हमें भी चाहिए एक ‘सिंघम’!

Ghaziabad Updated Mon, 24 Sep 2012 12:00 PM IST
गाजियाबाद। शहर में गुंडाराज। पब्लिक न सड़क पर सुरक्षित है और न घर में। स्नेचिंग, लूट, हत्या आम बात है। शोहदों ने युवतियों और महिलाओं का सड़क पर चलना मुहाल कर रखा है। शाम का अंधेरा होते ही सड़कों पर ओपन बार शुरू हो जाता है। रईसजादों की कार शराब की बार बन जाती हैं। चेकिंग के नाम पर पुलिस बेरिकेडिंग जरूर करती है, मगर यह पूरी कार्रवाई सिर्फ ‘खानापूर्ति और उगाही का खेल’ बनकर रह जाती है। अपराध का ग्राफ लगातार चढ़ता जा रहा है। बदमाशों की नई-नई खेप जिले में वारदात करने लगी हैं। हाल ही में हुए मसूरी बवाल ने न केवल पुलिस सतर्कता की पोल खोल दी, बल्कि स्थानीय खुफिया विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिंह लगा दिया। शनिवार देर रात दुस्साहसी शराबी ने बस अड्डा चौकी के सामने ही एक बालक को दूध की कढ़ाही के फेंक दिया।
ऐसा कब तक चलेगा? शहर के लोग अब इसका जवाब चाहते हैं और मानते हैं कि इस गुंडाराज को काबू करने के लिए जिले में अब किसी सिफारिशी पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि बालीवुड फिल्मी हीरो की तर्ज पर ‘बाजीराव सिंघम’ जैसा कैरेक्टर चाहिए। एक ऐसा सिंघम, जो शहर में बढ़ रही गुंडों की फौज का दमन कर सके। बिगडै़ल रईसजादों को कानून का पाठ पढ़ा सके। शाम ढलते ही शहर की सड़कों पर खुलेआम चलने वाले ‘कार-ओ-बार’पर अंकुश लगा सके। ऐसा होगा तभी महानगर का चैन लौटेगा आैर लोग बेखौफ होकर आ-जा सकेंगे।

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