सात साल बाद साकार हुआ सपना

Ghaziabad Updated Thu, 18 Oct 2012 12:00 PM IST
नया बस अड्डा मेट्रो को ग्रीन सिग्नल
2005 में तत्कालीन सपा सरकार में जीडीए अधिकारियों ने इस रूट के मेट्रो विस्तार का खाका तैयार किया था। बसपा सरकार के कार्यकाल के दौरान 2010 में आनंद विहार से वैशाली मेट्रो की शुरुआत के बाद जीडीए ने प्रस्तावबदल दिया। इसमें अर्थला तक मेट्रो लाने की योजना बनी। इस वर्ष सपा के सत्ता में आने के बाद जीडीए अधिकारियों ने अर्थला मेट्रो से मकसद हल न होने की बात कही। अधिकारियों ने तर्क दिया कि अर्थला मेट्रो पकड़ने के लिए गाजियाबाद से जाने वाले यात्रियों के कारण हिंडन पर जाम की स्थिति और विकराल हो जाएगी। इसके बाद पुराने प्रस्ताव को ही आगे बढ़ाने का फैसला हुआ।

समय की जुबानी, मेट्रो की कहानी
- 2005 में इस मेट्रो रूट का प्रस्ताव तैयार किया गया
- डीपीआर के लिए जीडीए ने खर्च किए 80 लाख रुपये
- 2005 में प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत थी 936 करोड़ रुपये - वैशाली मेट्रो के चक्कर में इस कवायद पर ब्रेक लगा
- 2010 में जीडीए ने डीएमआरसी से अर्थला तक मेट्रो का रिवाइज इस्टीमेट मांगा
- डीएमआरसी ने दिया 1282 करोड़ का इस्टीमेट
- डीएमआरसी ने जीडीए को सुझाया फंडिंग पैटर्न, जीडीए का अंश 815 करोड़ रुपये हुआ निर्धारित
- जीडीए ने इस अंश में मांगी अन्य विभागों की सहभागिता, 50 फीसदी आवास विकास, नगर निगम और यूपीएसआईडीसी से लेने का बना प्रस्ताव
- नगर निगम, आवास विकास और यूपीएसआईडीसी ने अंशदान पर खड़े किए हाथ
- मेरठ मंडलायुक्त ने जीडीए के अंश में 50 फीसदी राज्य सरकार से लेने का बनाया प्रस्ताव। बाकी 50 फीसदी में 25 फीसदी जीडीए और बाकी 25 फीसदी में आवास विकास और यूपीएसआईडीसी की हिस्सेदारी तय
- शासन ने 50 फीसदी अंशदान पर नहीं किया कोई विचार। जीडीए के जरिए डीएमआरसी को भेजा ईक्विटी बनाने या लोन लेने का प्रस्ताव।
- डीएमआरसी ने जीडीए के फंडिंग पैटर्न से किया किनारा। जीडीए को सुझाया अन्य राज्यों की तर्ज पर मेट्रो लाने का विकल्प। विकल्पों का प्रेजेंटेशन देने की बात कही।
- एक विकल्प के रूप में वैशाली से अर्थला तक मेट्रो लाने का डीएमआरसी ने दिया सुझाव
- 30 दिसंबर को प्रेजेंटेशन की बजाय डीएमआरसी ने भेजा फैक्स। जीडीए को लोन लेने, राज्य सरकार से मदद मांगने या जापान से सहायता लेने के विकल्प सुझाया।
- विधानसभा चुनाव के कारण सारी कवायद पर लगा ब्रेक।
- नई सरकार के गठन के बाद 3 अप्रैल को हुई बैठक। मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने दी दिलशाद गार्डन से नया बस अड्डा तक विस्तार पर सैद्धांतिक सहमति।
- प्रोजेक्ट की लागत हुई 1591 करोड़। बढ़ी लागत के लिए नए सिरे से बना फंडिंग पैटर्न।
- जीडीए ने एमओयू के लिए रिजर्व किए 200 करोड़ रुपये।
- यूपीएसआईडीसी ने दिया खराब वित्तीय स्थिति का हवाला। अटकी मेट्रो की फाइल। शासन ने यूपीएसआईडीसी का अंशदान किया कम।
- 17 अक्तूबर को आखिरकार मिली कैबिनेट की मंजूरी।
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इन जगहों पर पहुंचने में लगने वाला समय

दिलशाद गार्डन-नया बस अड्डा मेट्रो से :

स्थान समय (मिनटों में)

कश्मीरी गेट 10-12
चांदनी चौक 20-25
कनॉट प्लेस 25-30
केंद्रीय सचिवालय 35-40
दिल्ली विश्वविद्यालय 35-40
करोलबाग 30-35
रोहिणी 60-65
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सात स्टेशनों के बीच की दूरी (किलोमीटर में)
दिलशाद गार्डन से शहीद नगर 1.29
शहीद नगर से राजबाग 1.25
राजबाग से राजेंद्र नगर 1.17
राजेंद्र नगर से श्याम पार्क 1.18
श्याम पार्क से मोहन नगर 1.25
मोहन नगर से अर्थला .90
अर्थला से नया बस अड्डा 2.4
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चमक जाएगा रूट, लगेंगे नए उद्योग
सेकेंड फेज मेट्रो विस्तार के साथ ही रूट के इलाकों का कायाकल्प शुरू हो जाएगा। परंपरागत औद्योगिक इकाइयों की जगह मॉल्स और मल्टीप्लेक्स की श्रंखला खड़ी होगी। देशी-विदेशी फूड ज्वाइंट्स, आउट्लेट्स, बड़े-बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट से शहर का करीब 10 से 12 किलोमीटर का हिस्सा चमक जाएगा। जीडीए ने मेट्रो रूट के एलाइनमेंट में पड़ने वाले क्षेत्रों के लिए रिडवलेपमेंट योजना तैयार कर ली है। इसके अंतर्गत मेट्रो रूट के इलाकों को नया विकसित क्षेत्र माना जाएगा। इससे स्थानीय नागरिकों को उनकी जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने की सहूलियत मिलेगी। जीडीए को भी भू-उपयोग परिवर्तन, एक्सट्रा परचेजेबल एफएआर, अतिरिक्त विकास शुल्क के रूप में आय होगी। हिंडन किनारे से लेकर दिलशाद गार्डन तक जीटी रोड के किनारे कई औद्योगिक इकाइयां या तो बीमार हैं या फिर घाटे में चल रही हैं। इन इकाइयों का लैंड यूज चेंज होगा। इन पर मॉल्स-मल्टीप्लेक्स बनेंगे। कई इकाइयों की जमीन पर ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट भी खड़े होंगे। मेट्रो के जरिए दिल्ली, एनसीआर आवागमन सहज होने से व्यवसायिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी। अनुमान के मुताबिक इस रूट पर करीब दो दर्जन मॉल्स, इतने ही मल्टीप्लेक्स, बड़ी कंपनियों के शोरूम आदि प्रोजेक्ट होंगे। इस रूट पर प्रस्तावित मेट्रो के सातों स्टेशन पर बड़े-बड़े फूड प्लाजा खुलने की संभावना है।
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यात्रियों को होगी सहूलियत
दिलशाद गार्डन से नया बस अड्डा तक मेट्रो दौड़ने से रोजाना करीब दो लाख यात्रियों को सहूलियत मिलेगी। मेट्रो रूट की डीपीआर के मुताबिक, 2011 में 1.37 लाख यात्रियों के सफर करने का अनुमान लगाया गया था। 2016 तक जब मेट्रो दौड़ेगी तो यह संख्या करीब दोगुनी हो जाएगी।
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अब खुलेंगे भावी मेट्रो के दरवाजे
सेकेेंड फेज मेट्रो के बाद तीसरे चरण में सेक्टर-62 से इंदिरापुरम (अहिंसा खंड) तक और लोनी मेट्रो की बारी है। इंदिरापुरम और आसपास की कालोनियों से रोजाना हजारों लोग कामकाज के सिलसिले में नोएडा आवागमन करते हैं। यहां से बड़ी संख्या में छात्र भी नोएडा के संस्थानों में पढ़ने जाते हैं। वर्तमान में वैशाली मेट्रो के जरिए नोएडा जाने वाले लोगों को पहले यमुना बैंक जाना होता है। फिर वहां से दूसरी लाइन की मेट्रो लेनी पड़ती है। इंदिरापुरम मेट्रो शुरू होने से लोग सीधे नोएडा से कनेक्ट हो जाएंगे। मनोज विहार, रेल विहार, अहिंसाखंड, इंदिरापुरम, वैशाली, वसुंधरा आदि कालोनियों की बड़ी आबादी को सीधा फायदा मिलेगा। सेक्टर-62 टू इंदिरापुरम मेट्रो शुरू होने से लोग सीधे नोएडा पहुंच सकेंगे। एनएच-24 पर लगने वाले जाम से राहत मिलेगी। जीडीए डीएमआरसी से इस रूट की डीपीआर तैयार करवा रहा है।
लोनी मेट्रो : थर्ड फेज के अंतर्गत लोनी बॉर्डर पुलिस स्टेशन (जौहरी इंक्लेव) पर प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन लोगों की मेट्रो से दूरी घटा देगा। इस स्टेशन के बनने के बाद लोनी की कई कालोनियों के निवासियों को मेट्रो सेवा के लिए करीब तीन से पांच किलोमीटर की दूरी कम तय करनी पड़ेगी। फिलहाल लोनी के आसपास बसी कालोनियों के लोगों के लिए सीलमपुर और शहादरा सबसे करीबी स्टेशन हैं। लोनी से इनकी दूरी क्रमश: 10 किलोमीटर और आठ किलोमीटर है।
जौहरी एंक्लेव पर प्रस्तावित स्टेशन के तीन से आठ किलोमीटर के क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक कालोनियां बसी हैं। इनमें राजीव गार्डन, लक्ष्मी गार्डन, शांति नगर, बलराम नगर, खन्ना नगर, गुलाब वाटिका, जवाहर नगर, ट्रॉनिका सिटी, अशोक विहार आदि कालोनियों में हजारों की आबादी निवास करती है। जीडीए इस रूट के लिए धनराशि देने पर सहमति जता चुका है।

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