मनरेगा में गड़बड़ी की तो नपेगी गर्दन

Ghazipur Updated Tue, 11 Sep 2012 12:00 PM IST
गाजीपुर। मनरेगा योजना में हो रही गड़बड़ी का खेल खत्म करने के लिए मुख्य विकास अधिकारी ने कड़े तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। योजना में गड़बड़ी की मिली शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सीडीओ ने सादात एवं सैदपुर ब्लाक में की गई गड़बडि़यों की जांच कराने की तैयारी शुरू कर दी है।
बीते वर्ष मनरेगा योजना में गड़बड़ी करने के आरोप में कई ग्राम पंचायत सचिवों के खिलाफ तत्कालीन सीडीओ के निर्देश पर सादात थाने में एफआईआर भी दर्ज कराया गया था। सचिवों के ऊपर आरोप था कि एक-एक जाबकार्ड धारक मजदूरों को ढाई सौ से तीन सौ दिन तक एक वर्ष में काम पर भुगतान किया गया है। इसका खुलासा तब हुआ जब शासन ने पूरे जिले में 100 दिन से अधिक काम देने वाली ग्राम पंचायतों का नाम भेजा। इसकी जांच कराई गई तो सबसे अधिक गड़बड़ी सादात ब्लाक में पाई गई। आरोपी सचिवों को निलंबित भी किया गया था जो अब बहाल भी हो गए हैं। पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट क्या लगाई और क्या कार्रवाई हुई इसकी जानकारी अधिकारियों को भी नहीं है। इसके साथ ही सैदपुर, मनिहारी, कासिमाबाद, भांवरकोल जमानियां आदि ब्लाकों में मनरेगा योजना में अभी भी गड़बड़ी जा रही है। इस संबंध में सीडीओ का कहना है कि वह हर तहसील दिवस समाप्त होने पर गांव में मनरेगा योजना से हुए कार्यों के संबंध में ग्रामीणों के साथ ही मनरेगा मजदूरों का बयान दर्ज कर कार्रवाई करेंगे। योजना में गड़बड़ी करने वाले सचिव एवं ग्राम प्रधान भी जेल भेजे जाएंगे।


फर्जी जाबकार्ड का प्रधान लेते हैं ठेका
गाजीपुर। यदि कार्यदायी संस्थाओं के अलावा किसी को मनरेगा मजदूरों के जाबकार्ड की जरूरत होती है तो ग्राम प्रधानों के साथ सचिवों से संपर्क करते हैं। इसके बाद मिट्टी का फर्जी मस्टररोल भरकर धनराशि उतार ली जाती है। गांवों में ऐसे ऐस मनरेगा मजदूर हैं जिनकी कोठी भी है और वे कागज में मनरेगा मजदूर बनकर वास्तविक गरीबों का निवाला डकार रहे हैं।


घर पर जाबकार्ड रखने वाले प्रधान जाएंगे जेल
गाजीपुर।सीडीओ ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी ने उन ग्राम प्रधानों को चेताया है जो अपने घरों में मनरेगा मजदूरों का जाबकार्ड रखे हुए हैं। ऐसे प्रधानों के घर में यदि जाबकार्ड पाए गए तो संबंधित प्रधान को सीधे जेल की हवा खानी पड़ सकती है। मनरेगा योजना की हर ब्लाक में समीक्षा करने वह खुद ब्लाकों पर जाएंगे। इसके बाद गांवों में मनरेगा योजना के कार्यों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। गड़बड़ी करने पर मौके पर ही संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


मनरेगा को दीमक की तरह चाट रहे संविदा कर्मी
गाजीपुर। मनरेगा योजना में गड़बड़ी करने के लिए सिर्फ अफसर ही जिम्मेदार नहीं है। उनके साथ-साथ मनरेगा योजना के क्रियान्यवन के लिए रखे गए संविदा कर्मी। इसमें एपीओ, ब्लाक कोआर्डिनेटर, तकनीकी सहायक, रोजगार सेवक के साथ ही कम्प्यूटर आपरेटर का भी मनरेगा योजना में महत्वपूर्ण योगदान है। हर ब्लाक में तैनात तकनीकी सहायक फर्जी एमबी करके हर माह लाखों रुपये डकार रहे हैं। एपीओ की जिम्मेदारी है कि मनरेगा योजना में हुए कार्यों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। लेकिन एपीओ भी अपनी जिम्मेदारी से विमुख होते जा रहे हैं। इनसे पूछने पर बस यही कहते हैं साहब हम लोग अगर कड़ाई भी शुरू कर दें तो बीडीओ हम लोगों का साथ नहीं देते हैं। देखा जाए तो एपीओ एवं बीडीओ की जो रिपोर्ट आ रही है उसमें मनरेगा योजना आल इज बेल है।

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