जेल में महिला बंदियों के बच्चों के लिए बनेगा क्रेच

Gonda Updated Sat, 22 Mar 2014 05:30 AM IST
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गोंडा। जिला कारागार में निरुद्ध सजायाफ्ता और विचाराधीन महिला बंदियों और उनके साथ बैरकों में रहने वाले बच्चों के लिए अच्छी खबर है। महिला बंदी और उनके बच्चों के लिए क्रेच (चाइल्ड केयर), अस्पताल व पाठशाला बनाने की तैयारी है। क्रेच बनाने के लिए दो लाख 37 हजार रुपये आवंटित हुए हैं, जिससे इसका काम शुरू करा दिया गया है। क्रेच बनने के बाद कामकाजी महिला बंदियों को काम के दौरान बच्चों की देखरेख करने की जरूरत नहीं होगी। चाइल्ड केयर में तैनात वार्डेन मां के आने तक बच्चों की देखभाल करने के साथ ही उन्हें खेलने व ककहरा पढ़ाने में मददगार होगी। क्रेच में बच्चे सेटेलाइट चैनलों पर दिखने वाले कार्टून मिकी-माउस, हीमैन व मिकी एंड डोनाल्ड से खेलेंगे। जेल प्रशासन ने महिला बंदियों की होने वाली परेशानियों को महसूस कर यह नया कदम उठाया है। इससे दहेज हत्या, प्रताड़ना समेत विभिन्न आरोपों में निरुद्ध विचाराधीन व सजायाफ्ता महिला बंदियों की दिक्कतें अब दूर हो जाएंगी। अभी तक एक ही जेल में महिला और पुरुष बंदियों को रखा जाता रहा है। हालांकि महिला बंदियों की बैरक अलग से बनाई गई है। इसमें मौजूदा समय में 40 महिलाएं बंद हैं। इनके साथ तीन बच्चे भी जेल के माहौल में ही रम गए हैं। इन बच्चों की उम्र शून्य से लेकर पांच वर्ष तक है। बच्चों के लिए अभी तक यहां की जेल में न पाठशाला की व्यवस्था थी और न ही इलाज के लिए अस्पताल।
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जिला कारागार की महिला बैरक को छोड़कर पुरुष बंदियों के लिए 13 बैरकें हैं। इनमें एक अस्पताल बैरक है, उसमें भी पुरुषों को ही रखा जाता है। जबकि नाबालिग बंदी राजकमान में बंद है। कारागार में पाठशाला की स्थापना होने से जहां महिलाओं को शिक्षा देने की व्यवस्था होगी, वहीं उनके बच्चे भी जेल में रहकर ककहरा सीखेंगे। अब उन्हें बदलते मौसम में बीमार होने पर उपचार भी मिल सकेगा। क्रेच में उनके खेलने के खिलौने मौजूद हाेंगे। महानिरीक्षक जेल जगमोहन यादव ने जेल प्रशासन से प्रस्ताव मांगा है। इसके लिए जेल के कर्मचारी खाका तैयार करने में जुटे हैं।


इनसेट
बच्चों के लिए बनेगा अस्पताल व पाठशाला
जिला कारागार में निरुद्ध विचाराधीन व सजायाफ्ता महिला बंदियाें के बच्चों के लिए क्रेच (चाइल्ड केयर) बनने के बाद दूसरे चरण में अस्पताल व पाठशाला बनाई जाएगी। इसके लिए जिला कारागार के जेलर ने महानिरीक्षक जेल जगमोहन यादव को प्रस्ताव भेजा है। जेलर के मुताबिक आईजी जेल ने अस्पताल व पाठशाला के लिए इस्टीमेट मांगा है। जेलर ने बताया कि समाज कल्याण निर्माण निगम के अधिशासी अभियंता एसके अग्रवाल से इस्टीमेट मांगा गया है। यह मिलते ही उसे आईजी जेल को भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद धन अवमुक्त होगा। इसके बाद निर्माण शुरू कराया जाएगा।

इनसेट
ये होगी क्रेच में व्यवस्था
जिला कारागार में बनाए जाने वाले क्रेच (चाइल्ड केयर) में महिला बंदियों के बच्चों के लिए कुर्सी, मेज, स्टूल, बैट-बाल, खिलौने व किताबें, स्लेट, चाक, कपड़ों समेत उनकी जरूरत की सभी चीजें मौजूद होंगी। क्रेच में मां से काफी समय तक दूर रहने के कारण उन्हें मां की जरूरत न महसूस हो। इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा। जब तक बच्चों की मां उनके पास न आ जाएं, तब तक के लिए देखरेख के लिए लगाई गई महिला उनका ध्यान खेल में लगाएगी। क्रेच में बच्चों के लिए मिकी-माउस, हीमैन, मिकी एंड डोनाल्ड जैसे सेटेलाइट चैनलों पर दिखने वाले कार्टून मौजूद हाेंगे, जिनसे वह अपना मन बहला सेकेंगे।

इनसेट
क्रेच के लिए दो लाख 37 हजार रुपये अवमुक्त हुए हैं। क्रेच बनाने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था समाज कल्याण निगम को दी गई है। संस्था ने काम भी शुरू करा दिया है। इसके अलावा अस्पताल व पाठशाला के लिए आईजी जेल को प्रस्ताव भेजा गया है। वहां से इस्टीमेट मांगा गया है। इस्टीमेट बनाने का काम समाज कल्याण निगम को दिया गया है। इस्टीमेट मिलते ही यहां मुख्यालय से एक टीम सर्वे के लिए आएगी। उसके आकलन के बाद बजट स्वीकृत होगा और कार्य शुरू किया जायेगा।
- विन्ध्याचल सिंह यादव, वरिष्ठ जेल अधीक्षक

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