छात्राओं का इलाज भगवान भरोसे

Gonda Updated Sat, 29 Sep 2012 12:00 PM IST
बलरामपुर। जिले में संचालित 11 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में छात्राओं को कोई स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल रही है। विद्यालय प्रशासन छात्राओं के बीमार होने पर उन्हें अभिभावकों के हवाले कर देता है। यह हकीकत बेसिक शिक्षा अधिकारी के निरीक्षण के दौरान सामने आई है। तीन स्कूलों में 38 बीमार छात्राओं को घर भेज दिया गया है। कमोवेश यही स्थिति हर कस्तूरबा विद्यालय की है। स्कूलों में छात्राओं के रहन-सहन की व्यवस्था भी काफी निम्न स्तर की है। छात्राएं फर्श पर सोकर रात गुजारती हैं। विद्यालयों का संचालन करने वाली संस्थाएं मूकदर्शक बनी हुई हैं। बीते दिन ‘अमर उजाला’ ने कुछ कस्तूरबा विद्यालयों की पड़ताल की तो वहां पर कई तरह की खामियां नजर आईं। ब्लॉक बलरामपुर में कस्तूरबा विद्यालय चार साल से किराये के भवन में चल रहा है। बरसात के समय भवन में पानी भर जाता है। वार्डेन सुधा मिश्रा ने साफ सफाई आदि का दावा तो किया, लेकिन स्कूल की हकीकत विपरीत थी। छात्राएं कुछ भी बोलने को तैयार नहीं थी। भवन के ऊपर से हाईटेंशन बिजली का तार गुजर रहा है।
कस्तूरबा विद्यालय बलरामपुर नगर अपने भवन में संचालित है। स्कूल में 92 छात्राओं को सोने के लिए मात्र 38 चौकियां हैं। विगत दिनों कई छात्राएं उल्टी, दस्त, जुकाम, बुखार से पीड़ित हुईं, लेकिन इलाज के बाद स्वस्थ हो गईं। कस्तूरबा विद्यालय श्रीदत्तगंज में समस्याओं का अंबार मिला। स्कूल में बिजली की व्यवस्था नहीं है। छत टपक रही है और शौचालय क्षतिग्रस्त। जलापूर्ति के लिए लगा पंप खराब है। रसोईए का पद खाली है। छात्राएं खुद खाना पकाती हैं तथा सफाई करती हैं। छात्राओं को बीमार होने पर उन्हें इलाज के लिए 15 किलोमीटर जिला मुख्यालय ले आने में काफी दिक्कतें होती हैं।
बलरामपुर देहात, नगर व श्रीदत्तगंज में इन विद्यालयों का संचालन स्वयं सेवी संस्था महिला सामाख्या कर रही है। संस्था की जिला समन्वयक कनक प्रभा ने बताया कि प्रशासनिक स्तर पर बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के कारण विद्यालयों में छात्राओं की नियमित जांच नहीं हो पाती है। बीमार होने पर इनका इलाज कराया जाता है।
उतरौला, गैड़ास बुजुर्ग, गैसड़ी, रेहरा बाजार तथा शिवपुरा में संचालित कस्तूरबा स्कूलों में भी तमाम खामियां नजर आईं। विद्यालय में जगह-जगह जलभराव व गंदगी के कारण काफी परेशानी हो रही है। वहीं, विगत 22 सितंबर को बीएसए एसएन चौरसिया ने कस्तूरबा विद्यालय पचपेड़वा जंगल पचपेड़वा तथा तुलसीपुर का आकस्मिक निरीक्षण किया तो पता चला कि पचपेड़वा जंगल में 18 छात्राएं बीमार होने के बाद घर भेज दी गईं। इसी तरह पचपेड़वा में 17 तथा तुलसीपुर में तीन छात्राएं बीमार होने के बाद घर भेज दी गई थीं। स्कूलों में गंदगी व अन्य तरह की कमियां भी पाई गई। बीएसए ने संबंधित विद्यालयों के संचालक तथा वार्डेंन को कमियां दूर करने का निर्देश दिया है।

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