क्षेत्र पंचायत की बैठक का प्रधानों ने किया बहिष्कार

Ghazipur Updated Sat, 19 May 2012 12:00 PM IST
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गाजीपुर। क्षेत्र पंचायत मरदह की बैठक में शुक्रवार को बीडीसी सदस्यों द्वारा पदेन सदस्य कहे जाने पर भड़के प्रधानों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। प्रधानों के बहिष्कार करने के बाद भी बैठक सुचारू से रूप से चलती रही। सदस्यों ने चार करोड़ से अधिक की धनराशि से ब्लाक का विकास करने का प्रस्ताव पास किया।
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शुक्रवार को ब्लाक प्रमुख विजय सिंह यादव की अध्यक्षता में सुबह 11 बजे से क्षेत्र पंचायत के हाल में बीडीसी सदस्य एवं प्रधानों की बैठक आयोजित की गई। लगभग एक घंटे तक बैठक सुचारू रूप से चलती रही। किसी बात को लेकर प्रधानों एवं क्षेत्र पंचायत सदस्यों में नोकझोंक शुरू हो गई। क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने कहा कि सदन में ग्राम प्रधान पदेन सदस्य होता है। वह सिर्फ समस्याओं के विषय में सदन को अवगत करा सकता है। उसके सुझाव पर सदन फैसला लेने के लिए बाध्य नहीं है। तभी किसी बीडीसी सदस्य ने कहा कि अधिकांश प्रधानों के प्रतिनिधि बैठक में आए हुए हैं। प्रधानों का आरोप था कि इस पर प्रमुख ने कहा कि बैठक में प्रधानों के प्रतिनिधि भाग नहीं ले सकते हैं। पंचायती राज अधिनियम में स्पष्ट लिखा हुआ है कि क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायतों की बैठक में सिर्फ प्रधान एवं क्षेत्र पंचायत शामिल होंगे। किसी भी सूरत में प्रतिनिधि बैठक में शामिल नहीं हो सकते हैं। इस पर कुछ प्रधानों ने कहा कि हम लोगों को बैठक में भाग लेने की इजाजत दी जाए। जब प्रधानों के हस्ताक्षर करने की बारी आई तो प्रमुख ने साफ कहा कि प्रधानों के प्रतिनिधि कार्रवाई रजिस्टर पर हस्ताक्षर नहीं कर सकते हैं। इतना कहते ही सभी प्रधान भड़क गए और बैठक का बहिष्कार कर दिया। प्रधानों के जाने के बाद भी बैठक सुचारू रूप से चलती रही। बैठक में कृषि, लोक निर्माण और सिंचाई के अधिकारी नहीं आए। इन अधिकारियों के नहीं आने पर खेद सदस्यों ने खेद जताया। ब्लाक प्रमुख विजय सिंह यादव ने बैठक में मौजूद पुशपालन, स्वास्थ्य, कृषि विभाग, पंचायती राज, शिक्षा सहित सभी विभागों के प्रतिनिधि अधिकारियों से साफ कहा कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए। अगर शिकायत मिली तो संबंधित विभाग के खिलाफ शासन को पत्र लिखा जाएगा। उन्होंने जलनिगम के अभियंता से हैंडपंपों के विषय में जानकारी मांगी तो अभियंता ने बताया कि अभी तक शासन से हैंडपंपों की स्वीकृति नहीं प्रदान की गई है। खरीफ की तैयारियों के संबंध में भी प्रमुख ने जानकारी प्राप्त की। कहा कि किसी भी सूरत में बीज में गड़बड़ी नहीं मिलनी चाहिए। बैठक की जानकारी देते हुए प्रमुख ने बताया कि मनरेगा योजना की पुरानी परियोजनाओें के लिए दो करोड़ 59 लाख रुपये की धनराशि की डिमांड की गई है। इसके साथ ही नई परियोजनाओं के लिए दो करोड़ की मांग की गई है।
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