रजिस्ट्री नहीं, डीड ऑफ अपार्टमेंट करें

Ghaziabad Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
यूपी अपार्टमेंट एक्ट ने दिया ग्राहकों को अधिकार
गाजियाबाद। फ्लैट खरीदते समय सेल डीड (रजिस्ट्री) की बजाय डीड ऑफ अपार्टमेंट करवाना फायदे का सौदा साबित होगा। यूपी अपार्टमेंट एक्ट ने फ्लैट खरीददारों के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इसके अंतर्गत बिल्डर और आवंटी के बीच बिक्री और इसके बाद के सभी अधिकार व दायित्वों का स्पष्ट लेखाजोखा होगा। डीड ऑफ अपार्टमेंट एक निर्धारित फार्मेट में होगी, जिससे बिल्डर छुपी शर्तें व शुल्क नहीं जोड़ पाएंगे।
आरडब्ल्यूए फेडरेशन के वाइस चेयरमैन आलोक कुमार ने बताया कि अभी तक सभी बिल्डर अपने-अपने मुताबिक एग्रीमेंट का दस्तावेज तैयार करवाते हैं। अधिकतर मामलों में यह दस्तावेज बिल्डरों के पक्ष में होता है। कई मामलों में विवाद की स्थिति में पता चला है कि सेल डीड में छुपे शब्दों में बिल्डरों ने शुल्क और शर्तें जोड़ ली हैं। लोगों को एक फ्लैट पर 1.25 लाख रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक अधिक शुल्क देना पड़ जाता है। रजिस्ट्री की स्थिति आने तक चूंकि ग्राहक बिल्डर को 90 फीसदी तक का भुगतान कर चुके होते हैं, इसलिए वह इन शुल्कों और शर्तों का विरोध नहीं कर पाते।
सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट सुदीप्तो कुमार पॉल के मुताबिक डीड ऑफ अपार्टमेंट में सभी बातें क्लीयर होंगी। इसके फार्मेट में सभी शर्तें व शुल्क स्पष्ट होंगे। इसमें इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि छत और कॉमन एरिया के मालिक फ्लैट खरीददार हैं, ना कि बिल्डर। डीड ऑफ अपार्टमेंट से फ्लैट खरीददारों के साथ धोखा होने की संभावना कम हो जाती है।

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