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यही बने रहे हालात तो मयस्सर नहीं होगी रोटी, आम लोगों की थाली में ज्यादा दिखेगा भात

Ghazipur Updated Wed, 13 Feb 2013 05:30 AM IST
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नागेंद्र पंकज
गाजीपुर। मुनाफाखोरों का खेल हो या फिर गेहूं की पैदावार की कमी कह लें लेकिन आटे का भाव इसी तरह आसमान छूता रहा तो आने वाले दिनों में रोटी का स्वाद लोगों के लिए कड़वा जरूर हो जाएगा। समय रहते ही इसपर ध्यान नहीं दिया गया तो ऐसे हालात बन जाएंगे कि लोगों को रोटी के बजाए भात खाना पड़ेगा।
आम आदमी से दूर होती रोटी की महंगाई का आलम यह है कि एक वर्ष के अंतराल में गेहूं के आटे की कीमत में 4 से 5 रुपए प्रतिकिलो की वृद्धि हो गई है। फरवरी 2012 में गेहूं का थोक मूल्य 1100 से 1150 रुपए प्रति कुंतल था तो आटा थोक में 1300 से 1350 रुपए प्रति कुंतल था। इस वर्ष गेहूं का मूल्य 1475 रुपए से 1525 रुपए प्रतिकुंतल है। ऐसे में आटा 1750 से 1800 रुपये प्रति कुंतल की रेट से बिक रहा है। कीमतों में लगातार हो रहे उछाल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस जनवरी से गेहूं 1375 रुपए से 1425 रुपए प्रति कुंतल से उछल कर फरवरी में 1475 से 1525 रुपए प्रतिकुंतल पहुंच गया है। वहीं फुटकर में आटा 20 रुपये प्रतिकिलो बिक रहा हैं। गेहूं के अन्य उत्पाद सूजी 16 से 20 तथा मैदा 17 से 20 रुपये प्रतिकिलो हो गया है। बाजार में इस समय मोटा चावल 12 से 14 रुपये प्रतिकिलो है। ऐसे में जाहिर है कि गेहूं और आटे का भाव आने वाले दिनों में और चढ़ा तो मध्य वर्ग के लिए रोटी के बजाए भात खाना सस्ता पड़ेगा।

दो माह से गेहूं नहीं मिलने से भटक रहे एपीएल कार्डधारकों के समक्ष अभी से ही मुसीबत पैदा हो गई है। छावनी लाइन क्षेत्र के मंगलमड़ई और सरैया की एपीएल कार्डधारक पूनम, निर्मल देवी, पुष्पा, मालती, सहदेई आदि का कहना है कि गेहूं नहीं मिलने से चावल का ज्यादा प्रयोग करना मजबूरी बन गई है। आगे की चिंता सता रही है। गेहूं और आटा कारोबारियों की मानें तो बाहरी प्रांतों को लगातार गेहूं भेजे जाने से अपने यहां इसकी कमी बनी हुई है जिस वजह से गेहूं के उत्पादों की कीमत में लगातार वृद्धि हो रही है। बीते मार्च और अप्रैल में पूर्वांचल से गेहूं की रैक श्रीलंका और बांग्लादेश तक भेजी गई, वहीं अब गेहूं बिहार, बंगाल और गुजरात भेजी जा रही है।

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खाली पड़ा है एफसीआई का गोदाम
गाजीपुर में एफसीआई के दो गोदाम हैं। एक जंगीपुर और दूसरा बरेसर में। जंगीपुर गोदाम की क्षमता 11 हजार 942 मिट्रिक टन तथा बरेसर की 85 सौ मिट्रिक टन है। खरीद के दौरान दोनों गोदामों में इतना भंडारण भी हुआ था। इसके अलावा ढाई हजार मिट्रिक टन गेहूं आढ़तियों के यहां अभी भी बकाया है। दबाव बनाने के बावजूद आढ़ती गेहूं जमा नहीं कर रहे हैं। डीएम के दबाव पर नौ फरवरी को 45 मिट्रिक टन गेहूं जमानिया के एक आढ़ती के यहां से जंगीपुर गोदाम में आया। यही गेहूं गोदाम में डंप पड़ा हुआ है जबकि 17 नवंबर से गोदाम में एक भी छटांक गेहूं नहीं था। मौजूदा समय में गेहूं नहीं होने से गोदाम में ताला बंद है।
जुल्फिकार नयन अंसारी, गोदाम प्रबंधक एफसीआई जंगीपुर।


एपीएल का गेहूं नहीं मिलने सेे जिले के 1536 कोटेदारों का करीब साढ़े छह करोड़ रुपया फंसा हुआ है। पैसा जमा करने के बावजूद पिछले दो माह से कोटेदारों को गेहूं नहीं मिल रहा है। इसकी वजह वाकई में क्या है, विभागीय अधिकारी ही बता सकते हैं।
लक्ष्मी नारायण, अध्यक्ष उप्र सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद नगर क्षेत्र।


गेहूं की कमी और कीमत बढ़ने से आटा और उसके उत्पादों का भाव तेजी से बढ़ रहा । इससे खर्च अधिक बैठ रहा है। यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में रोटी, सूजी का हलवा, समोसा, नूडल्स आदि कादाम होटलों बढ़ाना मजबूरी हो जाएगा। होटल व्यवसायी, संजीव कृष्ण दत्ता उर्फ कालू गाजीपुर।


जरूरत हो तो प्रयोग करें


जिले में कोटे की दुकान-1536
एपीएल कार्डधारक हैं- साढ़े सात लाख।
प्रति किलो गेंहू का मूल्य-6 रुपये 60 पैसे।
जिले के लिए एक माह में 51 हजार कुंतल आता है एपीएल का गेंहू।

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