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गुलजार होगी गुदरशाह की तकिया

Ghazipur Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
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गाजीपुर। जिले में खानपुर के निकट बेलहरी (बहेरी) गांव के पास दरगाह बाबा गूदर शाह तकिया निकटवर्ती गांवों ही नहीं, पूर्वांचल के लिए आस्था और श्रद्धा का केंद्र है। इसका इतिहास छह सौ साल से भी अधिक पुराना बताया जाता है। बाबा नूर अली शाह ने इसकी स्थापना की थी। वह पंजाब की तरफ से अकेले भ्रमण करते हुए आए और यहीं ठहरे थे। बेलहरी गांव के बाबा गूदर शाह कुछ दिन बाद इनके शिष्य हो गये। इनकी चौथी पुश्त में बाबा मस्तान शाह हुए जिन्होंने यह गद्दी संभाली और 1914 में परदा फरमाया।
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सूफियों के मजहबे इश्क की तमाम परम्पराओं का निर्वाह मस्तान शाह ने बखूबी किया। दरगाह पर साल में दो बार उर्स होता है। विशाल मेला लगता है। आने वाले श्रद्धालु इस दरगाह पर मन्नतें मानते है। मुरादें पूरी होने पर श्रद्धालु पुन: दरगाह पर आते है। जायरीन रामराज सिंह यादव (शिक्षक) ने बताया कि मौजूदा समय में बाबा नौरंगशाह यहां की गद्दी संभाल रहे हैं। 15 अक्तूबर को होने वाले उर्स में इसी गांव के निवासी सूफी संत हजरत बाबा मंजूर शाह आलम जी (हुजूर साहब) भी अपने अनेक राज्यों के मुरीदों के साथ आ रहे हैं। वह अब कानपुर में रहते हैं।

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