नितिन ने जताया था जान का खतरा

Ghaziabad Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
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पत्नी से कहा था, दुश्मन बढ़े। पुलिस बोली- सुनियोजित तरीके से किया मर्डर
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इंदिरापुरम। नितिन शर्मा सपनों को सच करने का हौसला लेकर ग्वालियर से एनसीआर आया था। नौकरी में हैसियत, नाम और पैसा सब कुछ मिला मगर बुलंदियों तक जाने वाली सीढ़ियों के बीच दुश्मन भी बनते गए। इन्हीं दुश्मनों में से कुछ ने उसकी हत्या करा दी।
ग्वालियर निवासी लोकेंद्र शर्मा का इकलौता बेटा नितिन बचपन से ही होनहार था। नितिन ने ग्वालियर में पढ़ाई करने के बाद दिल्ली से एमबीए किया। उसके बाद एक नामी कंपनी में बतौर सेल्स एग्जीक्यूटिव नौकरी की शुरुआत की। वर्ष 2000 में नितिन ने दिल्ली की शालिनी से लव मैरिज की। बेटी वंशिका और अंशिका के आंगन में आने के बाद दंपति का वैवाहिक जीवन खुशियों से परिपूर्ण था। इसी बीच 2004 में नितिन ने एरिया सेल्स मैनेजर के पद पर वुडलैंड ब्रांड के नाम से लेदर गुड्स बनाने वाले वाली कंपनी एरो क्लब ज्वाइन की। जल्द ही नितिन डीजीएम बन गए। पत्नी की मानें तो उन्हें खतरे का एहसास पहले ही हो गया था। हत्या के बाद शालिनी ने रिश्तेदारों को बताया कि वह अक्सर कहते थे कि उनके दुश्मन बहुत हैं। मगर यह नहीं पता था कि इस हद तक दुश्मनी हो गई है।
सीओ चतुर्थ राकेश कुमार पांडेय का कहना है कि पहला संदेह नितिन शर्मा के आफीशियल विवाद पर है। जिन लोगों को गड़बड़ी के आरोप में उन्होंने निकाला था। उनके नामों की सूची कंपनी प्रबंधन से ली गई है। उनसे पूछताछ की जाएगी। इसके साथ ही अन्य पहलुओं को भी लेकर जांच की जा रही है।

थप्पड़ का बदला तो नहीं लिया!
इंदिरापुरम। कहीं डीजीएम की जान गड़बड़ियां पकड़ने और दोषियों पर कार्रवाई के चलते तो नहीं गई! पुलिस अफसरों की मानें तो वुडलैंड के डीजीएम नितिन शर्मा नार्थ इंडिया के सभी रिटेल आउटलेट, स्टोर, मार्केटिंग, भर्तियां और ट्रांसफर-पोस्टिंग का काम देखते थे। सीओ चतुर्थ का कहना है कि डीजीएम ने पिछले दिनों दिल्ली के रोहिणी, गाजियाबाद के शिप्रा मॉल, ऑप्युलेंट मॉल स्थित शोरूम के अलावा वुडलैंड के कई अन्य शोरूम में धांधली पकड़ी थी। इसके चलते बीते दो माह के दौरान नितिन शर्मा ने कई कर्मचारियों को नौकरी से बाहर किया था। बताया गया है कि रोहिणी में अनियमितता के संबंध में पूछताछ करने के दौरान एक कर्मचारी ने उनसे दुर्व्यवहार किया था। गुस्से में आकर नितिन ने उसे थप्पड़ जड़ दिया था। सीओ चतुर्थ की मानें तो आशंका जताई जा रही है कि हत्याकांड का कारण कहीं न कहीं कर्मचारी को थप्पड़ मारने और उन्हें नौकरी से बाहर निकालने से ही जुड़ा है।

दोनों बेटियों को अफसर बनाना चाहता थे नितिन
शालिनी ने बताया कि पति नितिन शर्मा बेटी वंशिका और अंकिश को पढ़ा लिखाकर अफसर बनाना चाहते थे। उनका सपना था एक बेटी को आईएएस और दूसरी को आईपीएस बनाना। अत्याधुनिक जीवन की ऐसी कोई सुख सुविधा नहीं थी जो उन्होंने बच्चों को न दे रखी हो। दोनों बेटियों को शहर के नामी कैंब्रिज स्कूल में पढ़ाते थे।


पोस्टमार्टम के बाद शव ग्वालियर ले गए परिजन
सूचना पाकर दोपहर बाद परिजन ग्वालियर से यहां पहुंचे। पोस्टमार्टम के शव सुपुर्दगी में मिलने से बाद परिजन शव को ग्वालियर ले गए। वहीं शनिवार को उनका अंतिम संस्कार होगा।

सुपारी किलर्स ने की वारदात
सीओ चतुर्थ राकेश कुमार पांडेय का कहना है कि जिस तरह से वारदात हुई, गोलियां कमर से ऊपर ही मारी गई। उससे साफ है कि डीजीएम हत्याकांड को अंजाम देने वाले हत्यारे सुपारी किलर्स थे।

सूना रह गया रक्षाबंधन
लोकेंद्र शर्मा के एक बेटा नितिन था और एक बेटी है। बेटी ग्वालियर में ही रहती है। रक्षाबंधन करीब आने पर बहन ने प्यारे भैया के हाथ में राखी बांधने की तैयारी कर ली थी। उसके लिए राखियां तक खरीद ली थीं पर विधाता को शायद कुछ और ही मंजूर था। बहन से भाई सदा के लिए जुदा हो गया। शुक्रवार को बदमाशों ने उसकी हत्या कर दी।

बेटियाें ने मम्मी से पूछा, पापा कहां गए
नितिन शर्मा की हत्या के बाद सीओ चतुर्थ पांडेय दोनों बच्चियों अंशिका और वंशिका को स्कूल से ले आए। दोनों बच्चियां जैसे ही घर पहुंची। सीओ चतुर्थ से बोली, अंकल पापा की गाड़ी के पास ये खून के धब्बे और ईंटे क्यों लगी हैं। साथ ही उनकी गाड़ी को किसने तोड़ा। इसके बाद जैसे ही मां शालिनी शर्मा के पास पहुंची तो उनसे पूछने लगी मम्मी पापा कहां गए हैं। मासूम बेटियाें के लफ्ज सुनकर शालिनी फूट-फूटकर रोने लगी।

हत्यारों ने क्राॅसचेक किया!
शक्तिखंड-4 में हत्याकांड को अंजाम देने पहुंचे हमलावरों और डीजीएम के बीच दो मिनट बात हुई थी। चश्मदीदों के मानें तो दोनों हमलावर डीजीएम के घर पहुंचने से पहले ही उनका इंतजार कर रहे थे। जैसे ही वह गाड़ी से उतरे तो दोनों युवकों की उनसे कुछ बात हुई। नोकझोंक के बाद कहासुनी और गाली-गलौज भी हुई। उसके बाद ही हमलावरों ने गोलियां बरसानी शुरू कर दी थी।

काश! गेट खुल जाता
ताबड़तोड़ गोलियां बरसाते हमलावरों से बचने को नितिन शर्मा अपार्टमेंट के गेट की तरफ भागे। गोली लगने के बावजूद उन्होंने गेट खोलने का प्रयास भी किया। मगर कुंडी अंदर से बंद थी। जिसके चलते गेट नहीं खुल पाया। अगर एक बार के प्रयास में ही गेट खुल जाता तो शायद नितिन की जान बच जाती।

कर रखी थी रेकी
हमलावरों ने नितिन के बारे में पूरी जानकारी पहले ही कर ली थी। जब नितिन शर्मा बच्चों को स्कूल छोड़कर आया करते थे। पुलिस के मुताबिक 8.12 बजे डीजीएम के मोबाइल पर आई एक कॉल शुरूआत में संदिग्ध मानी जा रही थी। लेकिन तफ्तीश में पाया गया कि कॉल उनके ऑफिस से की गई थी।

पिस्टल लहराते हुए फरार हुए हमलावर
इंदिरापुरम। हमलावर कॉलोनी के पिछले गेट के बाहर बाइक खड़ी कर पैदल अंदर आए थे और हत्या के बाद आराम से पिस्टल लहराते हुए पैदल उसी तरफ जा रहे थे। गोलियांें की आवाज सुनकर बालकनी पर आई डीजीएम की पत्न ने शोर मचाया तो गार्ड मनप्यारे ने हमलावरों का पीछा किया। सोसाइटी की वृद्धा अनुपमा बख्शी भी हमलावरों के पीछे दौड़ी। लेकिन जैसे ही उन्होंने वृद्धा और गार्ड को पीछे आता देखा तो पिस्टल तान दी, जिसके बाद गार्ड और वृद्धा वहीं रुक गए। डॉक्टर आरके शॉली घायल नितिन को अस्पताल लेकर दौड़े।

कर्मचारी जब अपनी मांग रखते हैं तो कंपनी में ऐसी पॉलिसी नहीं होती कि उसे तुरंत मान लिया जाए। पॉलिसी में तब्दीली में कई बार समय लग जाता है। कई बार कर्मचारी अपना आपा खो बैठते हैं और इस तरह की घटनाएं होती हैं। अधिकारी और कर्मचारियों के बीच ऐंठ सबसे बड़ा विवाद खड़ा करती है, जिसका कारण सिर्फ मुठ्ठी भर लोग ही होते हैं। - प्रवेश कुमार, सीनियर ह्यूमन रिसोर्स विशेषज्ञ
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