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महानगर अब आपके हवाले

Ghaziabad Updated Fri, 20 Jul 2012 12:00 PM IST
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नवनिर्वाचित मेयर तेलूराम कांबोज का पहला दिन, अफसरों और जनता से खुलकर मिले
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गाजियाबाद। नवनिर्वाचित मेयर तेलूराम कांबोज का पहले दिन निगम दफ्तर में शानदार स्वागत हुआ। अफसरों ने फूलों के बुके भेंट किए। तेलूराम पांच कारों के काफिले के साथ सुबह 11:30 बजे निगम पहुंचे थे। मुख्य द्वार पर अपर नगर आयुक्त एके सिंह अधिकारियों के साथ उन्हें कार्यालय तक लेकर गए। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच तेलूराम कांबोज ने मेयर की सीट ग्रहण कर मिठाई बांटी।
कुर्सी संभालते ही पहला सवाल चीफ इंजीनियर से दागा। शहर में पानी की किल्लत क्यों है? हड़बड़ाए चीफ इंजीनियर ने कहा, सर मैं तो सड़कें देखता हूं। तुरंत दूसरा सवाल आया, तो सड़कें क्यों टूटी हैं? इंजीनियर बगलें झांकने लगा। इसके बाद उन्होंने साफ कर दिया कि शहर के विकास में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जनसुविधाएं उनकी प्राथमिकता में हैं। उन्होंने कई फाइलों को मंगवाया, जिनमें से कुछ को अपने पास रख लिया।
कार्यालय में उनके साथ पुत्री सुपर्णा, दामाद पंकज और पार्षद अनिल स्वामी आदि मौजूद रहे। निगम गेट पर अपर नगर आयुक्त एके सिंह, चीफ इंजीनियर एसके श्रीवास्तव, एओ एके सिंह, मुख्य लेखा परीक्षक कर्म विक्रम सिंह, कर्मचारी संघ केअध्यक्ष हरेन्द्र नागर, महासचिव अरविंद त्यागी, सफाई मजदूर संघ के प्रदेश महासचिव प्रदीप चौहान आदि ने मेयर का स्वागत किया।

जरा संभलना, बड़े गड्ढे हैं इस राह में
गाजियाबाद। उत्साह से लबरेज नजर आ रहे तेलूराम कांबोज का सफर मुश्किलों भरा है। शहर में गहरी पैठ बना चुकी समस्याओं से निपटना उनके लिए आसान नहीं होगा। उस पर निगम पहले से ही घाटे में चल रहा है। 18 लाख की आबादी जर्जर सड़कें, टूटी स्ट्रीट लाइटें, सीवर जाम, ओवरफ्लो से गंदगी, चोक हो चुके नाले, मौत को बुलावा देते खुले पड़े सीवर, मैनहोल, बदहाल पेयजल व्यवस्था को पटरी पर लाना बड़ी टेढ़ी खीर है।
तेलूराम के लिए यह अग्निपरीक्षा है। क्योंकि शहर के लोग उनसे बहुत उम्मीदें लगाए हुए हैं। निगम पर करीब 45 करोड़ का कर्ज है। बकाया भुगतान न होने पर नलकूप को विद्युत मोटर नहीं मिल रहे हैं और करीब 90 ठेकेदार टेंडर लेने के बावजूद काम नहीं कर रहे हैं। भुगतान न मिलने से एटूजेड ने काम करना छोड़ दिया है। करोड़ों की जमीन को माफिया दबाए बैठे हैं और निगम के कई अफसरों की निष्ठा संदिग्ध है।


पुराने फैसलों की समीक्षा
मेयर तेलूराम कांबोज ने निगम अफसरों द्वारा पिछले दिनों लिए गए नीतिगत निर्णयों की समीक्षा कराने का फैसला किया है। मेयर ने इन आदेशों को हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करार दिया है। मेयर का कार्यकाल खत्म होने पर हाईकोर्ट ने निगम अफसरों को नीतिगत निर्णय न लेने का आदेश दिया था। इसके बावजूद निगम अफसरों ने कई नीतिगत फैसले किए। इनमें ज्यादातर निर्णय ऐसे थे, जिनको बोर्ड पास नहीं होने दे रहा था। बोर्ड न होने का फायदा उठाकर अफसरों ने ऐसे कई आदेश शासन से स्वीकृत करा लिए। मेयर ने इस पर गहरी नाराजगी जताई है। उनके अनुसार निगम के मामले में अफसर व शासन सीधे निर्णय नहीं ले सकते हैं।

इन निर्णयों पर छाया संकट
मेट्रो को 165 करोड़ की धनराशि देने का निर्णय, जीडीए को आवासीय योजना के लिए निगम की जमीन देना
नए बस अड्डे की जमीन को नि:शुल्क जीडीए को देना और जीडीए द्वारा सौ करोड़ से ज्यादा में एक हिस्सा बेचना
एटूजेड के डोर टू डोर कलेक्शन प्रोजेक्ट को स्वीकृति प्रदान करना, करोड़ों की जमीन कब्जाने वाले बिल्डरों-माफिया पर कार्रवाई न करना आदि।

बोर्ड अपने समय के निर्णयों के प्रति जवाबदेह होता है। बोर्ड न होने पर इसकी शक्ति नगर आयुक्त में निहित है। जो निर्णय बोर्ड न होने की हालत में लिए गए हैं, वह वापस नहीं होंगे।-जितेन्द्र सिंह, नगर आयुक्त।

मेयर की प्राथमिकता
सड़क टूटी तो अफसर जिम्मेदार
मेयर ने कहा कि सड़क बनाते समय आईटी कानपुर या दिल्ली से रोड लाइफ तय कराई जाएगी। यदि इससे पहले सड़क टूटी तो अफसर और ठेकेदार जिम्मेदार होंगे।
अवैध कब्जे हटाए जाएंगे
अवैध कब्जों को हटाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। माफिया को निगम भूमि पर काबिज नहीं रहने देंगे। न्यायालय में विचाराधीन मामलों की पैरवी तेज की जाएगी। महानगर में खुले पड़े मैनहोल एक सप्ताह में कवर कराए जाएंगे। नालों के कवर होने पर रोक लगेगी। यह न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है।
पूर्व मेयर की तरह कराऊंगा विकास
महानगर की छोटी सड़कोें और गलियों को सीमेंटिड कराया जाएगा। पूर्व मेयर डीसी गर्ग ने जो गलियां सीमेंटिड कराई थीं, वो आज भी अच्छी हालत में हैं। इसी तरह कार्य होगा। टैक्स उगाही बढ़ाई जाएगी। निगम की आय का स्रोत यही है। जिन कालोनियों से टैक्स की उगाही नहीं हो रही है, वहां से टैक्स वसूला जाएगा।
फिजूलखर्च पर लगेगी लगाम
यदि निगम घाटे में है तो इसमें सभी सहयोग करें। निगम को अपने घर की तरह चलाएं। न हम निगम की चाय पीएंगे और न ही अफसरों को फिजूलखर्ची करने देंगे। पिछले बोर्ड ने निगम को करोड़ों के फायदे में छोड़ा था। जलकल विभाग ने ही पांच करोड़ का लाभ कमाया है, नुकसान क्यों और कहां हुआ,जांच कराई जाएगी।
होटल स्वामी ने कैसे किया अवैध कब्जा
संजयनगर में सीएनजी पंप के पास एक होटल स्वामी द्वारा सौ मीटर लंबे और 20 फिट चौड़े नाले और एक हजार फिट ग्रीन बेल्ट को किस तरह कब्जाया गया। दोषी अफसर पर कार्रवाई होगी और अतिक्रमण हटवाया जाएगा।बरसात के चलते सड़कोें का निर्माण अभी नहीं कराया जाएगा। पैच वर्क को प्राथमिकता दी जाएगी। बरसात बाद पूर्व में छोड़े गए टेंडर वर्क को शुरू कराया जाएगा। सबसे पहले सिहानी गेट की सड़क बनेगी।
हिंदी भवन में होगा प्रेस क्लब
लोहियानगर स्थित हिंदी भवन को प्रेस क्लब का रूप दिया जाएगा। इस पर स्वामित्व हिंदी भवन का ही होगा। एक आडिटोरियम भी बनेगा।
मेट्रो से पहले पानी चाहिए
लोगों को पानी नहीं मिल रहा। ऐसे में हम बजट का प्रयोग पेयजल के लिए करेंगे, मेट्रो हमारी प्राथमिकता नहीं है। एटूजेड की भी जांच होगी।

11ः30 आए 02 बजे रवाना
गाजियाबाद। पहले दिन बृहस्पतिवार को निगम पहुंचे मेयर तेलूराम कांबोज आत्मविश्वास से भरे नजर आ रहे थे। काफिला रुका। हूटर बजाती गाड़ी का दरवाजा सेवक ने खोला। कुर्ता-धोती पहने तेलूराम कांबोज उतरे और एक नजर निगम भवन को देखा, दूसरी नजर स्वागत को खड़े अफसरों पर डाली। हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार किया और लिफ्ट की ओर बढ़ गए। तीसरी मंजिल पर कार्यालय के बाहर एक मिनट रुके और दरवाजे को निहारा। फिर धीरे-धीरे कुर्सी की ओर बढ़े। कुछ देर खड़े रहे, फिर पूछा पंडित जी कहा हैं, भाई कुछ पूजा-पाठ कराओ। तेलूराम ने अफसरों पर सख्ती दिखाई तो मीडिया को सधा हुआ जवाब दिया। कई सवालों पर बोर्ड बैठक में निर्णय होने की बात कही तो दूसरे दलों के पार्षदों से दिल खोलकर मिले। उन्होंने स्पष्ट भी किया कि कई दलों के और निर्दलीय पार्षद साथ आने को तैयार हैं। 22 से बातचीत भी हो चुकी है। लेकिन साथ ही दोहराया कि महानगर में विकास में राजनीति से ऊपर उठकर सभी विकास के लिए एकजुट होकर प्रयास करेंगे। उनसे मिलने वालों का दिनभर तांता लगा रहा। वह दोपहर दो बजे तक आफिस में बैठे।

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