जमीन के लिए भोले लहरों से लड़ रहे जंग

Ghazipur Updated Mon, 20 Aug 2012 12:00 PM IST
गाजीपुर। जमीन की जंग से आम आदमी ही नहीं बल्कि बजरंगबली और भगवान शिव भी जूझ रहे हैं। पुरैना में हो रहे जबरदस्त कटान की जद में आया प्राचीन हुनमान- शिव मंदिर इसकी बानगी है। मंदिर का चबूतरा गंगा की धारा में समाहित हो चुका है जिसके चलते अब मंदिर हवा में लटक रहा है। कटान में मंदिर कब समाहित हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। इसलिए मंदिर में स्थापित शिव और बजरंग बली की प्रतिमा अन्यत्र स्थापित कर दी गई है।
कई दशक से करंडा का पुरैना गांव पतित पावनी गंगा मैय्या के कोप का दंश झेल रहा है। बरसात में गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ शुरू होेने वाले कटान से यहां के वाशिंदों पर भारी विपदा आफत बन कर टूटती है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। पिछले कई दिनों से गंगा मेें हो रहे जबरदस्त कटान से सैकड़ों बीघे भूमि गंगा की धारा विलीन हो चुकी है। लाख कोशिशों के बावजूद गांव के कई लोग तो अपना आशियाना नहीं बचा सके लेकिन गांव की रक्षा के लिए गांव के छोर पर स्थापित प्राचीन हनुमान और शिव मंदिर को बचाने के लिए वह तरह-तरह के जतन ही नहीं बल्कि पूजा-पाठ और टोटका भी कर रहे हैं। वजह कटान के चलते शिव मंदिर के अस्तित्व पर पूरी तरह से खतरा मंडरा रहा है। कटान में मंदिर का चबूतरा बह गया है। मंदिर की नींव नीचे से खोखली हो गई। ऐसे में मंदिर अब गिरे कि तब कुछ कहा नहीं जा सकता। मंदिर पूरी तरह से हवा में लटक रहा है। भगवान से भी जमीन छिन गई है। गंगा मैय्या के रौद्र रूप के आगे लगता है कि उनका भी कोई जोर नहीं चल रहा है लेकिन गांव वालों को शिव और बंजरग बली पर अभी भी विश्वास है। गांव के कृपाशंकर राय और अरविंद राय बताते हैं यह मंदिर दशकों पुराना है। मौजूदा समय में जहां मंदिर है, वहां से करीब डेढ़ किमी दूर गंगा बहती थीं। यह मंदिर तब गंगा के तट पर था। कटान में पहला मंदिर बह गया। इसके बाद गंगा से हटकर करीब आधा किमी दूर मंदिर स्थापित कराया गया लेकिन यहां से भी भगवान को बेदखल करने गंगा पहुंच गईं और देखते ही देखते इस मंदिर का भी अस्तित्व खत्म हो गया लेकिन मंदिर में स्थापित मूर्तियों को पुरैना गांव में मंदिर बनाकर स्थापित कर दिया। पिछले बीस वर्ष से इस मंदिर में नियमित पूजा पाठ के साथ शिवरात्रि, जन्माष्टमी, हनुमत लला जयंती, शनिवार और मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ होता है।

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