजहब-ए-इस्लाम को मानने वाले लोग पूरा महीना रोजा रखते हैं। अल्लाह की इबादत करते हैं। रोजे से गफलत दूर होती है इसलिए बंदा अल्लाह का करीबी हो जाता है। हदीस शरीफ में है कि रमजान और कुरआन रोजेदार की शफाअत करेंगे। उन्होंने बताया कि अल्लाह तआला ने फरमाया कि बंदा रोजा मेरे लिए रखता है और उसकी जजा मैं दूंगा। बंदा अपनी ख्वाहिश और खाने को मेरी वजह से तर्क करता है। रोजादार के लिए दो खुशियां है एक इफ्तार के वक्त और एक अल्लाह से मिलने के वक्त। रोजा रखने से बंदा अल्लाह का करीबी बन जाता है। सहरी करना नबी की सुन्नत है लिहाजा सहरी जरूर करें।
इमाम कारी शाबान बरकाती, मस्जिदे मदद अली (एक मीनारा) बेनीगंज

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