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Ghaziabad Updated Mon, 02 Jul 2012 12:00 PM IST
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यूपी एसईई काउंसलिंग 08 दिन दूर, हो जाएं तैयार
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d अमर उजाला ब्यूरो
गाजियाबाद/साहिबाबाद। यूपी एसईई में सफल एक लाख 29 हजार स्टूडेंट्स प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों की यूपी एसईई की 98 हजार सीटों पर प्रवेश की दौड़ में हैं। काउंसलिंग में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स को एडमिशन तो मिल जाएगा, लेकिन असल लड़ाई टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन की है। चार साल के बीटेक कोर्स के लिए एक स्टूडेंट्स पर पांच से 6 लाख रुपये का खर्च आएगा। गाजियाबाद एजुकेशन हब के रूप में मशहूर है और यहां सबसे अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। इतनी मोटी रकम खर्च करने के बाद पसंदीदा कॉलेज न मिले तो कॅरियर को ऊंचाई पर ले जाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है। काउंसलिंग में अभी 08 दिन का वक्त है। ऐसे में स्टूडेंट्स विकल्पों की तलाश शुरू कर दें।
पहले साल 1.75 लाख का खर्च
गाजियाबाद के इंजीनियरिंग कॉलेजों में इन्फ्रास्ट्रक्चर, ब्रांच, सीट और अन्य सुविधाओं के आधार पर अलग-अलग फीस निर्धारित है। यह फीस 90 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक है। इसके अलावा सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों में हॉस्टल की सुविधा भी है। मुश्किल यह है कि हॉस्टल का खर्च 50,000 रुपये है और हॉस्टल भी 50 फीसदी स्टूडेंट्स को ही मिल पाता है। ऐसे में स्टूडेंट्स को 50 हजार रुपये तक हॉस्टल के लिए खर्च करने पड़ेंगे। कुल मिलाकर अभिभावकों को पौने दो लाख रुपये पहले साल एडमिशन के दौरान खर्च करने होंगे। राहत यह भी है कि कई कॉलेज किस्तों में भी फीस लेते हैं, इससे अभिभावकों पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ता।


सेकेंड शिफ्ट में भी विकल्प
गाजियाबाद ही नहीं प्रदेश के कई इंजीनियरिंग कॉलेजों में सेकेंड शिफ्ट है। ऐसे में वे स्टूडेंट्स जो अच्छी रैंक न होने के कारण बढ़िया कॉलेजों में मनचाही ब्रांच नहीं ले पाते हैं। उनको सेकेंड शिफ्ट में बेहतर ऑप्शन मिलेंगे। गाजियाबाद में आरकेजीआईटी में 180, बीबीडीआईटी में 120, आईएमएस डासना में 240, एचआरआईटी में 120, हाईटेक इंस्टीट्यूट में 120 और एबीईएस इंजीनियरिंग कॉलेज में सेकेंड शिफ्ट में विभिन्न ब्रांच की 120 सीटें उपलब्ध हैं।

काउंसलिंग से पहले कर लें तैयारी
अपनी रैंक के आधार पर वर्ष 2011 की काउंसलिंग में इंजीनियरिंग कॉलेजों की ओपन-क्लोज रैंक के अनुसार कॉलेजों का पहले ही चुनाव कर लें। कॉलेज का रिजल्ट ही उसका आइना होता है, ऐसे अपनी रैंक के अनुसार जो भी कॉलेज चुनें उसके रिजल्ट के बारे में पहले से ही जानकारी जुटा लें। रिजल्ट अच्छा होगा तो फैकल्टी के बारे में संदेह नहीं रहेगा। इसके अलावा कॉलेज का प्लेसमेंट रिकार्ड भी जरूर चेक करें ताकि कोर्स पूरा करने के बाद जॉब के लिए भटकना न पड़े।

सिविल में रहेंगे बेहतर ऑप्शन
जिले के 14 संस्थानों में सिविल इंजीनियरिंग मौजूद है और कुल 840 सीटें हैं। पिछले साल केवल चार कॉलेजों में ही सिविल इंजीनियरिंग ब्रांच थी। ऐसे में बिल्डिंग निर्माण क्षेत्र में कॅरियर बनाने की चाहत रखने वाले स्टूडेंट्स के लिए गाजियाबाद में बेहतर मौके हैं।
गाजियाबाद में तीन गर्ल्स कॉलेज
जिले में पिछले साल चार गर्ल्स कॉलेज थे, लेकिन इस बार तीन गर्ल्स कॉलेज ही हैं। इनमें आरकेजीआईटी वुमन कॉलेज, रिशि चड्ढा विश्वास गर्ल्स कॉलेज और डा. केएन मोदी गर्ल्स इंजीनियरिंग कॉलेज, मोदीनगर शामिल हैं।

काउंसलिंग शुरू होने से पहले जिस कॉलेज में प्रवेश की संभावना नजर आए, उसके बारे में पूरी जानकारी जुटा लें। साथ ही किस ब्रांच में एडमिशन लेना है, यह भी तय कर लें। स्टूडेंट्स के सामने अक्सर यही समस्या आती है कि मनचाहा कॉलेज मिलने की उम्मीद हो तो ब्रांच नहीं और ब्रांच मिल रही है तो मनचाहा कॉलेज नहीं मिलता। काउंसलिंग के दौरान ऐसी स्थितियां न बने इसको ध्यान में रखकर पूर्व में ही पूरी तैयारी कर लें। -अनिल अग्रवाल, चेयरमैन, एचआर ग्रुप

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