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डिलीवरी पॉइंट के लिए होने वाला इंटरव्यू टला

Gonda Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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गोंडा। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में संविदा के आधार पर चिकित्सकों की सूची जारी होने के बाद हुए विवाद के बीच शुक्रवार को डिलीवरी पॉइंट के लिए एएनएम, स्टाफ नर्स, एलएमओ व स्त्री रोग विशेषज्ञ के लिए होने वाली साक्षात्कार प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया है। वहीं पर विवाद की जांच कर रहे दो सदस्यीय जांच दल ने मामले की पड़ताल शुरू कर दी है। इधर समाजवादी पार्टी ने नियुक्ति में अनियमितता का आरोप लगाते हुए जांच की मांग तेज कर दी है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में संविदा के आधार पर चिकित्सकों की सूची जारी होने के बाद सीएमओ डा. एसपी सिंह को आधी रात उनके घर से उठाने की घटना से अधिकारी दहशत में है। इसी बीच शुक्रवार को एनआरएचएम के तहत संविदा के आधार पर डिलेवरी पॉइंट के लिए एएनएम, स्टाफ नर्स, एलएमओ, स्त्री रोग विशेषज्ञ के पदों के लिए साक्षात्कार होना था जिसे गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग ने अपरिहार्य कारणों से स्थगित कर दिया है। साक्षात्कार की सूचना बाद में देने की बात कही गयी है। इसके पीछे के कारणों के बारे में कोई भी स्वास्थ्य अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। वैसे मामले की जांच के लिए गठित संयुक्त निदेशकों के दल ने जांच शुरू कर दी है। कर्मचारियों को बयान के लिए लेटर जारी किया गया है। अधिवक्ता राम बुझारथ द्विवेदी, विजय कुमार सिंह, राजेश कुमार यादव, राम बालक तिवारी सहित अधिवक्ताओ के एक गुट ने जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष को एक पत्र भेजकर सीएमओ के अपहरण के घटनाक्रम की जांच के लिए प्रस्ताव पारित करने की मांग की है। इसके अलावा अधिवक्ता गनेश कुमार श्रीवास्तव, मनोज कुमार गुप्ता सहित अन्य ने आयुष चिकित्सकों की नियुक्ति में भ्रष्टावार का आरोप लगाते हुए बार एसोसिएशन के अध्यक्ष से इस मामले में कार्रवाई की मांग की है। इधर आवास विकास कॉलोनी में जागो आन्दोलन की बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता आन्दोलन के संयोजक व समाजवादी पार्टी के जिला सचिव विनोद कुमार श्रीवास्तव ने की। बैठक में नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए नियुक्त किये गये चिकित्सकों की योग्यता की जांच कराने की मांग की गयी है।
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तीसरे दिन भी हाकिम के बिना रहा जिला
गोंडा। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में संविदा चिकित्सकों की भर्ती को लेकर सीएमओ को आधी रात उठाने की घटना के बाद गुरुवार को तीसरे दिन भी सरकारी दफ्तरों पर सन्नाटा पसरा रहा। सभी की निगाहें जिले के जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी व मुख्य चिकित्साधिकारी को खोजती रहीं। न तो जिले में डीएम पहुंचे, न ही सीडीओ। यही नहीं गुरुवार को आकर निर्णय लेने की बात कहने वाले सीएमओ भी नहीं पहुंचे। अधिकारियों से मिलने के लिए आए लोगों की समस्याएं अन्य अधिकारी सुन जरूर रहे थे, लेकिन वह किसी भी समस्या का निराकरण करने के बजाय सिर्फ नियमानुसार कार्रवाई होने की बात फरियादियों को बता रहे थे। सीएमओ के साथ सोमवार की रात घटी घटना के बाद से दोनों बड़े अधिकारियों के जिला मुख्यालय पर न पहुंचने से अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों में दहशत साफ दिखाई पड़ रही है, फिर भी कोई अधिकारी मुंह खोलने को तैयार नहीं है। नाम न छापने की की शर्त पर कई अधिकारियों ने कहा कि जब बड़े अधिकारी झेल नहीं सकते तो उन जैसे छोेटे अधिकारियों की क्या बिसात, वैसे भी यहां अब कौन रहना ही चाहता है। इन चर्चाओं को उस समय और बल मिला, जब घटना के बाद से ही डीएम अभय, सीडीओ अरविन्द कुमार सिंह व मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एसपी सिंह गुरुवार को शाम 6 बजे समाचार भेजे जाने तक जिला मुख्यालय नहीं पहुंचे। वह कहां है, उनका चार्ज किसके पास है, किसी को कुछ भी नहीं मालूम है। गुरुवार को कलक्ट्रेट स्थित डीएम कार्यालय पर सन्नाटा पसरा हुआ था, यहां पर अतिरिक्त उपजिलाधिकारी अयोध्या प्रसाद जनता की समस्याएं सुन रहे थे, लेकिन समस्याएं कब निपटेंगी, इसको लेकर जनसामान्य का ऊहापोह खत्म नहीं हो रहा था। विकास भवन में तो अजीब हाल था, यहां पर अजीब सी खामोशी थी। विकास भवन स्थित कई विभागों के ज्यादातर अधिकारियों का कहना है कि अब इस जनपद में नौकरी कर पाना कठिन हो गया है। अधिकारियों में दहशत इस कदर घर कर गई है कि कोई भी अधिकारी कुछ बोल पाने की स्थिति में नहीं हैं। कई अधिकारियों ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए कहा कि जब बड़े अधिकारी जनपद से बाहर हैं और कुछ भी नहीं बोल रहे हैं तो फिर उनकी क्या हैसियत है। रही बात यहां रहने या न रहने की तो अब शायद ही कोई अधिकारी खुद यहां रहने के लिए इच्छुक होगा। सीएमओ कार्यालय पर भी वैसे तो सन्नाटा था, ज्यादातर कर्मचारी आये हुए थे। चार अपर मुख्य चिकित्साधिकारी भी सीएमओ कार्यालय में थे लेकिन सभी के चेहरे पर दहशत का आलम था। यहां तक कि चपरासी हो या बाबू हर किसी की जुबान बंद थी।

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