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वायदे हैं तेरे वायदों का क्या

Ghazipur Updated Sun, 16 Sep 2012 12:00 PM IST
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गाजीपुर। बेरोजगार नौजवानों, महिलाओं, किसानों तथा कर्मियों को राहत का सब्जबाग दिखाकर सपा ने सत्ता की चाभी जरूर थाम ली लेकिन अपने छह माह के कार्यकाल में अभी कई घोषणाओं पर अमल तक शुरू नहीं हो सका है। विकास और व्यवस्था में सुधार के बजाए जिस तेजी से अपराध में बाढ़ आई है, उससे हर वर्ग में हताशा और निराशा साफ नजर आ रहा है। आए दिन होे रहे धरना-प्रदर्शनों से इसकी तस्वीर साफ झलकती है। अपने वायदों पर खरा उतरने और जनता के दिलों पर राज करने के लिए सरकार को जरूर सोचना होगा। यह कहना है कि उन गरीब और परेशान लोगों का जिन्होंने बीते विस चुनाव में सपा को हाथोहाथ लिया और प्रदेश की बागडोर भी सौंप दी। अब वही सपा सरकार को अपने वायदों पर अमल करने की सलाह भी दे रहे हैं।
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सत्ता की बागडोर संभालने से पहले घोषणा की थी कि प्रदेश की जनता को नि:शुल्क तथा गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा मिलेगी लेकिन उनके छह माह के कार्यकाल में यह व्यवस्था पटरी पर आने के बजाए बेपटरी होती दिख रही है। जिला अस्पताल सहित प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केेंद्रों में न मरीजों को बेहतर इलाज मिल रहा है और न ही मुफ्त में दवाएं। नि:शुल्क जांच के नाम पर मरीजों को निजी पैथालाजियों में भेजा जा रहा है। दवा की पर्ची बाहर के लिए लिखी जा रही है। जननी सुरक्षा के नाम पर आए भारीभरकम बजट को गोलमाल कि या जा रहा है। आए दिन मरीज इसकी शिकायत कर रहे हैं। इस शिकायत पर सदर विधायक विजय मिश्र ने जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण कर नकेल कसी थी, जिसका असर कुछ दिन तक दिखा लेकिन अब फिर मनमानी हावी हो गई है।
इस क्षेत्र में सुधार की भी बात सपा ने कही थी। इस दिशा में टैबलेट और लैपटाप बांटे जाने की पहल से छात्र मारे-मारे फिर रहे हैं। छात्र संघ की बहाली से कालेजों में माहौल काफी गरम हो गया है। छात्र पढ़ने के बजाए छात्र संघ की राजनीति में मशगूल हो गए हैं। यही नहीं उन्हें रोजगार के लिए आवेदन फार्मों में जाति, निवास, आय आदि प्रमाण पत्रों के लिए कचहरी और लेखपालों के यहां चक्कर काटना पड़ रहा है। इसको लेकर छात्र कचहरियों में धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। सैदपुर तहसील में छात्रों ने जहां हंगामा काटा। वहीं उनकी समस्या के समाधान के लिए भाजपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष बृजेंद्र राय ने अपने समर्थकों के साथ तहसील में धरना-प्रदर्शन भी किया।
किसानों की कर्जमाफी की घोषणा भी की गई थी लेकिन अभी तक जिले के किसानों का एक भी पाई माफ नहीं हो सका है। समितियों पर सचिवों की हड़ताल से किसान खाद के लिए भटक रहे हैं। मजबूरी में उन्हें ब्लैक में खाद खरीदनी पड़ रही है। नहरें बेपानी हैं। जर्जर नहरों के टूटने से दिलदारनगर और जखनिया में कई बीघे फसल जलमग्न हो कर बर्बाद हो गई। इसके लिए किसान खेतों में काम करने के बजाए धरना-प्रदर्शन कर रहेे हैं। फिर भी सरकार उनके आंसू नहीं पोछ पा रही है।
सरकार ने कहा था कि आपदा प्रभावितों के साथ सरकार साथ साथ रहेगी लेकिन हकीकत कुछ और ही है। बारिश में हर बार यह जिला कटान की दंश झेलता है। इस बार भी दंश झेल रहा है। करंडा के पुरैना और मुहम्मदाबाद के सेमरा शिवराय क पुरा में कटान का सिलसिला जो अरसे से शुरू हुआ था, वह आज भी बदस्तूर जारी है। कई बीघे भूमि गंगा में समा गई तो कई मकान और झोपड़ियां बह गईं। मजबूर होकर लोगों को अपना आशियाना उजाड़ना पड़ा। लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। बमुश्किल उनके घरों का चूल्हा जल रहा है। अभी तक उनके लिए कोई ठोस पहल शुरू नहीं की जा सकी है। सेमरा में कुछ विस्थापितों को बसाने का काम शुरू किया गया है।
गड्ढायुक्त सड़कों से जनता को मुक्ति दिलाने की भी घोषणा की गई थी। जिले की ऐसी कोई सड़क नहीं है जो खस्ताहाल न हो। सड़क पर दो से तीन फिट तक गहरे गड्ढे देखे जा सकते हैं। 10 से 15 मीटर तक की बजरी सड़कों से उखड़ी हुई हैं, जिसके चलते सड़कों पर चलना जोखिम हो गया है। इसके चलते आए दिन कहीं न कहीं सड़क हादसे हो रहे हैं लेकिन छह माह के कार्यकाल में इन खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत शुरू नहीं कराई जा सकी।
सपा सरकार ने पर्याप्त बिजली मुहैया कराने का भी वायदा जनता से किया था लेकिन छह माह में यह सपना साकार होने के बजाए सपना बनता नजर आया है। जर्जर तारों के टूट कर गिरने से मकानों में आग लग रही है तो कई बेकसूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। फिर भी लोगों को अपेक्षा के अनुरूप बिजली नहीं मिल पा रही है। कहीं 10 से 14 घंटे तो कहीं 12 से 15 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है लेकिन इसमें भी कटौती जारी है। फुंके ट्रांसफारमर को बदलने में 10 से 15 दिन लग रहे हैं। इसके लिए परेशान उपभोक्ता जगह-जगह धरना-प्रदर्शन कर सपा सरकार को कोस रहे हैं। नाराज उपभोक्ताआें द्वारा बारा, सुहवल तथा जमानिया में बिजली अधिकारियों को बंधक तक बनाया गया लेकिन व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी है।

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