धनावंटन के अभाव में लटकीं 65 परियोजनाएं

Gonda Updated Tue, 18 Sep 2012 12:00 PM IST
गोंडा। जिले में अलग-अलग विभागों की करीब 65 परियोजनाएं कई वर्षों से अधर में लटकी हैं। इनमें से कुछ योजनाएं तो ऐसी हैं, जिन्हें समय से पैसा नहीं मिला तो कुछ ऐसी हैं जिनकी लागत पैसा मिलने के बाद निर्माण में प्रयुक्त सामग्रियों के रेट में हुए इजाफे से बढ़ गई। ऐसे में गलती शासनस्तर पर आवंटित होने वाले बजट की ठीक तरह से पैरवी न होने के कारण हुई या फिर निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्थाओं की वजह से। इसका तो पता नहीं, लेकिन परियोजनाओं के समय से पूरा न होने के कारण शासन पर इसकी वित्तीय देनदारी का बोझ बढ़ा है।
वर्तमान में जिले में सेतु निगम की दो परियोजनाओं गोंडा-उतरौला रोड पर बिसुही नदी के ऊपर एक पुल व तरबगंज-डुमरियाडीह-मोतीगंज मार्ग पर टेढ़ी नदी पर बनने वाले एक पुल का काम अधूरा पड़ा है। परियोजना प्रबंधक भूपेंद्र सिंह की मानें तो इसके काम में कुछ लेटलतीफी धन न मिलने से व कुछ वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र न देने के कारण हुई। फिलहाल जैसे ही इसकी धनराशि उन्हें शासन से आवंटित हुई, तत्काल इसका काम चालू करा दिया गया। तरबगंज-डुमरियाडीह-मोतीगंज मार्ग पर बनने वाले पुल की लागत पहले से बजट न मिलने के कारण करीब 54.47 लाख बढ़ी है। पहले इस पुल की लागत 123.47 लाख थी, लेकिन अब इसका रिवाइज्ड इस्टीमेट 177.94 लाख भेजा गया है।
वहीं सीएंडडीएस जलनिगम विभाग की तरफ से कलेक्ट्रेट भवन का जो जीर्णोद्धार 2007 में भेजे गए इसके इस्टीमेट के तहत 200.52 लाख रुपये से होना था। पहले के इस्टीमेट का पूरा पैसा विभाग को अवमुक्त हो गया है, जबकि काम अभी भी अधूरा है। परियोजना प्रबंधक सीएंडडीएस कंपनी ने इसके लिए शासन को पत्र भेजकर 133.56 लाख रुपये की डिमांड की है। वहीं इसी विभाग की तरफ से बनाए जाने वाले लेखपाल प्रशिक्षण भवन की लागत में भी चार वर्षों के भीतर दोगुने से ज्यादा का इजाफा हो गया है। 2008 में प्रस्तावित लेखपाल प्रशिक्षण भवन के लिए इस विभाग ने 353.97 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा था, जिसके सापेक्ष उसे पूरा पैसा मिल गया है। लेकिन 50 फीसदी काम अभी भी अधूरा है। अब परियोजना प्रबंधक की तरफ से शासन को 406.79 लाख रुपये की और मांग की गई है।
जबकि यही हाल जिला योजना, नाबार्ड, त्वरित आर्थिक विकास योजना, पूर्वांचल विकास निधि योजना, उप्र समाज कल्याण निर्माण निगम व उप्र विद्यायन एवं निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड (पैकफेड) का भी है।
बोले अधिकारी
मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि विभागवार रुकी हुई परियोजनाओं की जानकारी की जा रही है। इसके लिए शासन से धनराशि की मांग की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी विभागों को लंबित परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने का भी निर्देश दिया गया है।

जिले में लटकी 25 लाख से अधिक की निर्माणाधीन परियोजनाएं-एक नजर में-

विभाग निर्माणाधीन परियोजना की अब तक मिली कार्य की
का नाम परियोजना कुल लागत धनराशि प्रगति
सेतु निगम 02 218.60 लाख 167.77 लाख 70 फीसदी
सीएंडडीएस 02 554.49 लाख 554.49 लाख 70 फीसदी
जलनिगम
पीडब्ल्यूडी 52 2828.32 लाख 1462.87 लाख 50 फीसदी
उप्र समाज कल्याण 01 556.03 लाख 177.00 लाख 40 फीसदी
निर्माण निगम
पैकफेड 08 1242.24 लाख 587.31 लाख 45 फीसदी
कुल योग 65 5399.68 लाख 2949.44 लाख ----

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