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36 करोड़ के खर्चे का पंचायतों के पास हिसाब नहीं

Ghazipur Updated Fri, 22 Jun 2012 12:00 PM IST
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गाजीपुर। जिले की ग्राम पंचायतों में सरकारी धन का जमकर दुरूपयोग हो रहा है। अभी तक 623 ऐसी ग्राम पंचायतें हैं जिन्होंने खर्च की गई 36 करोड़ की धनराशि का हिसाब नहीं दे पाईं है। इसके लिए ग्राम पंचायतों के खाता सीज करने के साथ ही दोषी सचिवों और ग्राम प्रधानों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। डीपीआरओ ने हिसाब देने के लिए 30 जून का समय निर्धारित किया है।
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जिले की 1050 ग्राम पंचायतों को चमकाने के लिए वित्तीय वर्ष 2010-11 में कुल 40 करोड़ की धनराशि भेजी गई थी। यह धनराशि ग्राम निधि के खातों में भेजी गई थी। ग्राम पंचायतों में गांव के विकास के लिए कई प्रकार के खाते भी खोले गए हैं। ग्राम शिक्षा निधि में सिर्फ प्राथमिक, उच्च प्राथमिक विद्यालयों की छात्रवृत्ति, ड्रेस, एमडीएम की धनराशि प्रेषित की जाती है। ग्राम निधि के खाते में गांव के विकास की धनराशि भेजी जाती है। यह खाते ग्राम पंचायत सचिव और प्रधान के साथ ही हेडमास्टरों के संयुक्त हस्ताक्षर से संचालित होते हैं। शासन का निर्देश है कि ग्राम पंचायतों से धनराशि खर्च करने के बाद उसके बाउचर के साथ प्रिया साफ्ट में फीडिंग कराई जाए। इस वेबसाइट में खर्च का पूरा ब्योरा भी लिखा जाए। शासन ने यह भी कहा है कि जिन ग्राम पंचायतों ने फीडिंग नहीं कराई तो यह मान लिया जाएगा कि संबंधित ग्राम पंचायतों ने सरकारी धन का दुरूपयोग किया है। इसका दोषी पाए जाने पर प्रधान एवं सचिव के खिलाफ एफआईआर के साथ ही ग्राम पंचायत का खाता सीज करने के आदेश दिए जाएंगे। शासन का आदेश आते ही डीपीआरओ ने पिछले महीने सभी एडीओ पंचायतों की बैठक बुलाकर निर्देश दिया कि वित्तीय वर्ष 2010-11 में खर्च की गई धनराशि का पूरा विवरण प्रिया साफ्ट में फीड कराया जाए। अगर लापरवाही हुई तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। देखा जाए तो कड़ाई के बाद भी 1050 ग्राम पंचायतों में मात्र 423 ने ही प्रिया साफ्ट में फीडिंग कराई है। इसको गंभीरता से लेते हुए अब तक 11 एडीओ पंचायत और 27 सचिवों के खिलाफ वार्षिक वेतन वृद्धि पर रोक लगा दी गई है। इसकी जानकारी देते हुए डीपीआरओ आरपी मिश्रा ने बताया कि अभी भी 623 ग्राम पंचायतों ने 36 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं दिया है। इनके सचिवों को 30 जून तक का मौका दिया गया है। इसके बाद संबंधित गांवों का खाता सीज करने के साथ ही सचिवों एवं प्रधानों के खिलाफ एफआईआर भी कराई जाएगी। डीपीआरओ की इस कार्रवाई से सचिवों में हड़कंप मचा हुआ है।
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