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राम-लखन को देख मुग्ध हो गई जनकपुरी

Ghaziabad Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
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सुल्लामल रामलीला कमेटी में मारीच सुबाहू वध और राम जानकी के प्रथम मिलन प्रसंग का मंचन
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गाजियाबाद। शहर में रविवार को रामलीला की धूम रही। कहीं विश्वामित्र की यज्ञ रक्षा तो कहीं श्री राम जानकी के प्रथम मिलन के प्रसंग का मंचन हुआ। छुट्टी का दिन होने की वजह से सभी रामलीलाओं में काफी भीड़ रही। रामलीला मंचन के साथ ही बड़ों और बच्चों ने मेले का भी
आनंद उठाया।
सुल्लामल रामलीला
श्री राम और लक्ष्मण दोनो भाई जनकपुरी में नगर-भ्रमण करने निकलते हैं। श्रीराम और लक्ष्मण जी के रूप को देखकर स्त्रियां मंत्रमुग्ध हो जाती हैं। सभी में कौतूहल होता है कि यह दिव्य पुरुष कौन हैं। श्री राम और लक्ष्मण पुष्प वाटिका में जाते हैं, वहां सीताजी अपनी सखियों के साथ पहले से मौजूद हैं। पुष्प वाटिका में सीता और रामजी एक दूसरे को देखते हैं और मुग्ध हो जाते हैं। रविवार को सुल्लामल रामलीला का मुख्य आकर्षण श्रीराम-जानकी का प्रथम मिलन रहा। मारीच- सुबाहु वध, अहिल्या का शिला बनना और श्रीराम द्वारा उनका उद्धार सभी के मंचन पर दर्शक मंत्रमुग्ध रह गए। इस मौके पर सुभाष चंद गुप्ता, अध्यक्ष अजय बंसल, महामंत्री मनोज गोयल, ज्ञान प्रकाश गोयल, सुबोध गुप्ता, अशोक गोयल, सौरभ जायसवाल, विनय सिंघल, सुंदरलाल, अनिल चौधरी मौजूद रहे।


50 साल से दिलशाद मियां के बनाए रावण का ही दहन
गाजियाबाद। पिछले 50 सालों से गाजियाबाद में गुलावठी के एक मुस्लिम परिवार के बनाए रावण के पुतले ही जल रहे हैं। दिलशाद मियां की चार पीढ़ियां इसी काम में लगी हैं। पुतले बनाने का काम इनके दादा छंगा ने शुरू किया था। उन्होंने बताया कि धार्मिक आस्था के लिए इनके दादा जी रामलीला से जुड़े थे। उसके बाद उनके पिता भी इस काम को करने लगे। अब वह और उनका बेटा भी पुतले बनाते हैं। उनके परिवार और इस काम में लगे जितने भी कारीगर हैं इस काम के लिए मना नहीं करते। दादा और पिता के बाद दिलशाद भी इसी काम में लग गए। वह पिछले 24 साल से सुल्लामल रामलीला के रावण, कुंभकरण और मेघनाद का पुतला बनाते थे। पिछले दो साल से कविनगर रामलीला का पुतला बना रहे हैं और पिछले दो साल से उनके भतीजे आदिल सुल्लामल रामलीला के पुतले बना रहे हैं। आम दिनों में दिलशाद लाइटिंग का काम करते हैं। इनका संयुक्त परिवार है। उन्होंने बताया कि करीब दस कारीगर इस काम को करते हैं जिसमें से ज्यादातर गुलावठी बुलंदशहर से आते हैं। पुतले बनाने का काम अब काफी महंगा हो गया है। कागज से लेकर, पेंट,बांस की लकड़ियां काफी महंगी हो गई है।
संजय नगर रामलीला
श्री आदर्श धार्मिक रामलीला कमेटी की ओर से रविवार को रावण दिग्विजय और श्री राम जन्म का मंचन हुआ। एक ओर रावण का अत्याचार बढ़ रहा है। दूसरी और अयोध्या में श्री राम के जन्म की बधाईयां गाई जा रही हैं। अयोध्या में श्री राम के जन्म पर नगरवासी नाच- गाकर कर खुशियां मना रहे हैं। इस मौके पर मुख्य रूप से कमेटी के अध्यक्ष रवींद्र सिंह राणा, प्रदीप चौधरी, राजेश कुमार शर्मा मुख्य रूप से मौजूद रहे।

कवि नगर रामलीला
श्री धार्मिक रामलीला समिति कविनगर में रविवार को ताड़का वध से लेकर श्री रामजानकी का प्रथम मिलन के प्रसंग का मंचन किया गया। ताड़का वध, मारीच- सुबाहु वध, विश्वामित्र की यज्ञ रक्षा और श्रीराम- सीता का पुष्प वाटिका मेें मिलन का वर्णन किया गया। जब श्री राम जी ताड़का का वध करते हैं, उसके बाद मारीच और सुबाहु युद्ध करने आ जाते हैं। श्रीराम एक ही बाण में इन दोनों राक्षसों का वध कर देते हैं। श्रीराम- जानकी जब पुष्प वाटिका में पहली बार मिलते हैं। सीता जी गौरी मंदिर मेें पूजा करने जाती हैं। वहां वह मां गौरी से प्रार्थना करती हैं कि श्रीराम जी ही उनके वर हों। सीता जी को गौरी का आशीर्वाद मिलता है और सीता जी प्रफुल्लित मन से घर जाती हैं। इस मौके पर अध्यक्ष रामकुमार तोमर, उपाध्यक्ष अजय जैन, सुनील निगम, दीपक अग्रवाल, भूपेंद्र चोपड़ा, विवेक तोमर, ललित जायसवाल, विनीत राय आदि मौजूद रहे।

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