बच्चे घरों में, पुलिस की ‘तलाश’ जारी

Ghaziabad Updated Sun, 15 Jul 2012 12:00 PM IST
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गाजियाबाद/साहिबाद(ब्यूरो)। गुमशुदा बच्चों को लेकर पुलिस की संवेदनशीलता की पोल खुल गई। शनिवार को ‘अमर उजाला’ टीम ने पुलिस रिकॉर्ड में गायब कुछ बच्चों के घर जाकर जानकारी की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पता चला कि वे बच्चे तो घर आ गए और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं है। तलाश करना तो दूर पुलिसवाले उनके घर ये जानने भी नहीं पहुंचे उनका बच्चा आया या नहीं। इसके अलावा कुछ लापता बच्चों के पुलिस ने पते ही गलत लिखे हुए हैं।
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217 बच्चे जनपद से अभी भी लापता चल रहे हैं
076 बच्चे तो वर्ष २०१२ में ही गायब हुए हैं
012 बच्चे इस साल जुलाई में ही हो गए हैं गुमशुदा
मिल गए हैं इन घरों केे लाडले
नंदग्राम शांतिनगर निवासी हिमांशु, भूडभारत रेलवे कालोनी निमिल गए हैं इन घरों केे लाडले ासी सागर उपाध्याय, चिरंजीव विहार निवासी सचिन यादव, और कैला रोड निवासी साहिल अंसारी। ये बच्चे ऐसे हैं, जो घर वापस आ चुके हैं, मगर पुलिस रिकॉर्ड देखें तो इन्हें अभी भी गुमशुदा ही दर्शाया जा रहा है।

अभी तक जिला प्रशासन को आयोग का पत्र नहीं मिला है। ऐसा छुट्टियां होने के कारण संभव हो सकता है। आयोग का पत्र मिलते ही निर्देशानुसार रिपोर्ट प्रेषित कर दी जाएगी। - अपर्णा उपाध्याय जिलाधिकारी, गाजियाबाद
पुलिस गुमशुदगी दर्ज कर बच्चों को तलाश करती है। अधिकांश को ढूंढा जा चुका है। कुछ बच्चे हैं, जो अभी नहीं मिल सके हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। कुछ बच्चे और किशोर परिजनों की डांट-फटकार से क्षुब्ध होकर कहीं चले जाते हैं। अपहरण के मामलों में पुलिस लगभग सभी का पटाक्षेप कर चुकी है। - प्रशांत कुमार, एसएसपी

संतरी से मंत्री तक लगाई गुहार, किसी ने नहीं सुना बच्चा गुम होने का दर्द
हर आहट से बढ़ती है धड़कन
हर आहट पर विक्की (14) के आने का गुमान होता है। माता-पिता ही नहीं, परिवार के अन्य सदस्य भी अक्सर यूं ही उसके इंतजार में दरवाजे पर टकटकी लगाए रहते हैं। एक माह होने को है, विक्की का कोई सुराग नहीं लगा है। 20 जून को दीनदयालपुरी से रहस्यमय हालातों में गुम हो गया था। उसकी मां सरोज और पिता किशन स्वरूप विक्की का जिक्र आते ही सिहर उठते हैं।
चक्कर लगाते हार गए
26 मई 2012 को खोड़ा के रहने वाले परचून व्यापारी सत्यवीर शर्मा का बेटा हिमांशु शर्मा (16) अचानक गायब हो गया। मामले में पुलिस ने गुमशुदगी तो दर्ज कर ली। हिमांशु का पता नहीं चला। उसे कोसते हुए पिता सत्यवीर शर्मा कहते हैं कि वरिष्ठ अफसरों के चक्कर लगाते हार गया। हिमांशु की मां की मौत पहले ही हो चुकी थी। दादी शीला शर्मा का रो-रोकर बुरा हाल है।
लौटने की आस अभी बाकी
खोड़ा के सोम बाजार आदर्श नगर मोहल्ले में रहने वाले जयप्रकाश शाह दिल्ली में कैंटीन चलाते हैं। गत छह जुलाई को उनका बेटा किशन अचानक लापता हो गया। उसकी बाइक खोड़ा पुलिया के पास क्षतिग्रस्त हालत में खड़ी मिली। कई बार थाने में शिकायत की। उसके बाद पुलिस ने गुमशुदगी तो दर्ज कर ली। लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ न किया।
पार्क तकती हैं पथराई आंखें
शालीमार गार्डन के कल्लू का ढाई वर्षीय बेटा बादल 23 दिसंबर 2011 को पार्क में खेलने गया था। अचानक खेलते-खेलते पार्क से गायब हो गया। पुलिस को शिकायत दी और संदिग्ध लोगों के नाम बताए। मगर, पुलिस ढुलमुल रवैया अपनाए हुए है। थाने उम्मीद से आते हैं कि शायद उनके दिल के टुकड़े का कुछ पता चल जाए। बेटे के मिलने की आस में रोज पार्क जाते हैं।
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