अब जेल योग!

Ghaziabad Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
गाजियाबाद। यूपी की मुख्य सचिव, आईएएस एसोएिसएशन की अध्यक्ष, स्टेट रेवेन्यू बोर्ड नोएडा अथॉरिटी की चेयरमैन जैसे अहम पदों पर रह चुकी नीरा यादव रिटायरमेंट के बाद सियासत का सपना भी देखा करती थी। मगर राजयोग के बजाय लगता है उनका जेल योग शुरू हो गया है। भ्‍ाले ही नीरा को कोर्ट से अंतरिम जमानत मिली है, मगर नियमित जमानत उन्‍हें हाईकोर्ट से लेनी होगी।
नीरा के पति महेंद्र यादव आईपीएस थे और पुलिस सेवा से अवकाश ग्रहण करने के बाद राजनीति में चमक रहे थे। विधायक बनने के बाद भाजपा-बसपा गठबंधन सरकार में वह राज्य के माध्यमिक शिक्षा मंत्री बने थे। देखा-देखी नीरा भी सियासी ट्रैक पर दौड़ लगाने की तैयारी में लगी थी मगर घोटालों में गर्दन ऐसी फंसी कि राजनीति का ख्वाब सिर्फ ख्वाब ही बनकर रह गया। नीरा को पिछले साल फ्लैक्स जमीन घोटाले में सजा हुई थी और उसे जेल जाना पड़ा था। हाईकोर्ट से जमानत मिली तो अब प्लाट आवंटन मामले में भी मुजरिम साबित हो गई है। नीरा के नाम बदनामियों के और भी कई दाग हैं। मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में प्रदेश की मुख्य सचिव रह चुकी नीरा देश की पहली ऐसी आईएएस अफसर रही है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में भ्रष्टाचार के आरोपों चलते चीफ सेक्रेटरी पद से हटाया था। 1997 के आईएएस एसोसिएशन के चुनाव में नीरा को सबसे भ्रष्ट आईएएस अफसर भी माना गया था। बावजूद नीरा के रसूख में कोई कमी नहीं आई और एक से एक अच्छी पोस्टिंग मिलती रही। नीरा का गाजियाबाद से गहरा ताल्लुक रहा है। पिता सागर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर थे। तीन बहनों में सबसे बड़ी नीरा ने शुरूआती पढ़ाई यहां के सरस्वती शिशु मंदिर में की। नीरा के रिश्ते के भाई राजस्थान कैडर के आईएएस रहे हैं। उनकी ससुराल में एक पीसीएस अफसर भी हैं, जिनकी पोस्टिंग भी गाजियाबाद में रह चुकी है। लोकसभा चुनाव में नीरा भाजपा में शामिल हुई थी। सूत्र बताते हैं कि नीरा की निगाह उस समय त्यागी बहुल मुरादनगर विस क्षेत्र पर थी। पिछले साल नीरा को नोएडा जमीन घोटाले में चार साल की सजा सुना दी। नीरा को जेल जाना पड़ा। बाद में हाईकोर्ट से जमानत तो मिल गई मगर सियासी करियर पर ब्रेक लग गया।


मैडम पर फिर भारी पड़ा मंगल
पूर्व मुख्य सचिव नीरा यादव का ‘मंगल’ खराब रहा है। खास बात है कि सीबीआई की विशेष अदालत ने दोनों फैसले मंगलवार को सुनाए हैं। सात दिसंबर 2010 को भी मंगलवार था, जिस दिन फ्लैक्स मामले पर फैसला आया। दूसरा फैसला 20 नवंबर 2012 को मंगलवार के दिन ही आया।



आवंटित भूखंडों पर नहीं पड़ेगा असर
नीरा के कार्यकाल में आवंटित भूखंडों पर असर नहीं पड़ेगा। प्राधिकरण के अधिकारियों ने नाम नहीं लिखने की शर्त पर बताया कि दरअसल, काफी संख्या में प्लॉटों की खरीद फरोख्त हो चुकी है। इनमें नियमानुसार कार्रवाई हुई है। वहीं, उन प्लॉट का रास्ता साफ हो जाएगा जो अभी तक खाली पड़े हैं, जो प्राधिकरण के कब्जे में है। इसमें सेक्टर 11 और 51 के एक-एक प्लाट हैं।



कभी नीरा यादव पर नाज करती थी पश्चिमी यूपी की जमीन, घोटालों ने तोड़ा यकीन

चेहरे का रंग उड़ा
विशेष न्यायाधीश एस. लाल जब सजा सुना रहे थे, तब कोर्ट में नीरा यादव के चेहरे का रंग फीका होता जा रहा था। नीरा के साथ ही खडे़ उनके पति महेंद्र यादव ने उन्हें संभाला। आईएएस राजीव कुमार का चेहरा भी सजा सुनते ही
लटक गया।


नोएडा में पूरे कार्यकाल विवादों में रहीं आईएएस
नोएडा। भूमि आवंटन मामले में नीरा और राजीव कुमार को सजा के बाद नोएडा प्राधिकरण के पुराने अधिकारियों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं। नोएडा में अपने पूरे कार्यकाल में नीरा विवादित रहीं थीं। नीरा यादव नोएडा प्राधिकरण में 10 जनवरी 1994 से लेकर आठ नवंबर 1995 तक अध्यक्ष के रूप में तैनात रहीं। इस दौरान एक महीने बाद से ही विवाद होने शुरू हो गए। सबसे पहले प्राधिकरण के अंदर ही लेनदेन की शुरुआत हुई। उन पर नौकरशाहों, उद्योगपतियों और अपने नजदीकी लोगों को गलत तरीके से प्लॉट आवंटित करने के भी आरोप लगे।



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