4 माह में 6 जवान लील गईं सड़कें

Ghaziabad Updated Mon, 29 Oct 2012 12:00 PM IST
मरने वालों में दो दरोगा और दो पीएसी के जवान, तेज रफ्तार वाहन बन रहे मौत का कारण
गाजियाबाद। पिछले चार माह में 6 जवान सड़क हादसों का शिकार हो चुके हैं। मारे गए जवानों में दो दरोगा और दो पीएसी जवान शामिल हैं। सड़क हादसों में दरोगा वीके उपाध्याय की मौत जनपद में पहला मामला नहीं है। तेज रफ्तार वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए गाजियाबाद पुलिस के पास दो इंटरसेप्टर वाहन हैं। बावजूद इसके सड़क पर ओवर स्पीड से दौड़ते वाहनों पर पुलिस का कोई कंट्रोल नहीं है। बच्चे तक इस ‘दौड़ती मौत’ से अछूते नहीं हैं। हाइवे से लेकर मोहल्ले की गलियाें तक में तेज रफ्तार वाहनों की दौड़ लगती है। मामले में कार नंबर यूपी 78 एएम 3714 के चालक पर रिपोर्ट दर्ज की है।
बोले अधिकारी
तेज रफ्तार से वाहन चलाने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा। ऐसे चालकों से न केवल मोटा जुर्माना वसूल किया जाएगा, बल्कि उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी।
- किरण यादव, एसपी ट्रैफिक

1978 में ज्वाइन की फोर्स
वीके उपाध्याय को 1 फरवरी 1978 को यूपी पुलिस में कांस्टेबल पद पर नियुक्ति मिली थी। मूल रूप से बापू नगर, शिकोहाबाद रोड, एटा निवासी विनोद कुमार उपाध्याय ने 1998 में विभाग की रैंकर परीक्षा पास की और दरोगा बन गए। बतौर आरक्षी पहली तैनाती आगरा जनपद में हुई थी। बाद में वह झांसी और मेनपुरी में तैनात रहे। मेनपुरी में तैनाती के दौरान ही वह दरोगा बन गए और सीतापुर ट्रेनिंग को गए। वहां से कानपुर और उसके बाद इटावा में तैनात रहे। 3 फरवरी 2008 को ट्रांसफर गाजियाबाद में हुआ।
एसएसआई की पत्नी भी थायराइड से पीड़ित
हादसे में एसएसआई विनोद कुमार उपाध्याय की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पत्नी अनीता भी थायराइड से पीड़ित हैं। उन्हें चलने-फिरने में दिक्कत है, वह बेड रेस्ट पर रहती हैं। विनोद उपाध्याय के बेटे विनीत, नवनीत और बेटी अर्चना शादीशुदा हैं। विनीत परिवार समेत रामप्रस्थ में ही पिता के साथ रहते हैं। निजी कंपनी में अफसर हैं। छोटा बेटा नवनीत गुड़गांव में ग्राफिक डिजाइनर है और वहीं रहता है। उधर, विनोद की मौत की खबर पाकर पिता बच्चन लाल और मां शकुंतला भी पहुचें।
बेहतर व्यवस्था के लिए हुए थे सम्मानित
कोतवाली एसओ प्रमोद कुमार गौतम ने बताया कि दशहरा मेले के मद्देनजर घंटाघर स्थित रामलीला मैदान में सुरक्षा-व्यवस्था का जिम्मा विनोद पर था। बेहतर सुरक्षा व्यवस्था के लिए शनिवार को सुल्लामल रामलीला कमेटी ने सम्मानित किया था। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देने के समय एसएसपी प्रशांत कुमार, एसपी सिटी शिवशंकर यादव, एसपी ट्रैफिक किरण यादव, आरएन यादव, प्रवीण रंजन सिंह आदि रहे।
हादसों में मारे गए जवान

पीएसी जवान जगदीश प्रसाद : 27 जुलाई 2012 को मोहननगर में एक्सीडेंट में मौत
सिपाही सत्यपाल सिंह : 13 सितंबर 2011 की हादसे में घायल होने पर मौत
दरोगा जगवीर सिंह : 21 सितंबर 2012 को मसूरी एक्सीडेंट में मौके पर मौत हुई
सिपाही तंजीम : 21 सितंबर 2012 को मसूरी एक्सीडेंट में घायल होने पर मौत हुई
पीएसी में एचसीपी प्रीतम सिंह : 21 सितंबर 2012 को मसूरी एक्सीडेंट में घायल, बाद में मौतदरोगा वीके उपाध्याय : 27/28 अक्तूबर (आधी रात) 2012 को हिंडन पुल के पास अज्ञात वाहन की टक्कर से मौत।

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