कंकड़ पत्‍थर पर दौड़ कैसे बनें बोल्ट

Ghaziabad Updated Thu, 06 Dec 2012 05:30 AM IST

गाजियाबाद। कौन नहीं चाहता कि उसैन बोल्ट जैसे एथलीट भारत में भी पैदा हों मगर कैसे। दिल्ली से सटे गाजियाबाद महानगर की हालत तो देखो! 35 लाख आबादी का जिला, 16 लाख की जनसंख्या का शहर और दौड़ने के लिए एक एथलेटिक्स ट्रैक नसीब नहीं। यहां सेंथेटिक ट्रैक आैर ग्रासी ट्रैक तो छोड़ें सादे ट्रैक से भी मिट्टी गायब है। बचे हैं तो कंकड पत्‍थर। यह हालत तब है, जब पूरे राज्य में गाजियाबाद सबसे से ज्यादा राजस्व सरकार को देता है। जैसे-तैसे एक सांसद ने अपनी विकास निधि से ट्रैक बनवाने के लिए दरियादिली दिखाई भी थी। ढाई लाख रुपये भी दिए थे मगर अफसरों ने उस पैसे का पता नहीं क्या किया। सफाई तो ये दी जाती है कि हवा से ट्रैक की मिट्टी उड़ गया। प्रैक्टिस के लिए सेंथेटिक और ग्रासी दोनों ट्रैक की जरूरत होती है पर गाजियाबाद में सेंथेटिक ट्रैक तो छोड़िए ढंग का ग्रासी ट्रैक भी नहीं है। महामाया स्टेडियम में एथलेटिक्स ट्रैक के नाम पर पगडंडी ही बची है। स्टेडियम में एथलेटिक्स के दो-दो एक्सपर्ट हैं पर ट्रैक की खामी एथलीटों के प्रदर्शन को प्रभावित करने के लिए काफी है।



गाजियाबाद में एक एथलेटिक्स कोच कोच रमेश पाल हैं और दूसरा मैं खुद। प्रशिक्षण में कोई कमी नहीं की जा रही है। 50 से अधिक एथलीट प्रैक्टिस को आते हैं। ट्रैक का मामला बहुत पहले का है। यहां आने के बाद से ही खेलों का स्तर उठाने की कोशिश में जुटा हूं। एथलेटिक्स सेंथेटिक ट्रैक बनाने का प्रस्ताव भी खेल निदेशालय को भिजवाया जा रहा है।
- एसपी बमनिया, जिला क्रीड़ा अधिकारी

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