‘रेप की बात दबाने को कहा था’

Ghaziabad Updated Fri, 31 Aug 2012 12:00 PM IST
यूपी के रिटायर्ड सीओ ने दिया सीबीआई कोर्ट में बयान
गाजियाबाद। आरुषि-हेमराज मर्डर केस में बृहस्पतिवार को एक और मोड़ आ गया। सीबीआई विशेष न्यायाधीश एस. लाल की कोर्ट में गवाही देने पहुंचे यूपी पुलिस के रिटायर्ड सीओ केके गौतम ने कहा कि आरुषि की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को प्रभावित करने के लिए उनके डॉक्टर साथी सुशील चौधरी ने उन्हें सिफारिशी फोन किया था। बृहस्पतिवार को गवाह केके गौतम के बयान और जिरह पूरी हो गई। सीबीआई शुक्रवार को नया गवाह पेश करेगी।
सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक आरके सैनी और बीके सिंह के सवाल पर रिटायर्ड सीओ ने बताया कि डा. सुशील का नोएडा में ही आईकेयर नामक अस्पताल है। उन्होंने अपनी आंख का ऑपरेशन डा. सुशील से कराया था। तभी उनकी दोस्ती हुई थी। 16 मई 2008 को दोपहर करीब 12 बजे डा. सुशील चौधरी ने फोन करके कहा कि उनके दोस्त डा. दिनेश तलवार की भतीजी आरुषि का जलवायु विहार में मर्डर हो गया है। पोस्टमार्टम जल्दी कराने के लिए सुशील ने उनसे मदद मांगी थी। केके गौतम ने बताया कि डा. सुशील ने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेप होने की बात न आए। इस पर उन्होंने मदद करने से इंकार कर दिया था।
रिटायर्ड सीओ ने यह भी बताया कि 17 मई 2008 को वह अपने साथी डा. सुशील के कहने पर ही डा. तलवार के घर शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचा था। उस दिन नूपुर और राजेश आरुषि की अस्थियां लेकर हरिद्वार गए थे। मैं डा. दिनेश तलवार को पहली बार मिला था। इससे पहले मैं उन्हें नहीं जानता था। वहीं पर घटनास्थल देखा। आरुषि-हेमराज के कमरे को देखा। जीने पर लगे ताले और खून के निशान को देखते हुए उन्होंने ही नोएडा के तत्कालीन एसपी सिटी महेश मिश्रा को फोन करके इसकी जानकारी दी थी। पुलिस मौके पर पहुंची और जीने का ताला तोड़ा। छत पर हेमराज की लाश पड़ी थी। साथ ही मौजूद डा. दिनेश तलवार ने लाश को नहीं पहचाना था।
डिफेंस की ओर से एडवोकेट मनोज शिशौदिया और सत्यकेतु ने गवाह से जिरह की। मनोज शिशौदिया का कहना है कि गवाह केके गौतम ने दो बार सीबीआई को अपने बयान दर्ज कराए हैं। पहला बयान 1 जुलाई 2008 को और दूसरा बयान 16 अप्रैल 2010 को। पहले बयान में सीओ ने इस प्रकार की बात नहीं बताई थी।
बहुत कुछ बोलता है घटनास्थल
यूपी पुलिस से रिटायर्ड सीओ केके गौतम का कहना है कि पुलिस के जांच अधिकारी को प्रत्येक घटनास्थल की गहनता से जांच करनी चाहिए। वारदात को अंजाम देने वाला निश्चित रूप से कोई क्लू घटनास्थल पर छोड़ जाता है। आरुषि-हेमराज कांड में वह खुद भी उस समय हैरान रह गए, जब उस हेमराज की लाश राजेश तलवार के घर से बरामद हो गई, जिसकी तलाश में एक टीम को नेपाल भेजने की तैयारी चल रही थी।
a केके गौतम ने कहा आया था डा. सुशील का सिफारिशी फोन
a शुक्रवार को नया गवाह कोर्ट में पेश करेगी सीबीआई
कहा था, नहीं है जीने की चाबी
बयान दर्ज कराने के बाद केके गौतम ने मीडिया से बात की। उन्होंने बताया कि 17 मई 2008 को जब उन्होंने खून के धब्बे जीने की दीवार और उस पर लगे ताले पर देखे तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। जरा ही देर में तत्कालीन थाना प्रभारी दाताराम नानौरिया मौके पर पहुंचा। जब उससे पूछा गया कि जीने का ताला खोलकर क्यों नहीं देखा गया तो उसका कहना था कि उसने तलवार दंपति से इसकी चाबी मांगी थी, मगर उन्होंने चाबी न होने की बात कही थी। दरोगा के इस बयान पर गौतम को हैरानी हुई थी। इससे भी बड़ी हैरानी उस समय हुई, जब ऊपर छत से हेमराज की लाश बरामद हो गई। दो दिन तक लाश यहां पडे़ होने के कारण सड़ने लगी थी। आरुषि की लाश मिलने पर पुलिस पूरे मकान को छान चुकी थी, ऐसे में छत पर किसी का ध्यान न जाना बड़ी चूक की ओर इशारा करता है।

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