बहू के हत्यारे मां-बेटे को उम्रकैद

Gonda Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
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गोंडा। 12 वर्ष पूर्व दहेज के लिए विवाहिता की जलाकर हत्या करने के आरोपी पति व सास को अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ शिव कुमार ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जबकि एक आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया है। बस्ती जनपद के परशुरामपुर थाना क्षेत्र के लालपुर गांव निवासी चंद्रभान सिंह ने दो जून 1999 को गोंडा के पुलिस अधीक्षक को तहरीर दी थी। एसपी के आदेश पर थाना छपिया में निर्मला देवी पत्नी स्व. सुरेन्द्र बहादुर सिंह, राना शिवेंद्र प्रताप सिंह पुत्र सुरेंद्र बहादुर सिंह व विजय कुमार सिंह पुत्र गिरधर सिंह निवासी कठोवा छपिया के खिलाफ दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि चंद्रभान सिंह ने अपनी पुत्री पुष्पा का विवाह मई 1994 में राना शिवेंद्र प्रताप सिंह के साथ किया था। कुछ दिन तक ससुराल में रहने के बाद कम दहेज देने के कारण पति राना शिवेंद्र प्रताप सिंह, सास निर्मला, ननद वसुंधरा उर्फ मीनू व अंजली उर्फ जंगू उसे मारते-पीटते थे। जिस पर पुलिस अधीक्षक से शिकायत दर्ज कराई तो समझौता हो गया और राना शिवेंद्र प्रताप सिंह पत्नी को विदा कराकर घर ले गया। लेकिन 50 बीघा खेत न देेने पर पुष्पा को एक जून की रात दो बजे मिट्टी का तेल छिड़ककर जला दिया। दो जून की सुबह पांच बजे कठोवा गांव के विजय बहादुर व इंद्रदेव सिंह से सूचना मिली कि पुष्पा आग से जल गई है। उसे मसकनवा के पीएचसी में भर्ती कराया है। जब वह छोटी बेटी किरन के साथ अस्पताल पहुंचा तो पुष्पा ने बताया कि ससुराल वालों ने दहेज में खेत न मिलने के कारण उसे जला दिया है। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। विवेचना के दौरान पुलिस ने मीनू व जंगू पर आरोप नहीं पाया, लेकिन गवाहों के बयान पर न्यायालय ने विचारण के लिए दोनों को तलब किया। दोनों के किशोर होने के कारण उनकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई। सत्र परीक्षण के दौरान ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी राजेंद्र सिंह व सहायक शासकीय अधिवक्ता विनय कुमार सिंह ने गवाहों को पेश कराया। अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ ने अभियुक्त राना शिवेंद्र प्रताप सिंह व निर्मला देवी को पुष्पा देवी की हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद एवं विजय कुमार सिंह को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। तीनों अभियुक्तों को धारा 498ए के आरोप में भी दो-दो वर्ष के कठोर कारावास एवं 10-10 हजार के अर्थदंड से दंडित किया। जुर्माना अदा न करने पर तीन-तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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