माध्यमिक स्कूलों में धमकीं टीमें

Ghazipur Updated Tue, 06 Nov 2012 12:00 PM IST
गाजीपुर। नकल के लिए बदनाम विद्यालयों पर गाज गिर सकती है। जिलाधिकारी प्रभुएन सिंह ने सोमवार को एक साथ चार टीमें गठित कर दो दर्जन से अधिक माध्यमिक विद्यालयों की जांच कराई। डीएम की इस कार्रवाई से जहां स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया वहीं प्रशिक्षु पीसीएस अधिकारी के खुलासे से माध्यमिक शिक्षा में खलबली मचा दी। डीएम ने चार सौ से अधिक केें द्रों की जांच के संकेत दिए हैं।
शासन ने पूरे प्रदेश में केंद्र निर्धारण की नीति घोषित कर दी है। शासन ने जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि बदनाम केंद्रों को किसी भी सूरत में परीक्षा केंद्र न बनाया जाए। केंद्र निर्धारण की नीति घोषित होने के बाद सोमवार को जिलाधिकारी ने दो-दो अधिकारियों की चार टीमें घोषित की। इस टीम में शामिल अधिकारियों को डीएम ने निर्देश दिया कि 43 विद्यालयों की जांच कर शाम तक रिपोर्ट प्रेषित की जाए। इसके बाद डीएम ने चारों टीमों को सूची देकर रवाना कर दिया। इस टीम को करंडा, रेवतीपुर, भदौरा, जमानियां ब्लाकों में भेजा गया। भदौरा ब्लाक से जुड़े विद्यालयों पर जांच करने पहुंचे प्रशिक्षु पीसीएस अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा ने राजकीय बालिका इंटर कालेज गहमर का निरीक्षण किया। यहां पर पहुंचने टीम के अधिकारियों ने देखा कि विद्यालय में कोई शिक्षक मौजूद नहीं था। प्रधानाचार्य भी गायब थीं। इसको गंभीरता से लेते हुए जांच टीम ने सभी शिक्षकों से जिला विद्यालय निरीक्षक के माध्यम से स्पष्टीकरण मांगा है।
इसी क्रम में टीम बारा इंटर कालेज बारा पहुंची। इस विद्यालय में छात्रों की संख्या बहुत कम थी। पूछताछ करने पर जांच टीम को जानकारी हुई कि इस विद्यालय की अधिकांश छात्राएं बारा क्षेत्र के मदरसों में पढ़ती हैं और यूपी बोर्ड की परीक्षा सिर्फ इस विद्यालय से देती हैं। विद्यालय से जुड़े शिक्षकों ने जांच टीम को यह सब लिखकर दिया है। शिक्षकों ने स्वीकार किया कि इस विद्यालय से छात्राओं को छात्रवृत्ति भी दी जाती है। शिक्षकों ने बताया कि हम लोग यह सब छात्राआें की सुरक्षा को ध्यान में रखकर किए हैं। इसकी जानकारी देते हुए जांच टीम से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि बारा इंटर कालेज बारा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी मिली है। इसकी जानकारी कराई जाएगी। इसके साथ ही अन्य टीमों को भी जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। देर शाम तक जांच अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर डीएम को सौंपने में लगे हुए थे। उधर केंद्र निर्धारण में विद्यालयों की विधिवत जांच होने से सहायता प्राप्त के साथ ही वित्तविहीन स्कूलों में भी हड़कंप मचा हुआ है। संचालक अब राजनीतिक हस्तक्षेप भी नहीं कर पा रहे हैं। इस संबंध में डीएम प्रभुएन सिंह ने बताया कि जांच टीम विद्यालयों की जांच करने के लिए भेजी गई थी। जांच रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद कोई फैसला किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बदनाम एवं मानक पूरा करने में विफल रहने वाले स्कूलों को केंद्र नहीं बनाया जाएगा। यह जांच आगे भी जारी रहेगी।

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