मानवता ही हमारी संस्कृति की पहचान

Varanasi Bureauवाराणसी ब्यूरो Updated Mon, 26 Nov 2018 10:43 PM IST
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मुहम्मदाबाद(गाजीपुर)। लौवाडीह स्थित मंदिर परिसर में आयोजित संगीतमय रामकथा के पांचवें दिन व्याख्यान वाचस्पति यमुना प्रसाद ओझा ने कहा कि मानव संस्कृति ही भारतीय संस्कृति है। मानवता ही हमारी संस्कृति की पहचान है। वसुधैव कुटुंबकम की भावना हमारी संस्कृति की आत्मा है। हमारी संस्कृति यह सीख देती है कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। दुखियों की सहायता करना माता पिता की सेवा करना बड़ों का आदर करना ही धर्मार्थ है। और यह सब संस्कार और भावनाएं रामकथा के श्रवण से आती है।
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उन्होंने कहा कि राम का चरित्र सबके लिए अनुकरणीय है। मनुष्य को अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है और वह जन्म-जन्मांतर के बंधन से मुक्त नहीं हो पाता। इससे पहले सरजू राय मेमोरियल डिग्री कॉलेज के निदेशक हिमांशु राय ने व्यास पूजन और आरती कर कथा का शुभारंभ कराया। इस अवसर पर जनकदेव राय, हिमांशु राय, रामचंद्र राय, संतोष राय, बच्चन, रिंकू राय, पारसनाथ पांडेय, बच्चन पांडेय, विजयशंकर पांडेय, अंकित राय, रोहित गोयल, योगेश राय, आयूष राय, दाता यादव, सोनू राय, संजू राय, बबुआ राय, आशुतोष राय, विशाल राय, विकास राय आदि उपस्थित थे।
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