कागज पर ही गठित हुआ मीना मंच

Ghazipur Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
गाजीपुर। जिले की निरक्षर बालिकाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शुरू की गई मीना मंच योजना अधिकारियों की लापरवाही की शिकार हो गई है। कागज में गठित की गई मीना मंच के विषय में जूनियर हाईस्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को जानकारी तक नहीं है। योजना के संचालन के लिए सभी बीआरसी को भेजी गई लाखों रुपये की धनराशि को डकारने की तैयारी चल रही है। इसको लेकर विभाग बेखबर है।
वर्ष 2002-03 में केंद्र सरकार ने घर बैठी बालिकाओं को शिक्षित करने के लिए मीना मंच के गठन का निर्देश दिया था। इसके लिए सभी न्याय पंचायतों में एक एनपीईजीईएल कक्ष का निर्माण दो लाख 10 हजार रुपये में किया गया था। इस कक्ष में एक हाल और शौचालयों भी बनाए गए थे। देखा जाए तो एक दशक गुजर गए लेकिन इन कक्षों में कभी भी छात्राओं के समूह को प्रशिक्षित नहीं किया गया। शासन का निर्देश था कि प्रत्येक न्याय पंचायत स्तर पर मीना मंच का गठन किया जाएगा, इसमें 20 तेजतर्रार छात्राओं को शामिल किया जाएगा। इन छात्राओं को प्रशिक्षण देने के लिए दो हजार की धनराशि खर्च की जाएगी। प्रशिक्षण प्राप्त होने पर छात्राओं का समूह गांवों में जाकर निरक्षर बालिकाओं को स्कूल जाने के लिए प्रेरित करेंगी। इसके लिए छात्राओं को रेडियो के कार्यक्रम भी सुनाने के निर्देश थे। मीना नाम की एक लड़की के विषय में बताया गया है। वह शौच के बाद साबुन या राख का प्रयोग करती है। शुद्ध भोजन करने के बाद स्कूल जाती है और अपने मेहनत के बल पर स्कूल में प्रथम स्थान प्राप्त करती है। मीना के माध्यम से छात्राआें को शिक्षा के मामले में जागरूक करना इस योजना का उद्देश्य था। बावजूद इसके बेसिक शिक्षा विभाग के लापरवाह खंड शिक्षा अधिकारी एवं जिले के अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। शासन का लाखों रुपयेे बीआरसी पर बैठे लोग गटक रहे हैं।

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