ऊसर भूमि में भी लहलहाएगी धान की फसल

Ghazipur Updated Thu, 07 Jun 2012 12:00 PM IST
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गाजीपुर। कृषि विज्ञान केंद्र पीजी कालेज के वैज्ञानिकों ने ऊसर क्षेत्र में भी धान का अधिक उत्पादन करने वाले बीजों को खोज निकाला है। वैज्ञानिकों का दावा है कि ऊसर क्षेत्र के लिए धान एक और धान दो की रोपाई करने से रिकार्ड तोड़ उत्पादन होगा। इसके लिए केेंद्र के वैज्ञानिकोें से किसानों को सुझाव लेना होगा।
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कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. आरपी सिंह ने बताया कि किसानों को सुझाव दिया है कि बीजों की नवीन तकनीकी अपनाकर दोहरा लाभ कमाया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि ऊसर क्षेत्र में भी किसान अधिक उत्पादन पा सकते हैं। इसके लिए किसानों को धान एक और धान दो के बीजों की नर्सरी लगाना पड़ेगा। खरीफ का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को कुछ बीजों के नाम सुझाए गए हैं। धान की नर्सरी में भी विभिन्न प्रकार के रोग लग रहे हैं। जिस पर किसानों को ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि धान की पैदावार बढ़ाने के लिए नरेंद्र धान 97, नरेंद्र धान 80, मध्य प्रजातियों में नरेंद्र धान 359, सरजू52, नवीन धान बीपी 5204, स्वर्णा प्रमुख हैं। जल प्लावित क्षेत्र के लिए जल लहरी, जल प्रिया और जल प्रहरी प्रमुख है। उन्होंने अरहर की खेती ऊसर भूमि में करने के लिए नरेंद्र अरहर दो, मालवीय अरहर 13 को बुआई करने का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि उक्त अरहर के बीजों को बोने से किसानोें को अधिक लाभ मिल सकता है। उन्होंने बताया कि किसानों के लिए कृषि विज्ञान केंद्र में अरहर की फसलों में लगने वाले उकठा एवं फली छेदक जैसे रोगों को सहने वाले सहनशील प्रजाति के बीज भी उपलब्ध हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि इस बीज का प्रयोग करने से किसानों को स्वास्थ्य के साथ ही धन का भी लाभ होगा।
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