बेधड़क हो रहा मानवाधिकार का हनन

Ghazipur Updated Mon, 10 Dec 2012 05:30 AM IST
गाजीपुर। भले ही हर आदमी को मानवाधिकार का अधिकार मिला है लेकिन मौजूदा हाल में इसका माखौल उड़ाया जा रहा है। सबसे अधिक मामले पुलिस से संबंधित हैं, जिसके चलते पीड़ितों को जलालत झेलनी पड़ रही है। हां मानवाधिकार आयोग की चाबुक से कई मामलों में पुलिस की गर्दन फंसी हुई है तोे कई मामलों में संबंधित पुलिसकर्मियों को अपने किए का खामियाजा भी भुगतना पड़ा है। सोमवार को मानवाधिकार दिवस के मौके पर ऐसे कई मामलों का खुलासा किया जा रहा है, जिससे मानवाधिकार के प्रति पुलिस कितना गंभीर है, का पता चलेगा।
दरअसल हक, अधिकार और मान सम्मान के लिए हर आदमी को मानवाधिकार का अधिकार दिया गया है। फिर भी जहां समाज के अनपढ़ और निचले तबके के लोग इस बात से बेखबर हैं। वहीं मानवाधिकार के अधिकार से रूबरू पुलिस सब कुछ जानते हुए भी अपनी मनमानी करती रही है और कर भी रही है।
सभी थानों पर मानवाधिकार के नियमों का पालन करने के लिए लंबा-चौड़ा बोर्ड टंगवाया गया है। उसमें निहित निर्देशों को अक्षरश: अंकित भी किया गया है लेकिन वर्दी के रौब और मजबूरी के कारण पुलिस मानवाधिकार का हनन करने से बाज नहीं आती है। हर वर्ष 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस को गंभीरता के साथ मनाया जाता है और इसके बारे में आयोजनों के जरिए लोगों को जानकारी भी मुहैया कराई जाती है लेकिन आज भी जागरूकता का अभाव है।
नहीं दर्ज हुआ अपहरण का केस
10 दिसंबर 2011 को मानवाधिकार दिवस के दिन ही सदर कोतवाली क्षेत्र के अंधऊ निवासी लालसा कुशवाहा के नाबालिग पुत्र ओमजी कुशवाहा को पुलिस ने उठा लिया था। पीड़ित पिता ने पुलिस पर अपहरण का आरोप लगाते हुए पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई तो पुलिस ने पुत्र को बरामद दिखाकर घर पर छोड़ दिया। इस मामले में पीड़ित तब से आरोपी पुलिस कर्मियों पर मुकदमा दर्ज कराने के लिए ऐड़ियां घिस रहा हैं लेकिन पुलिस ने उसका मुकदमा तक दर्ज नहीं किया। अब यह मामला राष्ट्रीय बालक अधिकार संरक्षण आयोग में पहुंच चुका है।
गंगा में प्रवाहित करा दिया शव
17 नवंबर को दिलदारनगर के पत्रकार इंद्रासन यादव की मां कौशल्या देवी की हत्या कर दी गई। कोतवाली पुलिस ने शव को अज्ञात मानते हुए पोस्टमार्टम कराया और कुछ ही देर बाद शव को गंगा में प्रवाहित करा दिया जबकि अज्ञात शव को कम से कम से कम तीन दिन तक मरचरी में रखे जाने का प्रावधान है। शव को गंगा में प्रवाहित करा देनेे से पीड़ित परिवार शव का न तो अंतिम दर्शन कर सके और न ही अंतिम संस्कार। यह मामला मानवाधिकार हनन से जुड़ा होना पाया गया।
एक दिसंबर 2012 की रात को विकास भवन में रसोइयों और बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ हुई मारपीट के मामले में मुहम्मदाबाद की पूर्व ब्लाक प्रमुख चंदा यादव मुकदमा लिखवाने के लिए कोतवाली पहुंची थीं लेकिन पुलिस ने कोतवाली का गेट बंद कर लिया। ऐसे में करीब ढाई सौ से अधिक आंदोलनरत रसोइयां ठंड में जमीन पर ही बैठी रहीं। कोतवाली के बंद गेट पर घंटाें पूर्व ब्लाक प्रमुख को भी खड़े रहना पड़ा जबकि पीड़ित के लिए कोतवाली का गेट बंद किया जाना सीधे तौर पर मानवाधिकार का हनन था।
छह दिसंबर 2012 की देर शाम को सुहवल थाने के रेवतीपुर पुलिस चौकी के दो सिपाही रामनाथ सिंह और राजमिलन तिवारी द्वारा नौली गांव में टेंगरी यादव के पुत्र मुकेश यादव की गाना गाने पर बेरहमी से पिटाई की गई। वह भी घर में घुस कर। इस मामले में पीड़ित की ओर से आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सुहवल पुलिस को तहरीर दी गई लेकिन मुकदमा अभी तक दर्ज नहीं हुआ। मामले की जांच सीओ जमानिया को दी गई है।

Spotlight

Most Read

Jharkhand

चारा घोटाले में लालू की नई मुसीबत, चाईबासा कोषागार मामले में आज आएगा फैसला

चारा घोटाला मामले में रांची की स्पेशल सीबीआई कोर्ट बुधवार को सुनवाई करेगी। स्पेशल कोर्ट जज एस एस प्रसाद इस मामले में फैसला देंगे।

24 जनवरी 2018

Related Videos

कोहरे ने लगाया ऐसा ब्रेक, एक के बाद एक भिड़ीं कई गाड़ियां

वाराणसी-इलाहाबाद राजमार्ग पर गुरुवार को घने कोहरे के बीच दो एक सड़क हादसा हो गया। कोहरे की वजह से विजिबिलिटी कम होने पर एक के बाद एक चार गाड़ियां एक-दूसरे से टकरा गईं। इस हादसे में चार लोगों के घायल होने की भी खबर है।

21 दिसंबर 2017

आज का मुद्दा
View more polls
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper