लाल निशान छूने को गंगा बेताब

Ghazipur Updated Tue, 18 Sep 2012 12:00 PM IST
गाजीपुर। जिले सहित अन्य स्थानों पर पिछले कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश से गंगा समेत अन्य नदियां उफन गई हैं। सोमवार को गंगा का जलस्तर 62.32 मीटर तक रिकार्ड किया गया। वह अब लाल निशान छूने को बेताब है। गोमती, मंगई, बेसो, कर्मनाशा आदि नदियों में भी जलस्तर इस कदर बढ़ रहा है कि तटवर्टी इलाकों मेें रह रहे लोगों की नींद उड़ गई हैं। सबकी निगाहें गंगा की लहरों पर टिकीं हैं। केंद्रीय जल आयोग गाजीपुर के अधिकारी भी मान रहे हैं कि यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह एक-दो दिन और जारी रहा तो बाढ़ तबाही मचा सकती है। बारिश के चलते जिले के कई संपर्क मार्गों को जहां खतरा पैदा हो गया है। वहीं रास्ते जलमग्न हो गए हैं। ताल तलैयों में भी उफान आ गया है लेकिन प्रशासनिक कवायदें अभी ठप हैं।

कर्मनाशा ने दर्जनों गांवों को घेरा
दिलदारनगर क्षेत्र में कर्मनाशा नदी ने इस बार फिर भयावह रुप ले लिया है। इसके बढ़ाव से जहां सैकड़ों एकड़ फसलें जलमग्न हो गई हैं वहीं दर्जनों गांव पानी से घिर गए है। पिछली बार बाढ़ की त्रासदी झेल चुके लोगों की नींद उड़ गई है और सुबह होते ही वह पानी के बढ़ाव को देखने पहुंच जा रहे हैं। कर्मनाशा नदी का पानी तटवर्ती गांव चित्रकोनी, खजुरी, ताजपुर कुर्रा, धनाड़ी, अमौरा, सुरहा, केशरूआ, दैवइथा, तियरी आदि के करीब पहुंचता जा रहा है। इन गांवों के किसानों की धान, दलहन तथा तिलहन आदि की हजारों एकड़ फसलें पानी में डूब कर बर्बाद हो रही है। नदी के इस विकराल रुप को देख कर गांववासियों की चिंता बढ़ती जा रही है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल के बाढ़ से दर्जनों गांव डूब गए थे जिससे कई परिवार तबाह हो गए थे। गांवों के सम्पर्क मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गए थे जिससे लोगों की परेशानी कई गुनी बढ़ गई थी।

मंगई नदी से फसलों पर ग्रहण
शादियाबाद क्षेत्र में बह रही मगंई नदी भी उफान मार रही है। इस नदी का पानी इस बार बाहर आ गया है तथा करीब तीन किलो मीटर के क्षेत्र में पसर गया है। इस दौरान गुमा, सोकरा आदि गांवों के पास की फसलें जलमग्न हो गई है। किसानों का कहना है कि अगर पानी दो तीन दिन तक लगातार बना रह गया तो खेती पूरी तरह से बरबाद हो जाएगी। किसानों ने बताया कि इस बार बरसात की वजह से मगंई नदी ने भी जबरदस्त उफान लिया है। अगर जलस्तर और बढ़ा तो फासलों के साथ साथ कई गांवों के लिए खतरा हो जाएगा।

बेसो नदी ने उड़ा दी नींद
बेसो नदी के कई समीपवर्ती गांवों के लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। इस नदी में पानी के हो रहे बढ़ाव से ग्रामीणों की नींद उड़ती जा रही हैं। दो दिन के भीतर नदी उफन कर आस पास के पचासों एकड़ फसलों को जलमग्न कर दिया है। बेसो का पानी नगवां नवापुरा, कठवा मोड़, फतेहपुर अटंवा, हैंसी, सरया आदि गांवों के करीब पहुंच गया है। डरे सहमे गांवों के लोगों का कहना है कि अगर जलस्तर इसी तरह बढ़ा तो लाखों की लागत से बोई गई फसलें बरबाद हो जाएंगी।

गंगा नदी: बनारस में बढ़ी तो छू लेंगी लाल निशान
गाजीपुर। गंगा का जलस्तर अब खतरे के निशान के करीब पहुंचता जा रहा है। अगर बढ़ाव का सिलसिला इसी तरह बना रहा तो अगले कुछ घंटो में ही गंगा जिले की लाल निशान को पार कर जाएंगी। रविवार की दोपहर से लेकर सोमवार की दोपहर तक जल स्तर में काफी तेजी से बढ़ोतरी होती रही। 61.59 मीटर से जल स्तर बढ़ कर 62.32 पर आ गया। शुरूआती क्रम में गंगा की रफ्तार पांच सेमी प्रतिघंटा थी। सोमवार की दोपहर के बाद से इसकी गति में थोड़ी कमी आ गई। यह घट कर दो सेमी प्रति घंटा हो गया। उल्लेखनीय है कि जिले में गंगा के खतरे का निशान 63.105 मीटर है। निशान से कुछ ही सेमी नीचे तक पहुंच चुकी गंगा का बढ़ाव जारी है। केन्द्रीय जल आयोग के मुताबिक अगर इलाहाबाद और वाराणसी में अगर बढ़ाव नहीं रुका तो 48 घंटे में गंगा खतरे के निशान को छू लेंगी।

पशुओं को चारे की समस्या
करंडा क्षेत्र में गंगा के जल स्तर में हुई बढ़ोतरी के बाद कटान की गति थोड़ी धीमी रही। गंगा के तटवर्ती गांवों पुरैना, बयेपुर, सोकनी, बड़हरिया आदि के किसानों की हजारों एकड़ फसलें जलमग्न हो गई हैं। इन गांवों के लोगों की सबसे बड़ी समस्या पशुओं के चारे को लेकर हो गई है। पालतू पशुओं के लिए बोए गए चारे पानी में डूब गए हैं, जिससे वह उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि अगर यही हाल दो चार दिन बना रहा तो चारा नही मिलने से पशु मरने लगेंगे।

गंगा ढा रही कहर
मुहम्मदाबाद क्षेत्र में भी गंगा के जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी से कटान का सिलसिला जारी है। शिवराय का टोला, बच्छल का पुरा, सेमरा आदि गांवों के लोगों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। इस बार हुए कटान में भी गंगा में जहां सैकड़ों एकड़ कृषि योग्य भूमि गंगा में समा गई है, वहीं क ई बागीचे, पेड़, मंदिर, सड़कें तथा खड़ंजा आदि भी गंगा बहा ले गई। सोमवार को भी जलस्तर की बढ़ोतरी के साथ ही कटान का सिलसिला बना रहा। गंगा के तटवर्ती गांवों हरिहरपुर, शेरपुर, वीरपुर, सनबइया आदि गांवों के किसानों की हजारों एकड़ फसलें जलमग्न हो कर नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है। भांवरकोल संवाददाता के अनुसार पलिया गांव में दो दिन हुए कटान के बाद सोमवार को थोड़ी सी राहत रही। कटान की स्थिति यथावत बनी रही। हालांकि गंगा के विकराल रुप से ग्रामीणों का भय बना हुआ है।


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