14 लाख की क्रेन बनी शोपीस

Ghaziabad Updated Thu, 04 Oct 2012 12:00 PM IST
270 दिन में महज 42 किलोमीटर चली क्रेन
ट्रैफिक मैनेजमेंट को खरीदी थी, कबाड़ बन रही क्रेन
गाजियाबाद। एक तो बजट की कमी उस पर भी लापरवाही। अवस्थापना निधि से खरीदी 14 लाख की रेकर क्रेन अधिकारियों की लापरवाही के कारण गोदाम में खड़ी है। नगर निगम के यातायात विभाग द्वारा अनावश्यक रूप से क्रेन खरीदने के पीछे बड़ा ‘खेल’ उजागर हो रहा है। नगर आयुक्त ने चीफ इंजीनियर से क्रेन को गोदाम में खड़ा करने पर जवाब मांगा है।
नगर निगम यातायात विभाग ने ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए क्रेन की डिमांड की थी। तत्कालीन नगर आयुक्त और यातायात विभाग के अधिशासी अभियंता के आदेश पर एक निजी कंपनी ने 28 दिसंबर 2011 को क्रेन दे दी। क्रेन बेतरतीब और नो पार्किंग जोन में खड़े वाहनों को हटाने के लिए खरीदी गई थी। हैरानी की बात है कि उस समय से ही क्रेन नगर निगम के नेहरूनगर गोदाम में खड़ी धूल फांक रही है। तकरीबन 14 लाख की क्रेन का मीटर बता रहा है कि अब तक यह केवल 42 किलोमीटर ही चली है।
नगर आयुक्त जितेंद्र सिंह को भी क्रेन खरीदे जाने की जानकारी नहीं थी। मामला उठा तो अब नगर आयुक्त ने निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर से क्रेन खरीदने की पुष्टि की। नगर आयुक्त जितेंद्र सिंह का कहना है कि चीफ इंजीनियर का जवाब मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। क्रेन चालू कराई जाएगी।
तीन दिन में हो गया पेमेंट
निर्माण विभाग और जलकल विभाग के ठेकेदारों को जहां कई साल तक भुगतान नहीं होता, वहीं क्रेन का पेमेंट महज तीन दिन में हो गया था। 28 दिसंबर को हैंडओवर होने के बाद तीन जनवरी को क्रेन के पेमेंट का भुगतान कर दिया।


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