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अस्पताल को इलाज की जरूरत

Ghazipur Updated Fri, 22 Jun 2012 12:00 PM IST
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गहमर। एशिया के बड़े गांव में शुमार सैन्य बाहुल्य इस गांव के पशु चिकित्सालय को स्वयं इलाज की जरूरत है। वजह अस्पताल में कई वर्षों से चिकित्सक का टोटा बना हुआ है। आलम यह है कि लाखों की लागत से बनकर तैयार यह अस्पताल फार्मासिस्ट एवं पत्रवाहक के सहारे चल रहा है। चिकित्सक के अभाव में पशुपालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पशुओं की मामूली उपचार सुविधा के लिए चिकित्सक की कमी उन्हें खलती है।
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वर्ष 2008 के अंतिम माह में स्थानीय पशु अस्पताल पर तैनात चिकित्सक के स्थानांतरण हो जाने के बाद यहां किसी डाक्टर की नियुक्ति नहीं की गई। पहले से ही दो अस्पतालों का चार्ज लिए पशु अस्पताल ताड़ीघाट के डाक्टर को यहां का प्रभारी नियुक्त कर दिया गया। उसके बाद विभाग की ओर से पहले से भदौरा में तैनात डाक्टर को गहमर का इंचार्ज बनाकर भेजा गया, लेकिन वह भी सप्ताह में एकाध दिन ही उनके दर्शन होते है। करीब चार वर्षों से चिकित्सकविहीन चल रहा यह अस्पताल फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। चिकित्सक के अभाव के चलते क्षेत्र के करीब दर्जन भर से अधिक गांव गहमर, शायर, बारा, खुदरा, गदाईपुर आदि गांव के पशुपालकों को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। पशुओं के मामूली रूप से भी अस्वस्थ होने पर उन्हें उपचार सुविधा के लिए तरसना पड़ रहा है। मजबूर होकर कुछ पशुपालक झोलाछाप चिकित्सकों की शरण में चले जाते हैं।

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