आजादी की ये दीवानगी देखकर हिल गई थी अंग्रेजी हुकूमत

Ghazipur Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
मुहम्मदाबाद। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अंग्रेजों भारत छोड़ो के आह्वान पर अपने प्राणों की आहुति देने के लिए कोने -कोने से लोग आ रहे थे। ऐसे में वीरों की भूूिम गाजीपुर कैसे से पीछे रहती। तैयारी शुरू हो गई और बनने लगी अंग्रेजों को देश से निकालने की रणनीति।
विज्ञापन

आजादी की जंग के पहले चरण में 16 अगस्त को हवाई अड्डे पर तोड़फोड़ एवं मुहम्मदाबाद पोस्टआफिस में आगजनी के बाद 17 अगस्त को शेरपुर स्थित जूनियर हाईस्कूल में नौजवानों की गुप्त बैठक हुई। इसमें रणनीति बनी तहसील भवन पर झंडा फहराने की। दो समूहों में बंटकर मुहम्मदाबाद की तरफ कूच करने का निर्णय लिया गया। एक समूह की बागडोर डा. शिवपूजन राय एवं दूसरे की डा. तिलेश्वर राय के हाथ में सौंपी गई। तय था कि अहिरौली ग्राम के पास आने के बाद डा. शिवपूजन राय का दल शहनिंदा होते हुए तहसील भवन पर पहुंचकर सीढ़ी से होते हुए झंडा फहराएगा एवं डा. तिलेश्वर की टीम तहसील की चहारदीवारी के उत्तर पहुंचकर सुरक्षा बलों का हथियार अपने हाथ में ले लेगी। एक जत्था नगर के बाहर-बाहर तहसील भवन के पीछे पहुंचा। अधिकांश नवयुवकों वाला दूसरा दल जिसकी अगुवाई डा. शिवपूजन राय कर रहे थे मुख्य सड़क से होते हुए तहसील भवन की ओर चला। लेकिन तहसील भवन के पास पहुंचते ही इनलोगों पर भारतीय तहसीलदार ने अंधाधुंध गोलियों की बौछार कर दी और जुलूस में भगदड़ मच गई। लेकिन आजादी के दीवाने डा. राय ने तहसीलदार को गोली चलाने के लिए ललकारते हुए हाथ में तिरंगा लिए तहसील भवन की ओर बढ़े। तब तक भारत मां के सीने से चीख निकली, उसका लाल हमेशा के लिए सो गया। इसी तरह आजादी की बलि वेदी पर वंशनारायण राय, रामबदन उपाध्याय, वशिष्ट राय, रिशेश्वर राय, श्रीनारायण राय, वंशनारायण राय, राजनारायण राय सभी शेरपुर के शेर आहूत हो गए। अपने आप में ये अनोखी शहादत थी क्योंकि शहीद होने वालों में से कई लोग बंदूक चलाना जानते थे। सिपाहियों से बंदूक छीन लेने का बाद भी किसी ने फायर नहीं किया गया। क्योंकि नेता का यही आदेश था। इस घटना से आक्रोशित जिला कलेक्टर मुनरो ने शेरपुर को बर्बाद करने की पूरी कोशिश की। गंगा में बाढ़ के कारण शहीदों की भूमि बमबारी से तो बच गई, लेकिन 29 अगस्त 1942 को फौज लगाकर पूरे शेरपुर गांव में लूट एवं आगजनी का तांडव किया गया। भागते हुए पुरुषों-महिलाओं पर गोली चलवाई, जिसमें तीन लोग शहीद हुए। इसके अलावा गांव में सामूहिक दंड लगाया गया। आजादी के दीवानों के इस अंदाज ने अंग्रेजों को इस कदर हिला दिया कि जिला कलक्टर को विवश होकर लंदन गोपनीय पत्र लिखना पड़ा कि अब हिंदुस्तान सीने पर गोली को तैयार हो गया है। इसे आजाद करना ही होगा। यह ब्रिटिश पार्लियामेंट की कार्रवाई में भी अंकित है। इसी घटना से प्रभावित होकर सादात में शहीद अलगू यादव के समर्थकों ने थाने को जलाकर थानेदार को मार डाला। रेल की पटरियां उखाड़ डाली, जिसमें कई लोग घायल हुए एवं जेल गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us