जिपं सदस्यों में बंटेंगे 12-12 लाख रुपये

Ghazipur Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
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गाजीपुर। जिला पंचायत के सभागार में शुक्रवार को 9 माह बाद हुई जिपं सदस्यों की आपात बैठक हंगामेदार रही। भारी हंगामे के बीच साढ़े बारह करोड़ रुपये का बजट पास हुआ। इसमें एक करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि कर्मचारियों के वेतन पर खर्च की जाएगी। सभी सदस्यों से प्रस्ताव प्रस्तुत करने का अनुरोध किया गया है। एक सदस्य के बीच 12 लाख रुपये का बंटवारा होगा।
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जिला पंचायत सदस्यों की बैठक 9 माह बाद हुई। बीते 15 अक्तूबर को सभी सदस्यों की बैठक आयोजित की गई थी। यह भी बैठक काफी हंगामेदार रही। इसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं गीता पासी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया और वह हार भी गईं। मौजूदा समय में शासन के निर्देश पर तीन सदस्यीय अध्यक्षीय अधिकार समिति का गठन शासन ने किया है। तीनों सदस्यों के अनुरोध पर शुक्रवार को जिला पंचायत हाल में सभी सदस्यों की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक की शुरूआत पूर्व के एजेंडे पर चर्चा की गई। इसी बीच सदस्य ब्रजभूषण दूबे ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह बैठक पूरी तरह से अवैध है। कोई भी बैठक बुलाने के लिए एक माह पहले सदस्यों को सूचना दी जाती है। निकाय चुनाव की अधिसूचना समाप्त नहीं हुई और बैठक बुलाने के लिए सदस्यों को सूचना भेज दी गई। उन्होंने बैठक को स्थगित करने की मांग की। इस पर कटाक्ष करते हुए सांसद राधेमोहन सिंह ने कहा कि चेयरमैन को यह अधिकार होता है कि वह आपातकालीन बैठक सदस्यों की बुला सकता है। कुछ देर बाद यह मामला खत्म हो गया। सभी सदस्य चाहते थे कि यह बैठक सुचारू रूप से संचालित की जाएं। इसके बाद 39 सड़कों का मामला कासिमाबाद के जिला पंचायत सदस्य अनुराग सिंह ने उठाया। उन्होंने कहा कि बिना सदस्यों की सहमति के 13वें वित्त आयोग की 39 सड़कों को शासन को भेज दिया गया। इसकी जानकारी सदन को दी जाए। इस पर अध्यक्षीय अधिकार समिति के सदस्य राधेश्याम यादव ने सदन में कहा कि यह आरोप पूरी तरह से निराधार है। किसी भी सड़क को शासन को नहीं भेजा गया। कुछ देर तक इस पर भी प्रतिवाद हुआ। फिर सांसद ने सदस्यों को नसीहत दी कि बिना अध्यक्ष की अनुमति से सदन में सदस्यों को बोलने का अधिकार नहीं है। ब्रजभूषण दूबे ने कहा कि महाहर धाम की सड़क काफी जर्जर हो चुकी है। इस पर सांसद ने कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी राजबहादुर ने सदन के सदस्यों को बताया कि 13वें वित्त आयोग के तीन करोड़ 34 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। राज्य वित्त आयोग का तीन करोड़ 95 लाख 90 हजार रुपये में सिर्फ दस प्रतिशत की धनराशि कर्मचारियों के वेतन पर खर्च होगी। पिछले वर्ष के पांच करोड़ 33 लाख रुपये जो राज्य वित्त का बचा हुआ है। इसमें एक करोड़ 68 लाख रुपये कर्मचारियों के वेतन पर खर्च किया जाएगा। तीन करोड़ 69 लाख रुपये सदस्यों के क्षेत्रों में खर्च किया जाएगा। उन्होंने सदन को बताया कि यह पहली किश्त है। इसके बाद भी धनराशि आएगी। उन्होंने बताया कि एक सदस्य के क्षेत्र में 11 से 12 लाख रुपये खर्च होंगे।
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