हॉस्टल में छात्राएं नहीं, ईवीएम

Ghaziabad Updated Tue, 17 Jul 2012 12:00 PM IST
159 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ महिला छात्रावास, गर्ल्स हास्टल तैयार हैंडओवर का इंतजार
गाजियाबाद। काउंसलिंग के जरिए राजकीय पालीटेक्निक, गाजियाबाद में सीट हासिल करने वाली छात्राओं को संस्थान में गर्ल्स हास्टल होने केबावजूद भी किराए पर रहना पड़ेगा। 1.59 करोड़ रुपये की लागत से राजकीय पालीटेक्निक में गर्ल्स हास्टल बनकर तैयार है लेकिन इसमें प्रशासन ने ईवीएम मशीनें रख रखीं हैं। ईवीएम मशीनों का स्टोर होने की वजह से राजकीय पालीटेक्निक गाजियाबाद इसके हैंडओवर की प्रक्रिया शुरू नहीं कर पा रहा है। समस्या यह है कि पालीटेक्निक काउंसलिंग शुरू है और छात्राओं के एडमिशन भी एक दो दिन में शुरू हो जाएंगे। ऐसे में हैंडओवर न होने के कारण सबसे अधिक नुकसान छात्राओं को उठाना पड़ेगा और हास्टल न मिलने की स्थिति में कैंपस के बाहर रहना पड़ेगा।
राजकीय पालीटेक्निक गाजियाबाद में गर्ल्स हास्टल निर्माण के लिए शासन ने 1.86 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की थी। आवास विकास परिषद द्वारा 90 कमरों के गर्ल्स हास्टल के निर्माण में 1.59 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च हुई। जिस मकसद के लिए डेढ़ करोड़ रुपये खर्च हुए वह मकसद ही पूरा होता नहीं दिख रहा है। फिलहाल हास्टल को हैंडओवर करने के लिए कमेटी भी बन गई लेकिन हास्टल का हैंडओवर अटका पड़ा है। अब चूंकि काउंसलिंग प्रक्रिया चरम पर है और सीट पाने वाली छात्राओं ने हास्टल के बारे में पूछताछ भी शुरू कर दी है ऐसे में संस्थान भी हरकत में आया है। अभिभावक और छात्राओं ने भी प्रिंसिपल से मुलाकात कर हास्टल दिलाने की मांग की है।
महिला छात्रावास मार्च से पहले ही बनकर तैयार हो गया है। छात्राएं पूछताछ के लिए आ रही हैं। हास्टल के हैंडओवर के लिए कमेटी गठित हो चुकी है। प्रशासन द्वारा ईवीएम मशीनों को महिला छात्रावास से हटाने के बाद ही हैंडओवर की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। इसके बाद ही गर्ल्स हास्टल में कमरे छात्राओं को अलॉट किए जाएंगे। मनोज कुमार, प्रधानाचार्य राजकीय पालीटेक्निक
ईवीएम मशीनें राजकीय पालीटेक्निक के प्रिंसिपल की सहमति से रखी गई थीं। ईवीएम मशीनों को लेकर कोई आपत्ति थी तो पहले शिकायत की जानी चाहिए थी। इस मामले में मंगलवार को प्रधानाचार्य से समस्या की जानकारी ली जाएगी। -अपर्णा उपाध्याय, डीएम गाजियाबाद

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