सिक्के ने दिखाई विरासत सजोने की राह

Ghaziabad Updated Tue, 30 Oct 2012 12:00 PM IST
मोदीनगर। बचपन में कूड़े के ढेर में पड़ा पुराना सिक्का हाथ क्या लगा खंजरपुर निवासी इतिहास शिक्षक प्रेम चौधरी के अंदर सिक्कों को सहेजने का जुनून सवार हो गया। आज उनके पास सैकड़ों वर्ष पुराने मुगलकालीन सिक्कों के साथ दस देशों के करीब 200 सिक्के हैं। इसके अलावा वर्तमान में बाजार में उपलब्ध विभिन्न स्मृति चिन्ह के सिक्कों की भी इनके पास अच्छी खासी संख्या है।
प्रेम चौधरी फरीदनगर कस्बा स्थित आदर्श जनता इंटर कॉलेज में इतिहास के अध्यापक हैं। प्रेम ने बताया कि बचपन में उन्हेें गांव में ही कूड़े के ढेर में एक पुराने जमाने का सिक्का पड़ा मिला। उसे देख कर उन्हें ऐसे सिक्कों में दिलचस्पी जगी और वे धीरे-धीरे ऐसे सिक्कों को सहेजने लगे। आज उनके संग्रह में 190 प्राचीन और दुर्लभ सिक्के हैं। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, कनाडा, भूटान, नीदरलैंड, पाकिस्तान आदि 10 देशों सहित मुगलकालीन, लोदी वंश के समय के सिक्के भी हैं। प्रेम के अनोखे खजाने में भारतीय इतिहास को सहेजे प्रतीक चिन्हों वाले सिक्के भी हैं।

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