आज भी आठ रुपये मिलती है मजदूरी

Ghazipur Updated Fri, 24 Aug 2012 12:00 PM IST
गाजीपुर। यदि आप किसी मजदूर से कहेंगे कि आओ आठ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से काम कर दो तो मजदूर का टका सा जबाव मिलेगा साहब आठ रुपये में चाय नाश्ता भी नहीं कर सकते। पर बिजली विभाग लगभग बीस दैनिक मस्टररोल श्रमिकों को आठ रुपये बकायदा सरकारी चेक के साथ भुगतान करता है। इन कर्मियों को लेबर कोर्ट ने स्थायी नियुक्ति के साथ ही पगार देने का आदेश दिया था, लेकिन प्रतिमाह आठ रुपया पगार पाने वाले ये श्रमिक अभी भी स्थायी नियुक्ति के लिए भटक रहे हैं। पगार की आस में अधिकांश ने आधी उम्र भी पार कर ली है।
विद्युत विभाग में वर्ष 1980 में सौ से अधिक मजदूरों को दैनिक मस्टररोल कर्मी के रूप में विभाग ने तैनाती दी थी। उस दौरान एक कर्मी को रोजाना आठ रुपये की दर से भुगतान किया जाता था। उसी पर उनकी रोजी रोटी चलती थी। सभी मजदूरों से वर्ष 1982 तक कार्य लिया गया। इसके बाद इन सभी मजदूरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इन मजदूरों के स्थान पर विभाग ने स्थायी कर्मचारियों की तैनाती कर दी। इसके विरोध में मजदूरों ने लेबर कोर्ट में विद्युत विभाग के अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया। श्रमिकों ने बकायदा कोर्ट में मस्टररोल कर्मी का प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत किया। इसके विरोध में विभाग का कोई अधिकारी कोर्ट में प्रस्तुत नहीं हुआ। श्रमिकों ने कोर्ट को बताया कि हम लोगों को हटाने से पहले न तो कोई नोटिस दी गई और न ही मुआवजा प्राप्त हुआ। इसलिए हम लोगों को बहाल किया जाए। एक कलेंडर वर्ष में 240 दिन काम किया गया।
पीड़ित श्रमिकों ने पीठासीन अधिकारी श्रम न्यायालय द्वारा 29 अक्तूबर 1997 को जारी आदेश का हवाला देते हुए बताया है कि श्रम न्यायालय ने अपने स्पष्ट आदेश में कहा है कि जिस मजदूरी पर मजदूर काम करते थे, उसी पगार पर आदेश की तिथि से भुगतान करते हुए इन्हें स्थायी नियुक्ति पर रखा जाए। इस पर विद्युत विभाग ने हाईकोर्ट की शरण ले ली। लेबर कोर्ट में वाद दाखिल करने वाले धरवार कलां गांव निवासी केदार यादव ने बताया कि लेबर कोर्ट के आदेश के बाद भी विद्युत विभाग के अधिकारी हम लोगों को तैनाती नहीं दे रहे हैं। अभी भी आठ रुपये की दर से भुगतान हो रहा है। इतनी धनराशि में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है जबकि लेबर कोर्ट ने हम लोगों की स्थायी तैनाती देने के निर्देश दिए हैं। उधर अधिशासी अभियंता बिजली दीपक कुमार ने बताया कि यह मामला हाईकोर्ट में लंबित है। हम लोग लेबर कोर्ट के आदेश पर दो दर्जन से अधिक कर्मियों को 8 रुपये की दर से भुगतान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन श्रमिकों की मांगें पूरी तरह से गलत है। अब कोर्ट ही इसमें कोई फैसला कर सकता है।

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