होगी हर मुश्किल आसान, मिलेंगे सस्ते मकान

Ghaziabad Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
गाजियाबाद। प्रदेश भर में सस्ते मकानों की गंगा गाजियाबाद से निकलेगी। जीडीए ने प्रदेश में सस्ते मकानों की योजना को अमली जामा पहनाने के लिए शासन को अफोर्डेबल हाउसिंग पालिसी-2010 में कई संशोधनों का सुझाव भेजा है। शासन की मुहर लगते ही सस्ते मकान उपलब्ध हो सकेंगे।
प्रदेश भर में सस्ते मकानों की खासी आवश्यकता महसूस की जा रही है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी विकास प्राधिकरणों को सस्ते मकानों की योजना लागू करने की सलाह दी थी। जीडीए की टीम ने देश के अन्य राज्यों में लागू अर्फोडेबल पॉलिसी, पैटर्न और नीति का गहन अध्ययन किया। इसके बाद अफोर्डेबल हाउसिंग नीति में परिवर्तन का मसौदा बना। जीडीए उपाध्यक्ष संतोष कुमार यादव ने बताया कि उचित कीमत पर रिहाइश उपलब्ध कराने के लिए अफोर्डेबल हाउसिंग पालिसी में जरूरी संशोधनों का मसौदा शासन को भेजा गया है। मकानों की कीमतें कम से कम रहें, इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है। एक कमरे के मकान की कीमत पांच और दो कमरे के मकान की कीमत दस लाख रुपये के अंदर रखने की कोशिश है।

इसलिए पड़ी जरूरत ः प्रदेश सरकार ने 2010 में आर्थिक रूप से कमजोर व कम आय वालों के लिए सस्ते मकान बनाने की नीति लागू की थी। इसके अंतर्गत विकास प्राधिकरणों और टाउनशिप बसाने वाले निजी बिल्डरों को निर्धारित अनुपात में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी मकान बनाने थे। इन मकानों की कीमतों को योजना के अन्य भवनों पर क्रास सब्सिडाइज किया जाना था। पॉलिसी के अंतर्गत विकास प्राधिकरणों को मिले लक्ष्य में सिर्फ कुछ हजार मकान ही बन सके। निजी बिल्डरों के एलआईजी मकानों की कीमतें एचआईजी के बराबर रहीं। गाजियाबाद में ही वर्तमान मांग 1.5 लाख की तुलना में महज पांच से छह हजार मकान ही बनाए जा सके हैं।




गाजियाबाद में सालाना 20 हजार मकानों का लक्ष्य
जीडीए ने शहर में प्रतिवर्ष 20 हजार सस्ते मकान बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। सस्ते मकानों के विकल्प से जीडीए अवैध निर्माणों पर अंकुश लगाएगा।
ईडब्ल्यूएस का बेहतर विकल्प
सस्ते मकानों के रूप में लोगों के पास ईडब्ल्यूएस भवनों का ही विकल्प उपलब्ध है। ईडब्लूएस मकान लेने के लिए आय समेत कई शर्तों को पूरा करना पड़ता है। अफोर्डेबल हाउसिंग के मकान आधुनिक शैली और बेहतर तरीके से डिजाइन किए होंगे। इनमें आवेदन के लिए कोई बंधन नहीं होगा।


सस्ते मकान बनाने के लिए जीडीए के सुझाव
d बिल्डर चिन्हित करेंगे जमीन, जीडीए बाह्य विकास। इंटरनल डेवलेपमेंट पर बिल्डर द्वारा खर्च राशि अवस्थापना से होगी वापस।
d कृषि योग्य जमीन पर बनाया जा सके प्रोजेक्ट। लैंडयूज चेंज के लिए विकास प्राधिकरण नहीं लें शुल्क। लैंडयूज चेंज प्रक्रिया भी बने सरल।
d मकानों की कीमतें कम रखने के लिए बिल्डरों को सभी तरह के टैक्स से मिले छूट। केंद्र सरकार से भी केंद्रीय करों में छूट की मांग।
d बिल्डरों के लाभ को ध्यान रखते हुए कमेटी तय करेगी कीमत
d बेहतर कनेक्टिविटी सुविधा के साथ बनाए जाएंगे प्रोजेक्ट
d बैंक-निजी वित्तीय संस्थाएं बिना गारंटी के मकानों के लिए देंगी कर्ज

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