शिक्षकों के जीपीएफ के `85 करोड़ का ब्योरा नहीं

Gonda Updated Fri, 25 Oct 2013 05:39 AM IST
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गोंडा। परिषदीय स्कूलों में तैनात शिक्षकों के वेतन से कटौती कर सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) खाते में जमा हुए करीब 85 करोड़ रुपये का ब्योरा ही लेखा कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सेवानिवृत्त के समय कुछ शिक्षकों को या तो भविष्य निधि का भुगतान नहीं होता या फिर किसी को कम
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तो किसी को ज्यादा भुगतान कर दिया जाता है। माना जा रहा है कि शिक्षकों के भविष्य निधि में करोड़ों रुपये की अनियमितता
बरती जा रही है।
प्राथमिक और उच्च प्राथमिक परिषदीय विद्यालयों में करीब 3,600 शिक्षक तैनात हैं। इनमें से करीब 1,300 अध्यापकों की तैनाती वर्ष 2004 के बाद हुई है। बता दें कि वर्ष 2004 के बाद तैनात हुए शिक्षकाें को पुरानी पेंशन व्यवस्था का लाभ नहीं मिलेगा, अर्थात् उनके वेतन से जीपीएफ सहित अन्य धनराशि की कटौती नहीं होती है। 2004 के पहले के नियुक्त करीब 2,300 अध्यापकों के वेतन से कटौती कर उनके सामान्य भविष्य निधि खाते में धन जमा किया जाता है। अध्यापकों के मूल वेतन का 10 प्रतिशत धन जीपीएफ में जमा होता है। प्रत्येक अध्यापक के मूल वेतन से प्रतिमाह औसतन 2000 रुपये की कटौती कर जीपीएफ में जमा किए जाते हैं। इस तरह करीब 2300 अध्यापकों का प्रतिवर्ष साढ़े पांच करोड़ रुपये उनके जीपीएफ खाते में जमा होता है। बताया जाता है कि वर्ष 1995-96 के बाद से अध्यापकों को लेखा पर्ची नहीं दी गई। साथ ही 17 वर्षों में शिक्षकों के भविष्य निधि खाते में जमा किए गए 85 करोड़ रुपये का हिसाब-किताब भी लेखा कार्यालय में मौजूद नहीं है।
इस कारण अध्यापकों को यही नहीं पता है कि उनके भविष्य निधि खाते में कितना धन है और उनके वेतन से कितनी कटौती की जा रही है। वर्ष 2000 में शिक्षकों के आंदोलन के बाद लेखा पर्ची बनने की कार्रवाई तो शुरू हुई, लेकिन कुछ अध्यापकों की जो लेखा पर्ची बनी वह त्रुटिपूर्ण रही। इससे फिर लेखा पर्ची तैयार करने की कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी गई। यही कारण है कि सेवानिवृत्त होने वाले कुछ शिक्षकों को या तो भविष्य निधि का भुगतान नहीं होता या फिर किसी को कम तो किसी को ज्यादा भुगतान कर दिया जाता है।
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