किसने ‘मैली’ की गंगनहर

Ghaziabad Updated Sun, 30 Sep 2012 12:00 PM IST
गाजियाबाद। दिल्ली, ट्रांस हिंडन और नोएडा को अमृत सा जल दे रही गंगनहर में पिछले दिनों भयानक जहर घोलने की कोशिश हुई थी। निवाड़ी में फेंका गया केमिकल जांच में बेहद घातक पाया गया है। खतरनाक इतना कि यदि पूरा केमिकल गंग नहर में में मिल जाता तो उसे पीकर एक साथ लाखों लोग बीमार हो सकते थे। इस संबंध में एनडीआरएफ और डीआरडीओ की रिपोर्ट सामने आने से प्रशासन में खलबली मच गई है। सुरक्षा एजेंसियां इस घटना के पीछे साजिश की आशंका से भी इंकार नहीं कर रही हैं। फिलहाल मामले की जांच एसएसपी स्तर पर जारी है।
गंगनहर से हर रोज दिल्ली को 470 क्यूसेक, ट्रांस हिंडन को 30 क्यूसेक और नोएडा को 20 क्यूसेक गंगा वाटर की सप्लाई होती है। एक दिन भी गंगाजल आपूर्ति में बाधा होती है तो पूरा दिल्ली-एनसीआर कराह उठता है। 2 जुलाई को निवाड़ी इलाके में गंगनहर किनारे केमिकल से भरे 15 कंटेनर बरामद हुए हुए थे। अफसरों के मुताबिक, कंटनेर्स पर सोडियम बाई कार्बोनेट लिखा था और उनके संपर्क में आने से कई लोग बीमार भी हो गए थे। इलाके में दहशत फैली तो प्रशासन ने मुख्यालय से नेशनल डिजास्टर रेस्क्यू फोर्स (एनडीआरएफ) के विशेषज्ञों को मौके पर भेजा था।
एनडीआरएफ कमांडेंट जेपी यादव ने बताया कि तीस सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने नहर किनारे मिले केमिकल और पाउडर के नमूने जुटाने के बाद सभी कंटेनर जमीन में दबा दिए थे। केमिकल नमूनों की जांच एनडीआरएफ टीम ने की और फिर उन्हें परीक्षण केलिए डिफेंस रिसर्च डवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) ग्वालियर भी भिजवाया था। परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद खुलासा हुआ है कि नहर किनारे फेंके गए कंटनेर्स में बैंजाइल एल्कोहल, एल्मोनियम क्लोराइड, विनाइल कार्बाजोल जैसे रसायन थे, जो मानव शरीर के लिए जानलेवा होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के खतरनाक केमिकल सीधे नर्बस सिस्टम, किडनी, फेफड़ा और त्वचा पर असर डालते हैं। ज्यादा मात्रा में शरीर में पहुंचने पर जानलेवा भी बन जाते हैं। चिंता की बात ये भी है कि ट्रीटमेंट प्लांट नहर में घुलकर आने की स्थिति में इस केमिकल को पानी से अलग नहीं कर पाते। क्योंकि प्लांट्स में विदेशों की तरह का सिस्टम ही नहीं है। अफसरों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में तमाम केमिकल फैक्ट्रियों को देखते हुए यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि किसी ने खराब रसायन वहां फिंकवा दिए हों। वैसे आमतौर पर फैक्ट्रियां इस तरह की लापरवाही नहीं करती हैं और खराब केमिकल सुरक्षित तरीके से जमीन में दबाती हैं। यह सोचकर सुरक्षा एजेंसियां साजिश की आशंका से पूरी तरह इंकार नहीं कर पा रही हैं।

जांच का सच
बेहद खतरनाक था गंग नहर के किनारे मिला केमिकल
गंगाजल में मिलते तो समूचा दिल्ली-एनसीआर तड़पता
मामले की तह में जाने की कोशिश कर रही हैं एजेंसियां


बीमार होते-होते बची एनडीआरएफ टीम
केमिकल को जमीन में डंप करने केलिए 30 सदस्यीय टीम मौकेपर गई थी। टीम ने केमिकल प्रूफ ड्रेस पहनकर पूरा केमिकल जमीन में दबाया। इस दौरान केमिकल टीम के शरीर पर मौजूद फुल प्रूफ ड्रेस के संपर्क में आ गया। केमिकल इतना खतरनाक था कि धुलाई के बाद भी ड्रेस को पहनने से एनडीआरएफ टीम के सदस्यों को संक्रमण होने लगा। इस वजह से सभी तीस सदस्यों की ड्रेस नष्ट करनी पड़ गईं।


डीएम बोलीं, मामला गंभीर
डीएम अपर्णा उपाध्याय ने कहा है कि प्रशासन ने मामले को बहुत गंभीरता से लिया है। केमिकल किसने गंगनहर किनारे फिंकवाया, ऐसा करने के पीछे क्या मकसद था, जांच एसएसपी स्तर से कराई जा रही है।

विशेषज्ञों की सुनिए
विशेषज्ञों का कहना है कि फैनोक्सी बैंजाइल एल्कोहल और एल्मोनियम क्लोराइड: केमिकल फैक्ट्रियों में पेंट, वार्निश, डिटरजेंट आदि बनाने में इस्तेमाल होते हैं। वहीं, पॉली एन विनाइल कार्बाजोल जीरोक्स मशीनों में प्रयोग होता है और इससे रेडियेशन का खतरा भी हो सकता है।

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