गंगा में समा गई खड़ी फसल

Ghazipur Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
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नोनहरा। पतित पावनी के जलस्तर में वृद्धि होने के साथ ही कटान की रफ्तार भी तेज हो गई है। गौसपुर और फिरोज में कटान के कहर से उपजाऊ कृषि भूमि कट कर गंगा में समाहित हो रही है। फसलों के भूमि के साथ कट कर गंगा में समाहित होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। वे इस बात से परेशान हैं कि अगर इसी तरह कटान का कहर जारी रहा तो आने वाले समय में उनके पास एक धूर भी जमीन नहीं बचेगी, जिस पर वे खेती कर परिवार की जीविका चला सकें।
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पिछले दो दिनों से गंगा के जलस्तर में वृद्धि का क्रम जारी है। जैसे-जैसे जलस्तर में वृद्धि हो रही है, वैसे-वैसे तटवर्ती क्षेत्रों के लोगों की धड़कने भी बढ़ती जा रही है। सबसे ज्यादा बल कटान पीड़ितों के माथे पर पड़ रहा है। उनकी कीमती भूमि उनके आंखों के सामने ही कट कर मां गंगा की गोद में समाहित हो जा रही है। करीब छह साल में अब तक सैकड़ों बीघे कृषि योग्य भूमि कटान की भेंट चढ़ चुकी है। कटान के चलते जहां उपजाऊ भूमि गंगा में समाहित हो रही है, वहीं परवल, अरहर, ज्वार, बाजरा आदि फसलें कट कर पानी में गिर रही है, जिससे किसानों में मायूसी है। इसके अलावा डुगुंरपुर दीयर में भी कटान होने से किसानों की सैकड़ों बीघे उपजाऊ भूमि पर खतरा मंडराने लगा है। उस भूमि पर परवल, तरबूज, खरबूज, नाशपाती आदि की खेती कर किसान प्रति वर्ष लाखों रुपये अर्जित करते है। इस दीयर के कटान की जद में आ जाने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। अब तक जिन लोगों की भूमि गंगा में समा चुकी है। उनमें शंभू यादव, राजेंद्र उपाध्याय, दयाशंकर उपाध्याय, गुलाब यादव, प्रेम यादव, अवधेश यादव, कृपाशंकर यादव, आनंद कुमार राय, नागेश कुमार राय, सूरजनाथ यादव, कुबेर यादव सहित दर्जनों किसान शामिल है। लोगोें का कहना है कि यदि इसी प्रकार से कटान जारी रहा तो राजमार्ग भी कटान की जद में आ जाएगा।
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