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रक्तदान महादान, फिर भी लगान

Gonda Updated Thu, 14 Jun 2012 12:00 PM IST
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गोंडा। भले ही लोग महादान व परोपकार से जोड़कर रक्तदान शिविरों में बढ़-चढ़कर प्रतिभाग करते हों, लेकिन सच्चाई इससे इतर है। दान के रूप में किये गए रक्तदान पर भी मरीजों को आवश्यकता के समय रक्तदाता व सर्विस चार्ज जमा करने पर ही रक्त मिल पा रहा है। सरकारी चिकित्सालयों के मरीज तो जिला अस्पताल में स्थित ब्लड बैंक से 400 रुपये देकर गिव एंड टेक के आधार पर ब्लड लेते हैं, लेकिन नर्सिंगहोम के संचालक महंगे दाम पर मरीजों को फैजाबाद व लखनऊ से खून की व्यवस्था कराते हैं।
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समय से खून न मिलने के कारण मरीजों को हो रही दिक्कते कम करने के लिए जिले के डिक्सिर क्षेत्र से विधानसभा पहुंचे तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री रमापति शास्त्री ने पहल की थी। जिस पर वर्ष 1998 में जिला चिकित्सालय में ब्लड बैंक की स्थापना की गई थी। जिसका मकसद मरीजों को खून उपलब्ध कराना था। जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में इस समय 44 यूनिट ब्लड की उपलब्धता का दावा किया जा रहा है। यहां पर ब्लड कम्पोनेंट यूनिट भी स्थापित है। जो खून की पड़ताल करने के बाद उसके अवयव को अलग-अलग करता है। जिसके आधार पर उसे अलग-अलग तरीके से मरीजों को उपलब्ध कराया जाता है। मगर यहां किसी भी मरीज को खून तभी मिलेगा, जब वह कोई डोनर उपलब्ध कराएगा। इसके बाद उसे 400 रुपये देने हाेंगे। इससे इतर शहर में ही 22 नर्सिंगहोम स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में दर्ज हैं। जहां पर रोजाना करीब 100 मरीजों के ऑपरेशन होते हैं। हार्निया जैसे छोटे ऑपरेशन को छोड़कर सभी मेजर ऑपरेशन वाले मरीजों को खून चढ़ाया जाता है। ऐसे में नर्सिंगहोम संचालक मरीज के तीमारदार से पूरी चिकित्सा व्यवस्था की एकमुश्त रकम जमा करा लेते हैं तथा अपने स्तर से फैजाबाद या लखनऊ से खून की व्यवस्था कराते हैं। जिस खून की कीमत जिला चिकित्सालय में डोनर मिलने पर सिर्फ 400 रुपये प्रति यूनिट है, वही नर्सिंगहोम संचालक अन्य शहरों से 1800 से 2000 रुपये तक खर्च कर खून की व्यवस्था कराते हैं। एक चिकित्सक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आमतौर पर नर्सिंगहोम में जो मरीज आते हैं, ऑपरेशन के वक्त जब खून की व्यवस्था करने को कहा जाता है, तो उनका यही जवाब होता है कि साहब आप ही मंगवा लीजिये, हम रुपये दे देंगे। ऐसे में बाहर से खून मंगाना हमारी विवशता है। इससे मरीजों का शोषण तो हो रहा है, मगर मरता क्या न करता के भंवर में फंसे होने के कारण कोई भी मुंह खोलने को तैयार नहीं है।

फैजाबाद तक जाता है ब्लड
गोंडा। ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. के एम सिंह का कहना है कि यहां से पूरे मंडल के साथ ही फैजाबाद तक लोग ब्लड ले जाते हैं। मांग के अनुरूप मरीजों को ब्लड उपलब्ध कराया जाता है। आमतौर पर नर्सिंगहोम के जो भी मरीज डिमांड लेकर आते हैं, उन्हें मांग के अनुरूप सम्बन्धित ब्लड ग्रुप का मिलान करके खून दिया जाता है।



पर्याप्त मात्रा में है खून
गोंडा। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. ए पी मिश्र का कहना है कि जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में पर्याप्त मात्रा में खून की व्यवस्था है, जिस भी मरीज को जरूरत होती है, उसे मुहैया कराया जाता है।

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