बीएड शिक्षकों की मेरिट सूची खोलेगी पूरा राज

Ghazipur Updated Thu, 06 Sep 2012 12:00 PM IST
गाजीपुर। प्राथमिक विद्यालयों में तैनात किए गए बीएड शिक्षकों की मेरिट सूची ही फर्जी शिक्षकों का राज खोल सकती है। इस सूची को पूर्व बीएसए वीपी सिंह ने गायब कर दिया है। यह सूची पटल सहायक के पास भी नहीं है। यही नहीं जिन फर्जी शिक्षकों का दोबारा सत्यापन किया गया था। उनकी रिपोर्ट भी विभाग से गायब है।
वर्ष 2004 बैच के 1240 शिक्षकों के समस्त शैक्षिक प्रमाण तत्कालीन बीएसए वीपी सिंह अपने आवास पर रखते थे। बीएड शिक्षकों की तैनाती से लेकर वर्ष 2009 तक कुल तीन दर्जन से अधिक शिक्षकों के प्रमाण पत्र जांच में फर्जी पाए गए थे। हालांकि इसकी संख्या अधिक थी लेकिन कुछ पूर्व बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए एक दर्जन से अधिक फर्जी शिक्षकों को अभयदान भी दिया था। जब सभी फाइर्लें आइं तो एक मास्टर माइंड प्राथमिक शिक्षक ने पूर्व बीएसए को लालच देना शुरू कर दिया। विभागीय सूत्रों की मानें तो वह भी पूरी तरह से फर्जी था। इसी दौरान उसने संबंधित शिक्षण संस्थाओं के अधिकारियों से मिलकर अपने समस्त अंक पत्रों को सही करा लिया। पूर्व बीएसए ने बर्खास्त हो चुके सभी बीएड शिक्षकों को सही सत्यापन दिखाकर बहाल करना शुरू कर दिया। पहले इन शिक्षकों से एक आवेदन लिया गया। इसमें कहा गया था कि जांच से हम संतुष्ट नहीं है। लिहाजा इसकी दोबारा जांच कराई जाए। इसके बाद फर्जी सत्यापन दिखाकर सभी बर्खास्त शिक्षकों को वेतन जारी कर दिया। कभी पांच शिक्षकों को बकाया वेतन के साथ बहाल किया गया तो कभी दस। धीरे-धीरे एक वर्ष में सभी बर्खास्त शिक्षक इस आधार पर बहाल कर दिए गए कि संबंधित शिक्षकों का सत्यापन करा लिया गया है यदि जांच में शैक्षिक प्रमाण पत्र फर्जी मिलता है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित शिक्षक की होगी। जो पूर्व बीएसए के खास शिक्षक थे। जिनसे मोटी रकम लाखों में वसूल की गई थी, उन शिक्षकों के फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों को ही बदल दिया गया। उसके स्थान पर जो प्रमाण पत्र सही थे यानी मेरिट में कम नंबर वालों को फाइल में नत्थी कर दिया गया। इसके बाद मेरिट सूची को मिलकर गायब भी कर दिया गया। इस मेरिट सूची से फर्जी शिक्षकों की पोल खुल सकती है। यदि सीधे जिला प्रशासन एवं बेसिक शिक्षा अधिकारी इस फाइल को भेजते हैं तो दर्जन फर्जी शिक्षक आसानी से बच सकते है। इसलिए सबसे वर्ष 2004 की मेरिट सूची खोजना जरूरी है। यह सूची प्रदेश स्तर पर जारी हुई है। इसके आधार पर बीएड शिक्षकों का चयन हुआ था।

बीएड शिक्षकों की सभी फाइलें सीडीओ के कब्जे में
गाजीपुर। मुख्य विकास अधिकारी ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि सभी फाइलें उन्होेंने अपने कब्जे में ले ली है। इनकी सूची तैयार की जा रही है। डायट की सूची से भी इनका मिलान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी का निर्देश है कि सभी बीएड शिक्षकों की पत्रावलियां की जांच संबंधित शिक्षण संस्थाओं से कराई जाए। उन्होंने बताया कि बर्खास्त किए गए शिक्षकों की फाइलें गायब हैं। इस बिन्दु पर भी जांच की जाएगी। इसमें कई अधिकारियों के साथ ही पटल सहायक की भूमिका पूरी तरह से संदिग्ध है।


तीन दर्जन से अधिक बीएड शिक्षक हो चुके हैं बर्खास्त
सात वर्ष से हो रही थी बीएड की पत्रावलियों से छेड़छाड़
वर्ष 2006 से 2009 तक महुआबाग में रखी गई थी फाइलें
अपने आवास पर तीन वर्ष तक पूर्व बीएसए रखे थे फाइलें
सत्यापन के नाम पर होता रहा मोलभाव, फर्जी भी पाते रहे वेतन
अमर उजाला ब्यूरो
गाजीपुर। बेसिक शिक्षा विभाग के बीएड शिक्षकों की फाइलों के साथ बीते सात वर्षों से छेड़छाड़ का खेल होता रहा। बड़े पैमाने पर फर्जी एवं बर्खास्त शिक्षकों को भी विभाग के तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी वेतन देते रहे। इसका खुलासा कई बार अमर उजाला ने अपने अंक में किया भी था, लेकिन शासन स्तर तक पहुंच होने के चलते वीपी सिंह के कार्यकाल की जांच नहीं हो पाई।
शासन के निर्देश पर वर्ष 2004 बैच के 1240 लोगों को विभिन्न प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती दी गई थी। जब उन्हें नियुक्ति प्रमाण पत्र एवं तैनाती प्रमाण पत्र जारी किया गया था तो उस समय राकेश सिंह बीएसए के पद पर कार्यरत थे। जब डायट ने बीएड शिक्षकों का सत्यापन नहीं कराया तो उन्होंने सभी बीएड शिक्षकों का वेतन रोक दिया। कहा कि सत्यापन होने के बाद ही शिक्षकों को वेतन दिया जाएगा। इसको लेकर शिक्षक संघ ने आंदोलन भी किया था। सभी शिक्षक धरने पर भी बैठ गए थे। बाद में सहमति बनी कि बीएड शिक्षकों को वेतन दिया जाएगा। लेकिन उन्होंने कहा कि बकाया वेतन नहीं दिया जाएगा। सत्यापन आने के बाद भी वेतन जारी होगा। जिससे दर्जनों शिक्षकों का बकाया काफी महीने पुराना होगा। इसी बीच बीएसए के पद पर भाष्कर मिश्रा आए। उन्होंने बीएड शिक्षकों का सत्यापन कराया। इस दौरान एक दर्जन से अधिक बीएड शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण फर्जी पाए गए। उन्होंने सभी को बर्खास्त भी कर दिया। इसको लेकर काफी खलबली मची। इसी बीच उनका भी स्थानांतरण कर दिया गया। इनके स्थानांतरण के बाद ओपी राय आए। उन्होंने भी सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान उन्होंने भी एक दर्जन से अधिक शिक्षकों को बर्खास्त किया। फिर वर्ष 2009 में वीपी सिंह बेसिक शिक्षा अधिकारी के रूप में आए। वह यहां पर वर्ष 2012 तक रहे। उनका स्थानांतरण मई 2012 में वरिष्ठ प्रवक्ता डायट प्रतापगढ़ के लिए किया गया। उन्होंने तीन वर्ष के कार्यालय में बीएड की फाइलों को सबसे पहले अपने सरकारी आवास पर मंगाया। इसके बाद उन्होंने बर्खास्त किए गए सभी शिक्षकों को सत्यापन के आधार पर बहाल करके बकाया वेतन देते हुए ऐसे विद्यालय पर बहाल कर दिया जिसकी जानकारी अभी तक किसी को नहीं हो पाई। इस खेल में उनका साथ एक शिक्षक की भूमिका संदिग्ध रही है, जो इस समय शहर के किसी प्राथमिक विद्यालय पर तैनात है।

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