बुरे काम का बुरा नतीजा जेल जाएगा चाचा

Ghaziabad Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
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गाजियाबाद। कारोबार से लेकर राजनीति तक चमकते-चमकते शास्त्री नगर की कौशिक फैमिली में ऐसा तूफान आया कि सनकी चाचा ने नौजवान भतीजे के सीने में गोली उतार दी। जहां धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी, वहां सस्ती-महंगी कार के चक्कर में यह खूनी इबारत लिखी गई। भतीजे प्रशांत ने महंगी कार खरीदी थी और चाचा हरिमोहन ने थोड़ी सस्ती। इतनी सी बात पर गोलीकांड हो गया। परिवार में कोहराम मचा है। हत्यारोपी पूर्व पार्षद चाचा फरार है।
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पुलिस के मुताबिक, रजापुर गांव की रहने वाली कौशिक फैमिली में सुधीर कौशिक समेत चार भाई थे। बड़े भाई महेंद्र कौशिक की मृत्यु हो गई थी। सुधीर कौशिक पहले कांग्रेस में प्रदेश कोषाध्यक्ष थे और विधानसभा चुनाव में सपा से जुड़ गए थे। शास्त्रीनगर एसए-53 में आलीशान कोठी है। बेटे अनुराग और प्रशांत का परिवार यहां रहता है। अनुराग का मेरठ रोड पर ड्रिजलिंग लैंड है तो प्रशांत का कंस्ट्रक्शन का कारोबार। प्रशांत का चार साल का एक बेटा है और पत्नी गर्भवती है। सुधीर से छोटे सुरेंद्र जीडीए में एकाउंटेंट हैं। हत्यारोपी हरिमोहन उर्फ टिंकू सबसे छोटा है। वह रजापुर से पिछली बार सभासद चुना गया था। अब सपा से जुड़ा है। कविनगर एसओ सुधीर त्यागी ने बताया कि साझे की फर्म से हुए मुनाफे में प्रशांत ने करीब 28 लाख रुपये की हुंडई सेंटा फी कार खरीदी थी और हरिमोहन ने 18 लाख की हुंडई टेरेकन। वैसे तो इस संपन्न परिवार के लिए 10 लाख रुपये ज्यादा मायने नहीं रखते मगर चाचा-भतीजे में सस्ती-महंगी कार को लेकर कहासुनी हो गई। एसओ ने बताया कि छानबीन में पता चला है कि घटना के वक्त हरिमोहन ने प्रशांत से कहा कि वह उसे गोली मार देगा। प्रशांत बोला, मारकर दिखाओ। हरिमोहन ने फायरिंग कर दी। प्रशांत भाग जाता तो वह बच सकता था। हरिमोहन ने दो फायर किए, जिनसे प्रशांत बच गया। तीसरी गोली उसे लगी, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मौके से 5 खोखे और शराब की टूटी हुई बोतल बरामद की है। हत्यारोपी चाचा की तलाश जारी है।
प्रतिबंधित पिस्टल से चलाईं गोलियां
कविनगर एसओ ने बताया कि जिस पिस्टल से हरिमोहन ने गोलियां चलाई, वह 9 एमएम का है। पीएम रिपोर्ट में पुष्टि हो गई है। पुलिस अब जांच कर रही है कि 9 एमएम का प्रतिबंधित पिस्टल हरिमोहन के पास कहां से आया। अगर वह लाइसेंसी है तो उसका लाइसेंस कहां बना। दूसरी ओर प्रशांत के भाई अनुराग ने बताया कि हरिमोहन एक एक्स्ट्रा गैर लाइसेंसी हथियार लेकर चलता था। अनुराग ने एसपी सिटी से जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा मांगी है। एसपी सिटी ने उसे सुरक्षा का आश्वासन दिया है।
फरार चाचा ने दरोगा को धमकाया
पुलिस पूछताछ के लिए हरिमोहन के बेटों को सुबह चौकी लेकर आई थी। हरिमोहन को पता चला होगा तो उसने चौकी इंचार्ज इफ्तेखार कुरैशी को फोन कर कहा कि बेटों को छोड़ दे, नहीं तो अंजाम अच्छा नहीं होगा। तू मुझे जानता नहीं है। प्रशांत के हत्यारोपी चाचा की तलाश में दिल्ली, नोएडा, गुडगांव, फरीदाबाद और आदि जगहों पर पुलिस टीमें गई हैं। एसओ ने बताया कि जल्द ही आरोपी हरिमोहन सलाखों में होगा।
पहले भी जेल जा चुका हत्यारोपी
एसपी सिटी ने बताया कि हरिमोहन का क्रिमिनल बैकग्राउंड रहा है। जानकारी मिली है कि उसने पूर्व नगरायुक्त अजय शंकर पांडेय के आवास पर अभद्रता की थी और गिरफ्तार हुआ था। 1995 में देवेंद्र नामक व्यक्ति की हत्या का आरोप भी उस पर लगा था। कई मामले उसके खिलाफ रहे हैं, जिनकी जांच कराई जा रही है।

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