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लाखों के फ्लैट लिए फिर हजारों फूंके बिजली पर

Ghaziabad Updated Tue, 03 Jul 2012 12:00 PM IST
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गाजियाबाद। लाखों रुपये के फ्लैट्स फिर भी अंधेरे में कटती रातें। बिजली कटौती का असर बिल्डर्स प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदने वाले लाखों शहरवासियों पर भी पड़ रहा है। पावर बैकअप सुविधा के लिए फ्लैट खरीदने वालों को हजारों रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं। ऐसे में नोएडा-दिल्ली को छोड़ शहर में फ्लैट खरीदने के फैसले पर लोग खुद ही खीझते हैं। शहर में रियल एस्टेट कारोबार से करोड़ों रुपये कमाने वाले बिल्डर्स भी इस दिशा में कुछ नहीं कर रहे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर लोग क्यों शहर में लाखों रुपये का निवेश करें?
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गाजियाबाद आरडब्लूए फेडरेशन के सचिव प्रीतम लाल ने कहा कि शहर में जो फ्लैट 30 लाख रुपये का है, वह नोएडा-दिल्ली में 50 लाख रुपये का होगा। महज 15 से 20 लाख रुपये बचाने के चक्कर में लोग यहां आकर फंस जाते हैं। पावर बैकअप सुविधा के नाम पर बिल्डर रेजीडेंट्स से 14-15 रुपये प्रति यूनिट चार्ज करते हैं। इसमें भी खेल किया जाता है। बिजली आने के बावजूद पावर कट दिखाकर रेजीडेंट्स से अतिरिक्त धन वसूला जाता है।
दूसरी ओर आरएनई बिल्डर्स एसोसिएशन के प्रवक्ता गौरव गुप्ताने कहा कि बिजली देश भर के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। बिल्डर्स ने कई बार स्थानीय और प्रदेश स्तर पर बिजली कटौती का मुद्दा उठाया है। भविष्य में हालत सुधरने की सभी को उम्मीद है।

अपार्टमेंट एक्ट : आरडब्लूए लेगी कोर्ट की शरण
गाजियाबाद। अपार्टमेंट एक्ट 2010 का शहर में कड़ाई से पालन कराने की पहल गाजियाबाद आरडब्लूए फेडरेशन ने की है। फेडरेशन एक्ट और उसके नियमों को प्रभावी तरीके से लागू कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का सहारा लेगी। फेडरेशन ने पांच जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल डालने की तैयारी शुरू कर दी है। फेडरेशन चेयरमैन कर्नल टीपी त्यागी ने बताया कि लाखों की आबादी बहुमंजिला इमारतों में रहती है। इनके हितों की रक्षा के लिए बनाए गए अपार्टमेंट एक्ट 2010 और एक्ट के नियमों 2011 का पालन नहीं किया जा रहा है। अधिकारियों की उदासीनता और मिलीभगत से बिल्डर अभी अपनी जिम्मेदारियों से बच रहे हैं। फेडरेशन किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाने की बजाय एक्ट को प्रभावी ढंग से लागू कराने की अपील सुप्रीम कोर्ट से करेगा।

ऐसा क्यों नहीं होता
गाजियाबाद आरडब्लूए फेडरेशन के चेयरमैन कर्नल टीपी त्यागी ने बताया कि नोएडा अथॉरिटी ने यूपीपीसीएल को को 200 करोड़ रुपये दिए। यूपीपीसीएल ने इस धनराशि को सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड को नोएडा के लिए कुछ अतिरिक्त बिजली देने के लिए दिया। अब नोएडा को 24 घंटे बिजली मिलती है। जीडीए वीसी को भी यही करना चाहिए।

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